10 अगस्त 2026 पंचांग: सावन के दूसरे सोमवार पर 6 साल बाद बना दुर्लभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त
सारांश
मुख्य बातें
सावन माह का दूसरा सोमवार, 10 अगस्त 2026, इस वर्ष विशेष रूप से फलदायी माना जा रहा है। पंचांग के अनुसार, इस दिन सोम प्रदोष व्रत और कामिका एकादशी पारण का दुर्लभ संयोग एक साथ बन रहा है, जो ज्योतिषीय गणना के अनुसार 6 वर्षों के अंतराल के बाद आया है। भगवान शिव की आराधना के लिए यह दिन अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
तिथि और नक्षत्र की स्थिति
10 अगस्त 2026 को श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि प्रातः 8:01 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात त्रयोदशी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। सूर्य इस दिन अश्लेषा नक्षत्र में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा दोपहर 12:27 बजे तक आर्द्रा नक्षत्र में रहेगा और इसके बाद पुनर्वासु नक्षत्र में प्रवेश करेगा।
राशि की दृष्टि से, सूर्य कर्क राशि में और चंद्रमा मिथुन राशि में स्थित रहेंगे। इस दिन वज्र योग प्रभावी रहेगा।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय
सोमवार को सूर्योदय प्रातः 6:05 बजे और सूर्यास्त सायं 6:59 बजे होगा। चंद्रोदय रात्रि 3:00 बजे और चंद्रास्त अगले दिन अर्थात 11 अगस्त को सायं 5:14 बजे होगा।
शुभ मुहूर्त — कब करें पूजा और महत्वपूर्ण कार्य
दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ समय अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:06 बजे से 12:57 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त अमृत काल भोर में 3:23 बजे से 4:50 बजे तक रहेगा, जो विशेष पूजा-अनुष्ठान के लिए उत्तम माना जाता है।
सावन के सोमवार पर भगवान महादेव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और बेलपत्र अर्पण विशेष फलदायी माने जाते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन के दुर्लभ संयोग में की गई शिव-आराधना से मनोकामनाएँ पूर्ण होने की संभावना बढ़ जाती है।
अशुभ काल — इन समयों में बचें नए कार्यों से
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल प्रातः 7:41 बजे से 9:18 बजे तक, यमगंड काल प्रातः 10:55 बजे से 12:32 बजे तक और गुलिक काल दोपहर 2:09 बजे से 3:45 बजे तक रहेगा। इन अवधियों में नए कार्य, शुभ यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचने की सलाह दी जाती है।
दिशाशूल और यात्रा संबंधी सावधानी
सोमवार को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु परंपराओं के अनुसार, इस दिन पूर्व दिशा में यात्रा से बचना उचित माना जाता है। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो विशेष ज्योतिषीय उपाय अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है। सावन के इस दुर्लभ संयोग का पूरा लाभ उठाने के लिए शुभ मुहूर्त में महादेव की आराधना करना सर्वोत्तम रहेगा।