1 सितंबर 2026 पंचांग: गणेश-हनुमान पूजा विशेष फलदायी, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:02–12:51 बजे
सारांश
मुख्य बातें
हिंदू काल-गणना पद्धति के अनुसार 1 सितंबर 2026 (मंगलवार) का पंचांग धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि सुबह 7:42 बजे तक रहेगी, जिसके बाद पंचमी तिथि प्रारंभ होगी। मंगलवार और चतुर्थी के संयोग में गणेशजी और हनुमान जी दोनों की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है।
तिथि और नक्षत्र विवरण
पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में विचरण करेगा। सूर्य सिंह राशि में और चंद्रमा मेष राशि में स्थित रहेंगे। चतुर्थी तिथि विघ्नहर्ता गणेशजी को समर्पित होती है, जिनकी पूजा से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं, और मंगलवार होने के कारण हनुमान जी की आराधना भी इस दिन विशेष महत्व रखती है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र समय
इस दिन सूर्योदय सुबह 6:12 बजे और सूर्यास्त शाम 6:40 बजे होगा। चंद्रोदय रात 9:14 बजे और चंद्रास्त अगले दिन सुबह 10:50 बजे होगा। ये समय धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उचित समय-निर्धारण में सहायक हैं।
शुभ मुहूर्त और योग
दिन का सबसे शुभ काल अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:02 बजे से 12:51 बजे तक रहेगा — यह किसी भी नए कार्य, पूजा या महत्वपूर्ण निर्णय के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है। इसके अतिरिक्त अमृत काल रात 7:42 बजे से 9:16 बजे तक रहेगा। दिन में वृद्धि योग रात 11:37 बजे तक रहेगा, जिसके बाद ध्रुव योग प्रारंभ होगा।
अशुभ काल — राहुकाल, गुलिक और यमगंड
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इन समयावधियों में नए कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए। राहुकाल सुबह 3:33 बजे से 5:07 बजे तक रहेगा। गुलिक काल दोपहर 12:26 बजे से 2:00 बजे तक और यमगंड काल सुबह 9:19 बजे से दोपहर 10:53 बजे तक रहेगा।
दिशाशूल और यात्रा संबंधी सावधानी
इस दिन उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु परंपरा के अनुसार इस दिशा में यात्रा करने से बचना उचित है। यदि उत्तर दिशा में यात्रा अनिवार्य हो, तो विशेष ज्योतिषीय उपाय अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है। गौरतलब है कि पंचांग केवल धार्मिक मार्गदर्शन के लिए है और इसका पालन व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करता है।