13 जून 2026 पंचांग: मासिक शिवरात्रि पर त्रयोदशी-चतुर्दशी का दुर्लभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल
सारांश
मुख्य बातें
13 जून 2026, शनिवार को ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि और मासिक शिवरात्रि का विशेष संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार इस दिन सुकर्मा योग और कृत्तिका नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जो धार्मिक कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। भगवान शिव के उपासकों के लिए यह दिन व्रत, पूजा-अर्चना और मनोकामना पूर्ति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
तिथि और नक्षत्र की स्थिति
पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि दोपहर 4 बजकर 8 मिनट तक रहेगी। इसके पश्चात चतुर्दशी तिथि आरंभ होगी, जो भगवान शिव को समर्पित मानी जाती है। इस दिन कृत्तिका नक्षत्र रात 1 बजकर 16 मिनट तक प्रभावी रहेगा, जिसके बाद रोहिणी नक्षत्र शुरू होगा। ज्योतिष शास्त्र में रोहिणी नक्षत्र को अत्यंत शुभ माना जाता है और इसमें किए गए कार्य सकारात्मक परिणाम देते हैं।
योग और ग्रह स्थिति
शनिवार को सुकर्मा योग शाम 5 बजकर 28 मिनट तक रहेगा, इसके बाद धृति योग प्रारंभ होगा। दोनों योग शुभ कार्यों, पूजा-पाठ और जप के लिए लाभकारी माने जाते हैं। ग्रहों की स्थिति में चंद्रमा सुबह 9 बजकर 25 मिनट तक मेष राशि में रहेगा और उसके बाद वृषभ राशि में प्रवेश करेगा। सूर्य इस दिन वृषभ राशि में ही स्थित रहेगा। ज्योतिष में चंद्रमा के राशि परिवर्तन को मन और भावनाओं पर प्रभावी माना जाता है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और ब्रह्म मुहूर्त
13 जून को सूर्योदय सुबह 5:44 बजे और सूर्यास्त शाम 7:09 बजे होगा। चंद्रोदय सुबह 3:28 बजे और चंद्रास्त शाम 5:28 बजे होगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:08 बजे से 4:56 बजे तक रहेगा — यह समय ध्यान, पूजा और ईश्वर स्मरण के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
शुभ मुहूर्त और अमृत काल
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा, जो महत्वपूर्ण और मंगल कार्यों की शुरुआत के लिए उपयुक्त है। इसके अतिरिक्त, अमृत काल रात 11:09 बजे से अगले दिन रात 12:34 बजे तक रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए लाभदायक माना जाता है।
राहुकाल और अशुभ समय
नए और महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने से पहले इन समयों का ध्यान रखना आवश्यक है। राहुकाल सुबह 9:05 बजे से 10:46 बजे तक रहेगा। यमगंड काल दोपहर 2:07 बजे से 3:47 बजे तक और वर्ज्य काल दोपहर 2:41 बजे से 4:06 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में कोई भी नया शुभ कार्य आरंभ नहीं किया जाता।
मासिक शिवरात्रि के इस पावन संयोग में श्रद्धालु सही मुहूर्त का लाभ उठाकर भगवान शिव की उपासना कर सकते हैं और अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना कर सकते हैं।