4 अगस्त 2026 पंचांग: सावन का पहला मंगला गौरी व्रत आज, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल
सारांश
मुख्य बातें
सावन मास के पहले मंगला गौरी व्रत के अवसर पर 4 अगस्त 2026 (मंगलवार) का पंचांग विशेष महत्व रखता है। इस दिन सुहागिन महिलाएँ माता गौरी (पार्वती) और भगवान शिव की आराधना कर अखंड सौभाग्य एवं सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ उपवास रखती हैं। हिंदू काल-गणना पद्धति के अनुसार यह दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
तिथि और नक्षत्र
4 अगस्त 2026 को कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि रात 10:03 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात सप्तमी तिथि आरंभ हो जाएगी। सूर्य इस दिन कर्क राशि में अश्लेषा नक्षत्र में स्थित रहेगा। चंद्रमा रात 9:51 बजे तक मीन राशि के रेवती नक्षत्र में विचरण करेगा, इसके बाद अश्विनी नक्षत्र का आरंभ होगा।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय
मंगलवार को सूर्योदय सुबह 6:02 बजे और सूर्यास्त शाम 7:03 बजे होगा। चंद्रोदय रात 10:35 बजे और चंद्रास्त अगले दिन सुबह 11:53 बजे होगा। इस दिन धृति योग रहेगा।
शुभ मुहूर्त
दिन का सर्वश्रेष्ठ समय अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07 बजे से 12:59 बजे तक रहेगा — पंचांग के अनुसार यह दिन का सबसे शुभ काल माना जाता है। इसके अतिरिक्त अमृत काल रात 7:29 बजे से 9:04 बजे तक रहेगा, जो पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल है।
अशुभ काल — राहुकाल और यमगंड
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन तीन अशुभ काल हैं, जिनमें नए कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए। राहुकाल शाम 3:48 बजे से 5:25 बजे, गुलिक काल दोपहर 12:33 बजे से 2:10 बजे और यमगंड काल सुबह 9:17 बजे से 10:55 बजे तक रहेगा।
दिशाशूल और यात्रा परामर्श
ज्योतिष और वास्तु मान्यताओं के अनुसार 4 अगस्त 2026 को उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। इस दिशा में यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है। सावन के इस पहले मंगला गौरी व्रत पर शिव-पार्वती की उपासना से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आने की मान्यता है।