17 जुलाई 2026 पंचांग: विनायक चतुर्थी पर गणेश-पार्वती पूजा शुभ, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:06 से 12:59 बजे तक
सारांश
मुख्य बातें
17 जुलाई 2026 (शुक्रवार) को आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की विनायक चतुर्थी का विशेष संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार इस दिन भगवान गणेश (अनिरुद्ध विनायक) और माता पार्वती की पूजा-अर्चना अत्यंत फलदायी मानी जा रही है। हिंदू काल-गणना पद्धति में पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर शुभ-अशुभ समय का निर्धारण करता है।
तिथि और नक्षत्र की स्थिति
17 जुलाई 2026 को तृतीया तिथि सुबह 6:28 बजे तक रहेगी, इसके पश्चात चतुर्थी तिथि प्रारंभ होगी। सूर्य इस दिन पुनर्वसु नक्षत्र में गोचर करेंगे, जबकि चंद्रमा शाम 6:34 बजे तक मघा नक्षत्र में संचार करेगा। सूर्य का कर्क राशि में प्रवेश भी इसी दिन होगा और चंद्रमा मुख्यतः सिंह राशि में स्थित रहेगा।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र-गणना
पंचांग के अनुसार 17 जुलाई को सूर्योदय सुबह 5:55 बजे और सूर्यास्त शाम 7:11 बजे होगा। चंद्रोदय सुबह 8:44 बजे और चंद्रास्त रात 9:39 बजे होगा। यह जानकारी दैनिक पूजा-पाठ और यात्रा की योजना बनाने में सहायक है।
अभिजीत मुहूर्त और योग
शुक्रवार को दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ समय — अभिजीत मुहूर्त — दोपहर 12:06 बजे से 12:59 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, व्यापार या पूजा बिना राहुकाल की चिंता किए आरंभ की जा सकती है। इस दिन व्यतीपात योग प्रभावी रहेगा, जबकि हर्षण योग अनुपस्थित रहेगा।
अशुभ काल — राहुकाल, गुलिक और यमगंड
पंचांग के अनुसार राहुकाल सुबह 10:44 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक, गुलिक काल सुबह 7:00 बजे से 8:42 बजे तक और यमगंड काल दोपहर 3:52 बजे से 5:31 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में नए कार्य, निवेश या यात्रा आरंभ करने से बचना उचित माना जाता है।
दिशाशूल और यात्रा परामर्श
17 जुलाई 2026 को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु परंपराओं के अनुसार इस दिन पश्चिम दिशा में यात्रा से बचना श्रेयस्कर है। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो विशेष ज्योतिषीय उपायों के पश्चात प्रस्थान किया जा सकता है। विनायक चतुर्थी के इस शुभ अवसर पर गणेश-पार्वती की आराधना से दिन को और अधिक फलदायक बनाया जा सकता है।