10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

19 जून 2026 पंचांग: शुक्रवार को माता लक्ष्मी पूजा का शुभ संयोग, जानें अभिजीत मुहूर्त और राहुकाल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
19 जून 2026 पंचांग: शुक्रवार को माता लक्ष्मी पूजा का शुभ संयोग, जानें अभिजीत मुहूर्त और राहुकाल

सारांश

19 जून 2026 का शुक्रवार माता लक्ष्मी और स्कन्द षष्ठी का दुर्लभ संयोग लेकर आया है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:33 से 12:27 बजे तक है, जबकि राहुकाल और यमघण्टकाल से बचना ज़रूरी है। हर्षण योग और शुक्ल पक्ष पंचमी का मेल इस दिन को धार्मिक कार्यों के लिए विशेष बनाता है।

मुख्य बातें

19 जून 2026 (शुक्रवार) को शुक्ल पक्ष पंचमी शाम 5:01 बजे तक, तत्पश्चात स्कन्द षष्ठी प्रारंभ।
सूर्योदय 5:09 बजे , सूर्यास्त 6:52 बजे ; चंद्रोदय 9:28 बजे , चंद्रास्त रात 10:42 बजे ।
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:33 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक — शुभ कार्यों के लिए सर्वोत्तम।
राहुकाल 10:17–12:00 बजे , गुलिक काल 6:52–8:34 बजे , यमघण्टकाल 3:26–5:09 बजे — इन अवधियों में नए कार्य न करें।
शुक्रवार होने से माता लक्ष्मी और संतोषी माता की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
दिशाशूल पश्चिम दिशा में — इस दिशा में यात्रा में सावधानी बरतें।

19 जून 2026 (शुक्रवार) का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस दिन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि शाम 5:01 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात षष्ठी तिथि प्रारंभ होगी — जिसे स्कन्द षष्ठी के रूप में मनाया जाता है। शुक्रवार का दिन परंपरागत रूप से माता लक्ष्मी और संतोषी माता की आराधना के लिए समर्पित माना जाता है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र समय

पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्योदय सुबह 5:09 बजे और सूर्यास्त शाम 6:52 बजे होगा। चंद्रोदय सुबह 9:28 बजे और चंद्रास्त रात 10:42 बजे होगा। ग्रह स्थिति की दृष्टि से सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा कर्क राशि में विराजमान हैं।

नक्षत्र, योग और करण

इस दिन अश्लेषा नक्षत्र सुबह 10:08 बजे तक प्रभावी रहेगा, इसके बाद अगला नक्षत्र प्रभावी होगा। हर्षण योग दोपहर 2:53 बजे तक रहेगा — मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्यों में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। बव करण सुबह 5:54 बजे तक रहेगा।

शुभ मुहूर्त

महत्वपूर्ण कार्यों की योजना बनाने वालों के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:33 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक रहेगा, जिसे दिन का सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है। इस अवधि में नए कार्य, अनुबंध, या पूजा-अनुष्ठान शुरू करना लाभकारी माना जाता है।

राहुकाल और अशुभ काल

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इन समयों में नए कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए: राहुकाल सुबह 10:17 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक, गुलिक काल सुबह 6:52 बजे से 8:34 बजे तक और यमघण्टकाल दोपहर 3:26 बजे से शाम 5:09 बजे तक रहेगा।

धार्मिक महत्व और दिशाशूल

इस दिन स्कन्द षष्ठी होने के कारण भगवान कार्तिकेय की पूजा का भी विशेष महत्व है। भक्त इस दिन साहस, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा की कामना के साथ आराधना करते हैं। मान्यता है कि शुक्रवार को श्रद्धापूर्वक पूजा-पाठ और दान-पुण्य करने से परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा, अतः इस दिशा में यात्रा करते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी लाखों परिवार शुभ मुहूर्त और राहुकाल को अपनी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा मानते हैं। पत्रकारिता की ज़िम्मेदारी यह है कि ऐसी सामग्री तथ्यात्मक रूप से सटीक रहे और पाठक को स्पष्ट रूप से यह समझ आए कि ये परंपरागत मान्यताएँ हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

19 जून 2026 को कौन-सी तिथि है?
19 जून 2026 को शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि शाम 5:01 बजे तक रहेगी। इसके बाद षष्ठी तिथि (स्कन्द षष्ठी) प्रारंभ हो जाएगी।
19 जून 2026 का अभिजीत मुहूर्त कब है?
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:33 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है और इसमें महत्वपूर्ण कार्य, पूजा या नई शुरुआत की जा सकती है।
19 जून 2026 को राहुकाल कितने बजे से कितने बजे तक है?
19 जून 2026 को राहुकाल सुबह 10:17 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में नए कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए।
19 जून 2026 को माता लक्ष्मी की पूजा का क्या महत्व है?
शुक्रवार का दिन परंपरागत रूप से माता लक्ष्मी और संतोषी माता की पूजा के लिए समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा और दान-पुण्य करने से सुख-समृद्धि और पारिवारिक खुशहाली बनी रहती है।
19 जून 2026 को दिशाशूल किस दिशा में है और इसका क्या अर्थ है?
इस दिन दिशाशूल पश्चिम दिशा में है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है या विशेष सावधानी बरतने को कहा जाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 2 महीने पहले