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विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026: 4 जून को अभिजीत-विजय मुहूर्त का दुर्लभ संयोग, जानें राहुकाल

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विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026: 4 जून को अभिजीत-विजय मुहूर्त का दुर्लभ संयोग, जानें राहुकाल

सारांश

अधिक मास के कृष्ण पक्ष में पड़ रही विभुवन संकष्टी चतुर्थी इस बार 4 जून 2026 को है — एक दुर्लभ संयोग, जब अभिजीत और विजय मुहूर्त एक साथ बन रहे हैं। चंद्रोदय रात 10:43 बजे होगा, जबकि राहुकाल दोपहर 2:04 से 3:48 बजे तक रहेगा। तीनों लोकों के स्वामी विभुवन गणेश की पूजा का यह अवसर वर्षों में एक बार आता है।

मुख्य बातें

विभुवन संकष्टी चतुर्थी 4 जून 2026 (गुरुवार) को मनाई जाएगी।
चतुर्थी तिथि 3 जून रात 9:21 से 4 जून रात 11:30 तक; उदयातिथि के अनुसार व्रत 4 जून को।
अभिजीत मुहूर्त (11:52–12:47) और विजय मुहूर्त (2:38–3:34) का दुर्लभ संयोग।
चंद्रोदय रात 10:43 बजे ; नक्षत्र उत्तराषाढ़ा , योग शुक्ल फिर ब्रह्मा ।
राहुकाल दोपहर 2:04 से 3:48 बजे तक — शुभ कार्य वर्जित।
यह व्रत पुरुषोत्तम (अधिक) मास में पड़ने से कई वर्षों में एक बार बनने वाला संयोग।

विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश की आराधना को समर्पित विभुवन संकष्टी चतुर्थी इस वर्ष 4 जून 2026 (गुरुवार) को मनाई जाएगी। यह व्रत विशेष रूप से दुर्लभ माना जाता है क्योंकि यह पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के कृष्ण पक्ष में पड़ रहा है, और इस दिन भगवान गणेश के उस ‘विभुवन’ स्वरूप की पूजा होती है जो स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल — तीनों लोकों में विद्यमान माने जाते हैं।

तिथि और उदयातिथि का गणित

पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 3 जून की रात 9 बजकर 21 मिनट से प्रारंभ होकर 4 जून की रात 11 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, सूर्योदय के समय जो तिथि होती है उसी का मान पूरे दिन रहता है — इसलिए व्रत और पूजन 4 जून को ही किया जाएगा।

सूर्य, चंद्र और नक्षत्र की स्थिति

गुरुवार को सूर्योदय सुबह 5:23 बजे और सूर्यास्त शाम 7:16 बजे होगा। संकष्टी चतुर्थी पर चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है — चंद्रोदय रात 10:43 बजे होगा, जबकि चंद्रास्त अगले दिन 5 जून की सुबह 8:17 बजे होगा। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र 5 जून की सुबह 3:41 बजे तक रहेगा। दिन में शुक्ल योग सुबह 9:03 बजे तक रहेगा, उसके बाद ब्रह्मा योग लगेगा। करण बव रहेगा।

शुभ मुहूर्तों का दुर्लभ संयोग

इस बार चतुर्थी पर अभिजीत मुहूर्त और विजय मुहूर्त का एक साथ पड़ना खास माना जा रहा है, जो किसी भी मांगलिक या नए कार्य की शुरुआत के लिए अत्यंत अनुकूल समय माना जाता है। प्रमुख शुभ अवधियाँ इस प्रकार हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:02 से 4:43 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:52 से 12:47 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2:38 से 3:34 बजे तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:15 से 7:35 बजे तक
  • अमृत काल: रात 8:34 से 10:21 बजे तक

राहुकाल और अशुभ समय का ध्यान

धर्म शास्त्रों के अनुसार अशुभ अवधियों में कोई नया या मांगलिक कार्य आरंभ नहीं करना चाहिए। राहुकाल दोपहर 2:04 से 3:48 बजे तक रहेगा, जो दिन का सबसे संवेदनशील समय माना जाता है। इसके अतिरिक्त यमगंड सुबह 5:23 से 7:07 बजे, गुलिक काल सुबह 8:51 से 10:35 बजे और दुर्मुहूर्त सुबह 10:01 से 10:56 बजे तक रहेगा।

व्रत का महत्व

संकष्टी चतुर्थी का व्रत भक्तों द्वारा संकटों के नाश और मनोकामना पूर्ति के लिए रखा जाता है, और चंद्र दर्शन के बाद ही पारण की परंपरा है। अधिक मास में पड़ने के कारण विभुवन संकष्टी का यह संयोग कई वर्षों में एक बार बनता है, जिससे इस दिन पूजा-अर्चना और दान-पुण्य का महत्व और बढ़ जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मोबाइल स्क्रीन से लेते हैं। अधिक मास में पड़ने वाला यह संयोग वर्षों में एक बार आता है, और अभिजीत-विजय मुहूर्त का एक साथ बनना इसे और विशेष बनाता है। पाठकों के लिए व्यावहारिक उपयोगिता यही है कि सटीक समय-गणना के साथ व्रत और पूजन करें, और अशुभ काल में नए कार्यों से बचने की पारंपरिक सलाह का सम्मान करें।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026 कब है?
विभुवन संकष्टी चतुर्थी 4 जून 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी। चतुर्थी तिथि 3 जून रात 9:21 बजे से शुरू होकर 4 जून रात 11:30 बजे तक रहेगी, और उदयातिथि के अनुसार व्रत 4 जून को रखा जाएगा।
4 जून 2026 को राहुकाल कब रहेगा?
राहुकाल दोपहर 2:04 बजे से 3:48 बजे तक रहेगा। धर्म शास्त्रों के अनुसार इस अवधि में कोई नया या शुभ कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए।
विभुवन संकष्टी चतुर्थी पर अभिजीत और विजय मुहूर्त कब है?
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:52 से 12:47 बजे तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2:38 से 3:34 बजे तक रहेगा। दोनों का एक ही दिन पड़ना मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ संयोग माना जा रहा है।
विभुवन संकष्टी चतुर्थी इतनी दुर्लभ क्यों मानी जाती है?
यह चतुर्थी पुरुषोत्तम मास यानी अधिक मास के कृष्ण पक्ष में पड़ती है, जो हर वर्ष नहीं आता। इसी कारण विभुवन गणेश — तीनों लोकों के स्वामी — की पूजा का यह अवसर कई वर्षों में एक बार ही बनता है।
चंद्रोदय का समय क्या है और इसका व्रत में क्या महत्व है?
4 जून 2026 को चंद्रोदय रात 10:43 बजे होगा। संकष्टी चतुर्थी व्रत में चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद ही पारण किया जाता है, इसलिए चंद्रोदय का समय व्रती के लिए महत्वपूर्ण है।
राष्ट्र प्रेस
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