6 जुलाई 2026 पंचांग: सोमवार को शिव पूजा शुभ, दोपहर 12:04 से 12:58 बजे तक अभिजित मुहूर्त
सारांश
मुख्य बातें
हिंदू पंचांग के अनुसार 6 जुलाई 2026 (सोमवार) को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि दोपहर 1:47 बजे तक प्रभावी रहेगी, जिसके पश्चात सप्तमी तिथि आरंभ होगी। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, इसलिए इस दिन शिव पूजा विशेष रूप से लाभकारी बताई जाती है।
शुभ मुहूर्त और अमृत काल
इस दिन का सबसे शुभ समय अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:04 बजे से 12:58 बजे तक रहेगा। पंचांग शास्त्र में अभिजित मुहूर्त को दिन का सर्वश्रेष्ठ काल माना जाता है — इस अवधि में राहुकाल या किसी अन्य अशुभ समय की चिंता किए बिना कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, पूजा या व्यापारिक गतिविधि आरंभ की जा सकती है।
अमृत काल सुबह 7:16 बजे से 8:56 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:14 बजे से 5:02 बजे तक रहेगा, जो ध्यान, साधना और मंत्र-जाप के लिए उत्तम समय माना जाता है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा की स्थिति
सोमवार को सूर्योदय सुबह 5:50 बजे और सूर्यास्त शाम 7:12 बजे होगा। चन्द्रोदय रात 10:24 बजे और चन्द्रास्त दोपहर 12:02 बजे होगा।
ग्रह-स्थिति की दृष्टि से, सूर्य इस दिन आर्द्रा नक्षत्र से निकलकर पुनर्वसु नक्षत्र में गोचर करेंगे और मिथुन राशि में स्थित रहेंगे। चंद्रमा दोपहर 4:07 बजे तक पूर्व भाद्रपद नक्षत्र में रहेंगे, तत्पश्चात उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित रहेंगे।
योग और उनका प्रभाव
पंचांग के अनुसार 6 जुलाई को हर्षण योग प्रभावी नहीं रहेगा। इस दिन सौभाग्य योग और प्रीति योग सक्रिय रहेंगे, जो शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माने जाते हैं।
अशुभ काल — राहुकाल, गुलिक और यमगंड
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इन तीन कालों में नए कार्यों का आरंभ वर्जित माना जाता है। राहुकाल सुबह 7:13 बजे से 8:57 बजे तक, गुलिक काल दोपहर 2:11 बजे से 3:55 बजे तक, और यमगंड काल सुबह 10:50 बजे से 12:31 बजे तक रहेगा।
दिशाशूल और यात्रा संबंधी सावधानी
सोमवार 6 जुलाई को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु परंपरा के अनुसार इस दिन पूर्व दिशा में यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा अपरिहार्य हो, तो ज्योतिषीय उपायों का पालन करना उचित माना जाता है।
जो श्रद्धालु सोमवार का व्रत रखते हैं, उन्हें 'ओम नमः शिवाय' मंत्र का जाप करने की अनुशंसा की जाती है। अभिजित मुहूर्त और अमृत काल का सदुपयोग करते हुए दिन की शुरुआत करना फलदायी रह सकता है।