22 जुलाई 2026 पंचांग: आषाढ़ शुक्ल नवमी पर शिव-विष्णु पूजा शुभ, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:45 से 12:39 बजे तक
सारांश
मुख्य बातें
हिंदू काल-गणना पद्धति पंचांग के अनुसार 22 जुलाई 2026 (बुधवार) को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि प्रातः 5:16 बजे से अगले दिन सुबह 7:03 बजे तक प्रभावी रहेगी, जिसके पश्चात दशमी तिथि का आरंभ होगा। इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की उपासना विशेष रूप से फलदायी मानी गई है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र-स्थिति
22 जुलाई को सूर्योदय प्रातः 5:57 बजे और सूर्यास्त सायं 7:09 बजे होगा। चंद्रोदय दोपहर 1:22 बजे और चंद्रास्त रात 12:30 बजे निर्धारित है। पंचांग गणना के अनुसार इस दिन सूर्य पुष्य नक्षत्र में गोचर करेगा, जबकि चंद्रमा रात 11:02 बजे तक स्वाति नक्षत्र में विचरण करेगा और उसके पश्चात विशाखा नक्षत्र में प्रवेश करेगा।
योग और अभिजीत मुहूर्त
इस बुधवार साध्य योग सायं 6:40 बजे तक प्रभावी रहेगा, तत्पश्चात शुभ योग का आरंभ होगा। दिन का सर्वाधिक शुभ काल अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में राहुकाल अथवा अन्य किसी अशुभ काल की चिंता किए बिना कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, पूजा-अनुष्ठान या व्यापारिक गतिविधि आरंभ की जा सकती है।
अशुभ काल — राहुकाल, गुलिक और यमगंड
ज्योतिषीय परंपरा के अनुसार इस दिन तीन अशुभ कालखंड हैं जिनमें नए कार्यों का आरंभ वर्जित माना जाता है। राहुकाल दोपहर 12:27 बजे से 2:10 बजे तक, गुलिक काल सुबह 10:44 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक और यमगंड काल सुबह 7:19 बजे से 9:02 बजे तक रहेगा। इन अवधियों में शुभ कार्य टालने की परंपरागत सलाह दी जाती है।
सूर्य का राशि परिवर्तन और दिशाशूल
22 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना भी घटित होगी — सूर्य कर्क राशि से निकलकर अपनी स्वराशि सिंह राशि में प्रवेश करेगा। इस दिन चंद्रमा तुला राशि में संचार करेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार बुधवार को उत्तर और पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा, अतः इन दिशाओं में यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो विशेषज्ञ ज्योतिषाचार्य से उचित उपाय जानकर प्रस्थान किया जा सकता है।
गौरतलब है कि पंचांग हिंदू समाज में सदियों से सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों की स्थिति के आधार पर शुभ-अशुभ काल की गणना का प्रामाणिक स्रोत रहा है। आने वाले दिनों में आषाढ़ शुक्ल पक्ष की तिथियाँ आगे बढ़ती रहेंगी और श्रावण माह के आगमन की तैयारी होगी।