7 अक्टूबर 2026
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8 अक्टूबर पंचांग 2026: प्रदोष व्रत पर शिव पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:59 से 8:27 बजे तक

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8 अक्टूबर पंचांग 2026: प्रदोष व्रत पर शिव पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:59 से 8:27 बजे तक

सारांश

8 अक्टूबर 2026 को आश्विन कृष्ण त्रयोदशी और प्रदोष व्रत का संयोग है। शिव उपासना के लिए प्रदोष काल शाम 5:59 से रात 8:27 बजे तक रहेगा, अभिजीत मुहूर्त 11:45 से 12:31 बजे, और राहुकाल 1:29 से 2:55 बजे। दिशाशूल के कारण दक्षिण यात्रा से परहेज की सलाह।

मुख्य बातें

8 अक्टूबर 2026 , गुरुवार को आश्विन कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि रात 10:16 बजे तक रहेगी।
प्रदोष काल शाम 5:59 बजे से रात 8:27 बजे तक — इस दौरान भगवान शिव का अभिषेक और पूजन विशेष शुभ।
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:45 से दोपहर 12:31 बजे तक; शुभ कार्यों के लिए उत्तम।
राहुकाल दोपहर 1:29 से 2:55 बजे ; गुलिक काल सुबह 9:03 से 10:29 बजे ; यमगंड काल 6:17 से 7:43 बजे ।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र 9 अक्टूबर सुबह 6:32 बजे तक; वरियान योग रात 3:41 बजे तक।
गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल — दक्षिण यात्रा से बचने की सलाह।

8 अक्टूबर 2026, गुरुवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस दिन आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि और प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है, जो भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि रात 10:16 बजे तक रहेगी।

प्रदोष व्रत का महत्व और पूजा मुहूर्त

प्रदोष व्रत में संध्याकाल भगवान शिव की आराधना का सर्वश्रेष्ठ समय होता है। 8 अक्टूबर को प्रदोष काल शाम 5:59 बजे से रात 8:27 बजे तक रहेगा। इस अवधि में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और पुष्प अर्पित करना, अभिषेक और दीप प्रज्वलन विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस काल में श्रद्धापूर्वक की गई उपासना से भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

नक्षत्र, योग और करण

पंचांग के अनुसार इस दिन पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र प्रभावी रहेगा, जो 9 अक्टूबर की सुबह 6:32 बजे तक रहेगा। वरियान योग रात 3:41 बजे तक और कौलव करण सुबह 8:46 बजे तक रहेगा। गुरुवार होने के कारण यह दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा के लिए भी महत्वपूर्ण है।

शुभ मुहूर्त और अशुभ काल

किसी भी शुभ कार्य के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। वहीं अशुभ कालों की बात करें तो राहुकाल दोपहर 1:29 बजे से 2:55 बजे, गुलिक काल सुबह 9:03 बजे से 10:29 बजे और यमगंड काल सुबह 6:17 बजे से 7:43 बजे तक रहेगा। इन कालों में महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र-स्थिति

दिन की शुरुआत सूर्योदय सुबह 6:19 बजे से होगी और सूर्यास्त शाम 5:47 बजे होगा। चंद्रोदय 9 अक्टूबर की सुबह 2:48 बजे और चंद्रास्त शाम 4:28 बजे होगा।

दिशाशूल और यात्रा संबंधी सावधानी

पंचांग के अनुसार गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन दक्षिण दिशा की यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा अपरिहार्य हो, तो उचित धार्मिक उपाय कर यात्रा आरंभ की जा सकती है। हिंदू काल-गणना पद्धति में पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित होता है और प्रत्येक शुभ कार्य से पहले इसका परामर्श लिया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो यह दर्शाती है कि धार्मिक काल-गणना आज भी करोड़ों भारतीयों के दैनिक जीवन में केंद्रीय भूमिका निभाती है। प्रदोष व्रत का गुरुवार से संयोग — जो स्वयं विष्णु और बृहस्पति की उपासना का दिन है — इस तिथि को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। हालाँकि पंचांग की जानकारी क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती है, इसलिए पाठकों को स्थानीय ज्योतिषाचार्य से भी परामर्श लेने की सलाह दी जाती है।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

8 अक्टूबर 2026 को प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त क्या है?
8 अक्टूबर 2026 को प्रदोष काल शाम 5:59 बजे से रात 8:27 बजे तक रहेगा। इस दौरान भगवान शिव का अभिषेक, पूजन और दीप प्रज्वलन विशेष फलदायी माना जाता है।
8 अक्टूबर 2026 को कौन-सी तिथि है?
8 अक्टूबर 2026 को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है, जो रात 10:16 बजे तक रहेगी। इसी दिन प्रदोष व्रत भी रखा जाएगा।
8 अक्टूबर 2026 को राहुकाल का समय क्या है?
8 अक्टूबर 2026 को राहुकाल दोपहर 1:29 बजे से 2:55 बजे तक रहेगा। इस अवधि में महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने से बचना शुभ माना जाता है।
8 अक्टूबर 2026 को कौन-सा नक्षत्र है?
8 अक्टूबर 2026 को पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र प्रभावी रहेगा, जो 9 अक्टूबर की सुबह 6:32 बजे तक चलेगा। इस दिन वरियान योग रात 3:41 बजे तक और कौलव करण सुबह 8:46 बजे तक रहेगा।
8 अक्टूबर 2026 को दिशाशूल किस दिशा में है?
गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन दक्षिण दिशा की यात्रा से बचना चाहिए; अनिवार्य होने पर उचित उपाय कर यात्रा की जा सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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