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26 जुलाई 2026 पंचांग: द्वादशी तिथि पर विष्णु-लक्ष्मी पूजा शुभ, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07–12:59 बजे

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26 जुलाई 2026 पंचांग: द्वादशी तिथि पर विष्णु-लक्ष्मी पूजा शुभ, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07–12:59 बजे

सारांश

26 जुलाई 2026 को आषाढ़ शुक्ल द्वादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अत्यंत फलदायी मानी गई है। दिन का सबसे शुभ समय अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07 से 12:59 बजे तक है। राहुकाल, गुलिक और यमगंड के दौरान नए कार्य टालें।

मुख्य बातें

26 जुलाई 2026 (रविवार) को आषाढ़ शुक्ल द्वादशी दोपहर 1:58 बजे तक, तत्पश्चात त्रयोदशी।
भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा और देवशयनी एकादशी व्रत का पारण इस दिन विशेष शुभ।
अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07 से 12:59 बजे — दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ कालखंड।
राहुकाल शाम 5:29–7:07 , गुलिक काल 3:51–5:33 , यमगंड काल 12:33–2:12 — इन समयों में नए कार्य वर्जित।
सूर्य कर्क राशि व पुष्य नक्षत्र में; चंद्रमा वृश्चिक राशि में, सुबह 7:35 बजे के बाद मूल नक्षत्र में।
पश्चिम दिशा में दिशाशूल — उस दिशा में यात्रा से बचने की सलाह।

हिंदू पंचांग के अनुसार 26 जुलाई 2026 (रविवार) को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि दोपहर 1:58 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात त्रयोदशी तिथि का आरंभ होगा। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना तथा देवशयनी एकादशी व्रत का पारण करना अत्यंत शुभ माना गया है। पंचांग हिंदू काल-गणना की वह पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर शुभ-अशुभ समय का निर्धारण करती है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र-स्थिति

इस दिन सूर्योदय सुबह 5:58 बजे और सूर्यास्त शाम 7:07 बजे होगा। चंद्रोदय शाम 4:57 बजे और चंद्रास्त रात 3:34 बजे होगा। ग्रह-स्थिति के अनुसार सूर्य पुष्य नक्षत्र में विराजमान रहेगा, जबकि चंद्रमा सुबह 7:35 बजे तक ज्येष्ठा नक्षत्र में रहेगा और उसके बाद मूल नक्षत्र में प्रवेश करेगा। सूर्य कर्क राशि में और चंद्रमा वृश्चिक राशि में स्थित रहेंगे।

योग और अभिजित मुहूर्त

रविवार को इंद्र योग प्रभावी रहेगा। दिन का सर्वाधिक शुभ समय अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07 से 12:59 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस कालखंड में राहुकाल या किसी अन्य अशुभ समय की परवाह किए बिना कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, पूजा अथवा नया व्यापार आरंभ किया जा सकता है।

अशुभ काल — राहुकाल, गुलिक और यमगंड

ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार इस दिन तीन अशुभ कालखंड हैं जिनमें नए कार्य आरंभ करने से बचने की सलाह दी जाती है। राहुकाल शाम 5:29 से 7:07 बजे, गुलिक काल दोपहर 3:51 से शाम 5:33 बजे और यमगंड काल दोपहर 12:33 से 2:12 बजे तक रहेगा। इन समयों में शुभ कार्यों का शुभारंभ वर्जित माना जाता है।

दिशाशूल और यात्रा संबंधी सावधानी

रविवार को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु परंपरा के अनुसार इस दिन पश्चिम दिशा की यात्रा से बचना उचित माना जाता है। यदि पश्चिम दिशा में यात्रा अनिवार्य हो, तो ज्योतिषीय परामर्श के अनुसार विशेष उपाय अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।

26 जुलाई 2026 का संक्षिप्त पंचांग

तिथि: शुक्ल द्वादशी (दोपहर 1:58 बजे तक), तत्पश्चात त्रयोदशी। नक्षत्र: ज्येष्ठा (सुबह 7:35 बजे तक), तत्पश्चात मूल। योग: इंद्र। सूर्य राशि: कर्क। चंद्र राशि: वृश्चिक। अभिजित मुहूर्त: 12:07–12:59। राहुकाल: 5:29–7:07 (शाम)। पंचांग का नियमित अनुसरण शुभ कार्यों की सफलता सुनिश्चित करने में सहायक माना जाता है — आने वाले दिनों का पंचांग भी समय पर देखते रहें।

संपादकीय दृष्टिकोण

खासकर रविवार और व्रत-पर्व के दिनों में। इस दिन देवशयनी एकादशी पारण का संयोग द्वादशी तिथि को विशेष धार्मिक महत्व देता है, जो केवल नियमित पंचांग से अलग इसे एक विशिष्ट धार्मिक अवसर बनाता है। अभिजित मुहूर्त की सटीक समय-सीमा पाठकों को व्यावहारिक योजना बनाने में सीधे सहायक होती है। राहुकाल और दिशाशूल जैसी जानकारियाँ केवल आस्था नहीं, बल्कि दैनिक निर्णय-निर्माण में भी काम आती हैं।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

26 जुलाई 2026 को कौन-सी तिथि है?
26 जुलाई 2026 को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है, जो दोपहर 1:58 बजे तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि का आरंभ होगा।
26 जुलाई 2026 का अभिजित मुहूर्त कब है?
26 जुलाई 2026 को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:07 बजे से 12:59 बजे तक रहेगा। यह दिन का सर्वाधिक शुभ कालखंड माना जाता है, जिसमें कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, पूजा या व्यापार शुरू किया जा सकता है।
26 जुलाई 2026 को राहुकाल कब से कब तक है?
इस दिन राहुकाल शाम 5:29 बजे से 7:07 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त गुलिक काल दोपहर 3:51 से शाम 5:33 बजे और यमगंड काल दोपहर 12:33 से 2:12 बजे तक रहेगा — इन तीनों कालखंडों में नए कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए।
26 जुलाई 2026 को कौन-सी पूजा विशेष शुभ है?
इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना विशेष फलदायी मानी गई है। साथ ही देवशयनी एकादशी व्रत का पारण भी इसी दिन करना शुभ बताया गया है।
26 जुलाई 2026 को दिशाशूल किस दिशा में है?
रविवार 26 जुलाई 2026 को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिषीय परंपरा के अनुसार इस दिन पश्चिम दिशा में यात्रा से बचना उचित है; यदि यात्रा अनिवार्य हो तो विशेष ज्योतिषीय उपाय अपनाने की सलाह दी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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