25 अगस्त 2026 पंचांग: भौम प्रदोष और मंगला गौरी व्रत का दुर्लभ संयोग, शिव-पार्वती पूजा से कर्ज मुक्ति और दीर्घायु का वरदान
सारांश
मुख्य बातें
25 अगस्त 2026 (मंगलवार) को हिंदू पंचांग के अनुसार सावन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि प्रातः 6:21 बजे तक प्रभावी रहेगी, जिसके पश्चात त्रयोदशी तिथि आरंभ होगी। इस दिन सावन के अंतिम भौम प्रदोष व्रत और मंगला गौरी व्रत का दुर्लभ एवं शुभ संयोग बन रहा है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष संयोग पर भगवान शिव और माता पार्वती (मंगला गौरी) की पूजा-अर्चना कर्ज मुक्ति, आर्थिक समस्याओं के निवारण और दीर्घायु के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
तिथि, सूर्योदय एवं चंद्रोदय का विवरण
मंगलवार को सूर्योदय प्रातः 6:10 बजे और सूर्यास्त सायं 6:47 बजे होगा। चंद्रोदय सायं 5:09 बजे और चंद्रास्त अगले दिन तड़के 4:12 बजे होगा। पंचांग गणना के अनुसार इस दिन सूर्य मघा नक्षत्र में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा देर रात तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में विराजमान रहेगा।
शुभ मुहूर्त और योग
25 अगस्त को प्रातः लगभग 7:39 से 7:41 बजे तक आयुष्मान योग प्रभावी रहेगा, इसके पश्चात सौभाग्य योग आरंभ होगा। दिन का सर्वाधिक शुभ समय अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:03 से 12:54 बजे तक रहेगा — इस अवधि में किए गए शुभ कार्य विशेष फलदायी माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त, अमृत काल दोपहर 3:48 से सायं 5:33 बजे तक रहेगा, जो पूजा-पाठ और मंत्र-जाप के लिए उत्तम माना जाता है।
अशुभ काल — इन समयों में नए कार्य न करें
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ समय-खंड अशुभ माने जाते हैं और इनमें कोई नया कार्य आरंभ नहीं करना चाहिए। राहुकाल दोपहर 3:38 से 5:12 बजे, गुलिक काल दोपहर 12:28 से 2:03 बजे और यमगंड काल प्रातः 9:19 से 10:54 बजे तक रहेगा। इन अवधियों में महत्वपूर्ण निर्णय, निवेश या यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।
ग्रह स्थिति और दिशाशूल
इस दिन सूर्य सिंह राशि में और चंद्रमा मकर राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय परंपरा के अनुसार उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा, अतः उत्तर दिशा की यात्रा से यथासंभव बचना चाहिए। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो किसी अनुभवी ज्योतिषी द्वारा सुझाए विशेष उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।
भौम प्रदोष और मंगला गौरी व्रत का महत्व
सावन मास में मंगलवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत भौम प्रदोष कहलाता है, जो शिव उपासना के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं, सावन के प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है, जो माता पार्वती को समर्पित है। इन दोनों व्रतों का एक साथ पड़ना इस दिन को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत विशिष्ट बनाता है। यह सावन का अंतिम भौम प्रदोष होने के कारण और भी महत्वपूर्ण है।