13 जुलाई 2026 पंचांग: आषाढ़ चतुर्दशी पर शिव पूजा शुभ, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:05–12:59 बजे
सारांश
मुख्य बातें
हिंदू पंचांग के अनुसार 13 जुलाई 2026 (सोमवार) को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि शाम 6:49 बजे तक रहेगी, जिसके बाद अमावस्या आरंभ हो जाएगी। सोमवार होने के कारण इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना विशेष फलदायी मानी जाती है।
सूर्योदय, सूर्यास्त एवं चंद्र स्थिति
इस दिन सूर्योदय सुबह 5:53 बजे और सूर्यास्त शाम 7:11 बजे होगा। चन्द्रोदय रात 4:11 बजे तथा चन्द्रास्त शाम 6:31 बजे होगा। ग्रह-गोचर की दृष्टि से सूर्य पुनर्वसु नक्षत्र में भ्रमण करेंगे, जबकि चंद्रमा आर्द्रा नक्षत्र में रहेगा — यह स्थिति 13 जुलाई को मध्यरात्रि 2:51 बजे तक बनी रहेगी, इसके पश्चात चंद्रमा पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश करेगा। राशि की दृष्टि से सूर्य और चंद्रमा दोनों मिथुन राशि में गोचर करेंगे।
शुभ योग और अभिजित मुहूर्त
13 जुलाई 2026 को ध्रुव योग प्रभावी रहेगा, जो दोपहर लगभग 3:30 बजे तक विद्यमान रहेगा। हर्षण योग इस दिन प्रभावी नहीं रहेगा। दिन का सर्वाधिक शुभ काल अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:59 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, पूजा या व्यापार का शुभारंभ राहुकाल अथवा अन्य अशुभ समय की चिंता किए बिना किया जा सकता है।
अशुभ काल — राहुकाल, गुलिक और यमगंड
पंचांग के अनुसार इस दिन राहुकाल सुबह 7:16 से 8:59 बजे तक रहेगा। गुलिक काल दोपहर 2:10 से 3:54 बजे तथा यमगंड काल सुबह 10:52 से दोपहर 12:32 बजे तक प्रभावी रहेगा। परंपरागत ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इन तीनों कालखंडों में नए कार्यों का आरंभ वर्जित माना जाता है।
दिशाशूल और यात्रा संबंधी सावधानी
13 जुलाई 2026 (सोमवार) को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष एवं वास्तु परंपरा के अनुसार, इस दिन पूर्व दिशा में यात्रा करने से बचना उचित माना जाता है। यदि पूर्व दिशा में यात्रा अनिवार्य हो, तो विशेषज्ञ ज्योतिषीय उपाय अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।
पूजा और दिनचर्या के लिए सुझाव
सोमवार को आषाढ़ कृष्ण चतुर्दशी का संयोग होने से भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। अभिजित मुहूर्त में शिव-अभिषेक, रुद्राभिषेक या नए कार्य का संकल्प लेना शुभ रहेगा। अगले दिन अमावस्या के आगमन को ध्यान में रखते हुए पितृ-तर्पण की तैयारी भी इसी दिन से आरंभ की जा सकती है।