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12 जुलाई 2026 पंचांग: अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:05–12:59 बजे, शिव-लक्ष्मी पूजा और नए कार्यों के लिए शुभ दिन

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12 जुलाई 2026 पंचांग: अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:05–12:59 बजे, शिव-लक्ष्मी पूजा और नए कार्यों के लिए शुभ दिन

सारांश

12 जुलाई 2026 (रविवार) को आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी पर अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:59 बजे तक रहेगा — नए कार्य, वाहन खरीद और शिव-लक्ष्मी पूजा के लिए उत्तम समय। राहुकाल शाम 5:39 बजे से और पश्चिम दिशा में दिशाशूल से सावधान रहें।

मुख्य बातें

12 जुलाई 2026 (रविवार) को आषाढ़ माह कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि रात 10:30 बजे तक रहेगी।
अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:59 बजे तक — दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ काल।
वृद्धि योग रात 8:05 बजे तक; इसके बाद व्यतिपात योग प्रभावी।
राहुकाल शाम 5:39–7:23 , गुलिक काल दोपहर 3:55–5:39 , यमगंड दोपहर 12:26–2:10 बजे — इन समयों में नए कार्य वर्जित।
सूर्य मिथुन राशि और चंद्रमा वृषभ राशि में; पश्चिम दिशा में दिशाशूल।
भगवान शिव और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए दिन विशेष रूप से शुभ।

हिंदू काल-गणना पद्धति पंचांग के अनुसार, 12 जुलाई 2026 (रविवार) का दिन धार्मिक और व्यावहारिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस दिन आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि रात 10:30 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन नए कार्य की शुरुआत, वाहन अथवा संपत्ति की खरीद के लिए अत्यंत उत्तम माना गया है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र-गणना

इस दिन सूर्योदय सुबह 5:53 बजे और सूर्यास्त शाम 7:12 बजे होगा। चंद्रोदय रात 3:05 बजे तथा चंद्रास्त शाम 5:26 बजे निर्धारित है। पंचांग के अनुसार सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा सुबह 8:28 बजे तक रोहिणी नक्षत्र में रहेगा और इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश करेगा।

अभिजित मुहूर्त और शुभ योग

रविवार को दिन का सर्वाधिक शुभ समय अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:59 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यता है कि इस काल में राहुकाल या अन्य अशुभ समय की चिंता किए बिना कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, पूजा-पाठ अथवा व्यापार का शुभारंभ किया जा सकता है। योग की दृष्टि से इस दिन वृद्धि योग रात 8:05 बजे तक प्रभावी रहेगा, जिसके बाद व्यतिपात योग लागू होगा।

अशुभ काल — राहुकाल, गुलिक और यमगंड

धार्मिक परंपराओं के अनुसार इन तीन कालों में नए कार्यों का आरंभ वर्जित माना जाता है। राहुकाल शाम 5:39 बजे से 7:23 बजे तक, गुलिक काल दोपहर 3:55 बजे से शाम 5:39 बजे तक और यमगंड काल दोपहर 12:26 बजे से 2:10 बजे तक रहेगा। इन अवधियों में शुभ कार्य टालने की सलाह दी जाती है।

राशि गोचर और दिशाशूल

12 जुलाई 2026 को सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा वृषभ राशि में गोचर करेंगे। इस दिन पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस दिशा में यात्रा से बचना उचित माना जाता है; यदि यात्रा अनिवार्य हो तो ज्योतिषीय उपायों का पालन करने की परंपरा है।

पूजा और आध्यात्मिक महत्व

त्रयोदशी तिथि भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है, जबकि इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा भी शुभ फल देने वाली बताई गई है। अभिजित मुहूर्त में की गई पूजा-अर्चना को परंपरागत रूप से अधिक प्रभावशाली माना जाता है। आने वाले दिनों के पंचांग और मुहूर्त की जानकारी के लिए नियमित रूप से पंचांग का अवलोकन करते रहें।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दिन की शुरुआत से पहले शुभ-अशुभ समय जानना चाहते हैं। त्रयोदशी तिथि पर अभिजित मुहूर्त का संयोग और वृद्धि योग इस रविवार को सामान्य से अधिक अनुकूल बनाते हैं। हालाँकि यमगंड और अभिजित मुहूर्त का आंशिक ओवरलैप (12:26 बजे से) पाठकों को सावधानीपूर्वक समय-चयन की याद दिलाता है — पंचांग का सही उपयोग केवल तिथि जानने में नहीं, बल्कि काल-विभाजन की बारीकियाँ समझने में है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

12 जुलाई 2026 को अभिजित मुहूर्त कितने बजे है?
12 जुलाई 2026 (रविवार) को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:59 बजे तक रहेगा। यह दिन का सर्वाधिक शुभ काल माना जाता है, जिसमें नए कार्य, पूजा और व्यापार का शुभारंभ किया जा सकता है।
12 जुलाई 2026 को राहुकाल कब है?
12 जुलाई 2026 को राहुकाल शाम 5:39 बजे से 7:23 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त गुलिक काल दोपहर 3:55–5:39 और यमगंड काल 12:26–2:10 बजे तक है — इन तीनों अवधियों में शुभ कार्य टालने की परंपरा है।
12 जुलाई 2026 को कौन-सी तिथि है?
12 जुलाई 2026 को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि रात 10:30 बजे तक रहेगी, जिसके बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होगी।
12 जुलाई 2026 को कौन-से नक्षत्र और योग हैं?
सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में रहेगा; चंद्रमा सुबह 8:28 बजे तक रोहिणी नक्षत्र में और इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र में रहेगा। वृद्धि योग रात 8:05 बजे तक, तत्पश्चात व्यतिपात योग प्रभावी होगा।
12 जुलाई 2026 को किस दिशा में दिशाशूल है और क्या करें?
इस दिन पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार पश्चिम दिशा में यात्रा से बचना उचित है; यदि यात्रा अनिवार्य हो तो ज्योतिषीय उपायों का पालन करने की सलाह दी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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