19 अगस्त 2026 का पंचांग: श्रावण शुक्ल सप्तमी पर शिव-राम आराधना शुभ, अभिजित मुहूर्त 11:54 से 12:47 बजे तक
सारांश
मुख्य बातें
19 अगस्त 2026 (बुधवार) को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि रात 7:19 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी। हिंदू पंचांग के अनुसार इस दिन भगवान शिव, भगवान गणेश और बुध ग्रह की उपासना विशेष रूप से फलदायी मानी गई है। साथ ही इस दिन गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती भी है, जिस कारण राम भक्त श्री राम की आराधना में विशेष रुचि रखते हैं।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र स्थिति
बुधवार को सूर्योदय सुबह 6:08 बजे और सूर्यास्त शाम 6:52 बजे होगा। चंद्रोदय दोपहर 12:07 बजे और चंद्रास्त रात 11:06 बजे होगा। ग्रह स्थिति की दृष्टि से सूर्य मघा नक्षत्र में विराजमान रहेगा। चंद्रमा सुबह 6:47 बजे तक स्वाति नक्षत्र में रहेगा, उसके बाद विशाखा नक्षत्र में प्रवेश करेगा।
शुभ योग और मुहूर्त
इस दिन ब्रह्म योग और शुक्ल (ऐन्द्र) योग का संयोग बन रहा है। दिन का सर्वाधिक शुभ समय अभिजित मुहूर्त सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:47 बजे तक रहेगा। इसी अवधि के निकट अमृत काल दोपहर 11:27 बजे से 1:13 बजे तक रहेगा। पंचांग विशेषज्ञों के अनुसार इन मुहूर्तों में पूजा-पाठ, नए कार्यों का शुभारंभ और महत्वपूर्ण निर्णय लेना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
अशुभ काल — राहुकाल और यमगंड
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ विशेष समयखंडों में नए कार्य आरंभ करने से बचना उचित माना जाता है। राहुकाल दोपहर 12:30 बजे से 2:06 बजे तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 10:55 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और यमगंड काल सुबह 7:44 बजे से 9:19 बजे तक रहेगा। इन कालखंडों में शुभ कार्यों की शुरुआत से परहेज़ करने की सलाह दी जाती है।
राशि स्थिति और दिशाशूल
बुधवार को सूर्य सिंह राशि में और चंद्रमा तुला राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। वास्तु और ज्योतिष परंपरा के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से यथासंभव बचना चाहिए। यदि उत्तर दिशा में यात्रा अनिवार्य हो, तो ज्योतिषाचार्य की सलाह से उचित उपाय अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।
तुलसीदास जयंती के अवसर पर इस बुधवार का पंचांग धार्मिक दृष्टि से विशेष रूप से महत्वपूर्ण है — अभिजित मुहूर्त और अमृत काल का संयोग इसे पूजा-अर्चना के लिए और भी अनुकूल बनाता है।