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3 अगस्त 2026 पंचांग: सावन के पहले सोमवार पर शिव-पार्वती पूजा, अमृत काल शाम 5:07–6:44 बजे

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3 अगस्त 2026 पंचांग: सावन के पहले सोमवार पर शिव-पार्वती पूजा, अमृत काल शाम 5:07–6:44 बजे

सारांश

3 अगस्त 2026 को सावन का पहला सोमवार है — शिव भक्तों के लिए वर्ष का सबसे पवित्र दिन। पंचमी तिथि, सुकर्म योग और अमृत काल (शाम 5:07–6:44) का संयोग इस दिन को पूजा-पाठ के लिए विशेष बनाता है।

मुख्य बातें

3 अगस्त 2026 को सावन माह का पहला सोमवार है — भगवान शिव और माँ पार्वती की पूजा के लिए अत्यंत शुभ।
श्रावण कृष्ण पंचमी तिथि रात 10:54 बजे तक; इसके बाद षष्ठी आरंभ।
अमृत काल शाम 5:07 से 6:44 बजे ; अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07 से 12:59 बजे ।
इस दिन सुकर्म योग ; सूर्य पुष्य नक्षत्र और चंद्रमा उत्तर भाद्रपदा (रात 10 बजे तक), फिर रेवती नक्षत्र।
राहुकाल शाम 7:40–9:17, गुलिक काल दोपहर 2:10–3:48, यमगंड प्रातः 10:55–12:33 — इन समयों में नए कार्य न करें।
पूर्व दिशा में दिशाशूल; उस दिशा में यात्रा से बचने की सलाह।

सावन माह का पहला सोमवार 3 अगस्त 2026 को पड़ रहा है, जो भगवान शिव और माँ पार्वती की उपासना के लिए वर्ष का सर्वाधिक पवित्र दिन माना जाता है। पंचांग के अनुसार इस दिन श्रावण कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि रात 10:54 बजे तक रहेगी, इसके बाद षष्ठी तिथि आरंभ होगी। शिव भक्तों के लिए यह दिन विशेष फलदायी बताया जाता है।

तिथि, नक्षत्र और योग

इस सोमवार सूर्योदय प्रातः 6:02 बजे और सूर्यास्त सायं 7:03 बजे होगा। चंद्रोदय रात 9:59 बजे तथा चंद्रास्त प्रातः 10:54 बजे रहेगा। सूर्य इस दिन पुष्य नक्षत्र में स्थित रहेगा। चंद्रमा रात 10:00 बजे तक उत्तर भाद्रपदा नक्षत्र में रहेगा, तत्पश्चात रेवती नक्षत्र आरंभ होगा। योग की दृष्टि से इस दिन सुकर्म योग रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।

शुभ मुहूर्त और अमृत काल

दिन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07 बजे से 12:59 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त अमृत काल सायं 5:07 बजे से 6:44 बजे तक रहेगा — यह समय पूजा-पाठ, मंत्र जाप और महत्वपूर्ण कार्यों के आरंभ के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

अशुभ काल — इन समयों में सावधानी बरतें

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल सायं 7:40 बजे से 9:17 बजे, गुलिक काल दोपहर 2:10 बजे से 3:48 बजे और यमगंड काल प्रातः 10:55 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। इन अवधियों में नए कार्यों का शुभारंभ, महत्वपूर्ण निर्णय या यात्रा से बचने की परंपरागत सलाह दी जाती है।

ग्रह स्थिति और दिशाशूल

इस दिन सूर्य कर्क राशि में और चंद्रमा मीन राशि में स्थित रहेंगे। पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा, अतः ज्योतिषीय परंपरा के अनुसार उस दिशा में यात्रा टालना उचित रहेगा। यदि पूर्व दिशा में यात्रा अनिवार्य हो, तो किसी योग्य ज्योतिषी के परामर्श से विशेष उपाय अपनाए जा सकते हैं।

सावन सोमवार पर शिव पूजा विधि

सावन के पहले सोमवार को शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शक्कर, शहद और घी से बना पंचामृत अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके साथ बेलपत्र, धतूरा, सफेद पुष्प और चंदन चढ़ाकर विधिपूर्वक पूजन करने से विशेष फल की प्राप्ति की मान्यता है। सावन में प्रत्येक सोमवार भगवान शिव को समर्पित होता है और इस माह की पूजा का फल अन्य माहों की तुलना में अधिक फलदायी बताया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यात्रा, नए कार्य — को प्रभावित करता है, जो भारतीय समाज में ज्योतिषीय परंपरा की गहरी जड़ों को दर्शाता है। इस वर्ष सुकर्म योग और अमृत काल का संयोग श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यह भी उल्लेखनीय है कि पंचांग-आधारित मुहूर्त की जानकारी डिजिटल माध्यमों पर सर्वाधिक खोजी जाने वाली धार्मिक सामग्री में शामिल है, जो परंपरा और प्रौद्योगिकी के अनूठे मेल को रेखांकित करती है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

3 अगस्त 2026 को सावन का पहला सोमवार क्यों खास है?
3 अगस्त 2026 को श्रावण माह (सावन) का पहला सोमवार है, जो भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दिन शिवलिंग पर पंचामृत, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति की मान्यता है।
3 अगस्त 2026 को अमृत काल कब है?
3 अगस्त 2026 को अमृत काल शाम 5:07 बजे से 6:44 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07 से 12:59 बजे तक है, जो दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ समय माना जाता है।
3 अगस्त 2026 को राहुकाल और अन्य अशुभ काल कब हैं?
इस दिन राहुकाल शाम 7:40 से 9:17 बजे, गुलिक काल दोपहर 2:10 से 3:48 बजे और यमगंड काल प्रातः 10:55 से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इन समयों में नए कार्यों का आरंभ नहीं करना चाहिए।
3 अगस्त 2026 को कौन सी तिथि और नक्षत्र रहेगा?
इस दिन श्रावण कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि रात 10:54 बजे तक रहेगी, उसके बाद षष्ठी आरंभ होगी। सूर्य पुष्य नक्षत्र में और चंद्रमा रात 10 बजे तक उत्तर भाद्रपदा नक्षत्र में, तत्पश्चात रेवती नक्षत्र में रहेगा।
सावन सोमवार को शिवलिंग पर क्या अर्पित करना चाहिए?
सावन सोमवार को शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शक्कर, शहद और घी से बना पंचामृत चढ़ाएँ। साथ ही बेलपत्र, धतूरा, सफेद पुष्प और चंदन अर्पित करना शुभ माना जाता है।
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