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10 सितंबर 2026 पंचांग: सिद्ध योग और मघा नक्षत्र का दुर्लभ संयोग, जानें अभिजित मुहूर्त और राहुकाल

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10 सितंबर 2026 पंचांग: सिद्ध योग और मघा नक्षत्र का दुर्लभ संयोग, जानें अभिजित मुहूर्त और राहुकाल

सारांश

10 सितंबर 2026 को सिद्ध योग और मघा नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बन रहा है। भाद्रपद कृष्ण चतुर्दशी के इस दिन शिव-पूजा, पितर-स्मरण और दान विशेष फलदायी माने गए हैं। अभिजित मुहूर्त 11:32 से 12:20 बजे और राहुकाल 1:29 से 3:02 बजे तक रहेगा।

मुख्य बातें

10 सितंबर 2026 को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि सुबह 10:34 बजे तक, तत्पश्चात अमावस्या प्रारंभ।
सिद्ध योग शाम 7:17 बजे तक और मघा नक्षत्र दोपहर 2:06 बजे तक प्रभावी।
अभिजित मुहूर्त — शुभ कार्यों के लिए सर्वोत्तम समय — सुबह 11:32 से दोपहर 12:20 बजे तक।
राहुकाल दोपहर 1:29 से 3:02 बजे तक; गुलिक काल 8:49 से 10:22 बजे ; यमघण्ट काल 5:43 से 7:16 बजे तक।
सूर्य और चंद्रमा दोनों सिंह राशि में; सूर्योदय 5:43 और सूर्यास्त 6:09 बजे ।
गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल — परंपरागत मान्यता के अनुसार इस दिशा में यात्रा से बचने की सलाह।

10 सितंबर 2026, गुरुवार को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर सिद्ध योग और मघा नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह दिन पूजा-पाठ, आध्यात्मिक साधना और पितर-स्मरण के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के आधार पर इस दिन के प्रत्येक मुहूर्त को ध्यान में रखकर दिनचर्या की योजना बनाना लाभकारी माना जाता है।

तिथि और नक्षत्र की स्थिति

पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि इस दिन सुबह 10:34 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात अमावस्या तिथि प्रारंभ हो जाएगी। मघा नक्षत्र दोपहर 2:06 बजे तक प्रभावी रहेगा, जबकि सिद्ध योग शाम 7:17 बजे तक बना रहेगा। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों सिंह राशि में विराजमान रहेंगे।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र समय

इस दिन सूर्योदय सुबह 5:43 बजे और सूर्यास्त शाम 6:09 बजे होगा। चंद्रोदय सुबह 4:39 बजे और चंद्रास्त शाम 5:37 बजे होगा। ये समय शुभ कार्यों की योजना बनाने में सहायक होते हैं।

शुभ मुहूर्त और अशुभ काल

शुभ कार्यों के लिए अभिजित मुहूर्त सुबह 11:32 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक रहेगा, जिसे दिन का सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है। वहीं, राहुकाल दोपहर 1:29 बजे से 3:02 बजे तक रहेगा — इस अवधि में महत्वपूर्ण कार्य, यात्रा या निवेश से परहेज करने की परंपरागत सलाह दी जाती है।

गुलिक काल सुबह 8:49 बजे से 10:22 बजे तक और यमघण्ट काल सुबह 5:43 बजे से 7:16 बजे तक रहेगा। इन कालों को भी अशुभ समय की श्रेणी में रखा जाता है।

धार्मिक महत्व और पूजा-विधि

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। इस दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक, ध्यान और मंत्र जाप से घर में सुख-शांति और मानसिक स्थिरता की प्राप्ति होती है — ऐसी मान्यता है। गौरतलब है कि मघा नक्षत्र का संबंध परंपरागत रूप से पितरों और पूर्वजों से जोड़ा जाता है, इसलिए इस दिन पितर-स्मरण, जरूरतमंदों को दान और सेवा-कार्य पुण्यकारी माने गए हैं।

दिशाशूल और यात्रा संबंधी सावधानी

परंपरागत मान्यताओं के अनुसार गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल माना जाता है। इस कारण इस दिन दक्षिण दिशा में यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा अनिवार्य हो तो कुछ विशेष उपाय करने की परंपरा भी प्रचलित है। इस प्रकार 10 सितंबर का पंचांग आध्यात्मिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण दिन की ओर संकेत करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उन पाठकों की व्यावहारिक जरूरत पूरी करती है जो शुभ-अशुभ समय को जीवन-निर्णयों से जोड़ते हैं। हालाँकि इन मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार नहीं है, फिर भी सांस्कृतिक पत्रकारिता की दृष्टि से इनकी प्रासंगिकता असंदिग्ध है। राष्ट्र प्रेस इन्हें धार्मिक परंपरा के रूप में प्रस्तुत करता है, न कि निर्देशात्मक सलाह के रूप में।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

10 सितंबर 2026 को कौन-सी तिथि और नक्षत्र है?
10 सितंबर 2026 को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, जो सुबह 10:34 बजे तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या तिथि प्रारंभ होगी। इस दिन मघा नक्षत्र दोपहर 2:06 बजे तक और सिद्ध योग शाम 7:17 बजे तक प्रभावी रहेगा।
10 सितंबर 2026 का अभिजित मुहूर्त कब है?
10 सितंबर 2026 को अभिजित मुहूर्त सुबह 11:32 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक रहेगा। यह दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ समय माना जाता है, जो किसी भी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत के लिए उपयुक्त है।
10 सितंबर 2026 को राहुकाल कब से कब तक है?
इस दिन राहुकाल दोपहर 1:29 बजे से 3:02 बजे तक रहेगा। परंपरागत मान्यता के अनुसार इस अवधि में शुभ कार्य, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचने की सलाह दी जाती है।
मघा नक्षत्र और सिद्ध योग का क्या महत्व है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मघा नक्षत्र का संबंध पितरों और पूर्वजों से है, इसलिए इस दिन पितर-स्मरण और दान विशेष पुण्यकारी माने जाते हैं। सिद्ध योग को सिद्धि और सफलता प्रदान करने वाला शुभ योग माना जाता है, जो पूजा-पाठ और मंत्र जाप के लिए अनुकूल है।
10 सितंबर 2026 को किस दिशा में यात्रा से बचना चाहिए?
परंपरागत मान्यताओं के अनुसार गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल माना जाता है। इसलिए इस दिन दक्षिण दिशा में यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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