8 जून 2026 पंचांग: कालाष्टमी पर अभिजीत व विजय मुहूर्त, जानें राहुकाल और शुभ-अशुभ समय
सारांश
मुख्य बातें
ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि — जिसे कालाष्टमी और मासिक कृष्ण अष्टमी भी कहा जाता है — 8 जून 2026, सोमवार को पड़ रही है। यह पावन तिथि काल भैरव और भगवान श्री कृष्ण दोनों को समर्पित है। इस दिन अभिजीत मुहूर्त और विजय मुहूर्त का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो शुभ कार्यों के लिए विशेष अनुकूल माना जाता है।
तिथि, नक्षत्र और योग
अष्टमी तिथि सोमवार 8 जून को पूरे दिन रहेगी और 9 जून की देर रात 3 बजकर 23 मिनट तक चलेगी। इस दिन नक्षत्र शतभिषा और योग विष्कम्भ रहेगा। सूर्योदय प्रातः 5 बजकर 23 मिनट पर और सूर्यास्त सायं 7 बजकर 18 मिनट पर होगा।
शुभ मुहूर्त का विवरण
पंचांग के अनुसार 8 जून को निम्नलिखित शुभ समय उपलब्ध रहेंगे:
ब्रह्म मुहूर्त — प्रातः 4:02 से 4:42 बजे तक। प्रातः सन्ध्या — 4:22 से 5:23 बजे तक। अभिजीत मुहूर्त — 11:52 से 12:48 बजे तक। विजय मुहूर्त — दोपहर 2:39 से 3:35 बजे तक। गोधूलि मुहूर्त — सायं 7:16 से 7:37 बजे तक।
अभिजीत और विजय मुहूर्त का यह संयोग यात्रा, नया व्यापार आरंभ करने, महत्वपूर्ण निर्णय लेने और शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है। व्रतधारियों को सूर्योदय के पश्चात व्रत का संकल्प लेना चाहिए और गोधूलि मुहूर्त में पूजा-अर्चना करना विशेष फलदायी रहेगा।
अशुभ समय — राहुकाल और अन्य
इस दिन राहुकाल प्रातः 7:07 से 8:52 बजे तक रहेगा — इस अवधि में कोई नया या महत्वपूर्ण कार्य आरंभ न करें। यमगण्ड — 10:36 से 12:20 बजे तक। गुलिक काल — दोपहर 2:05 से 3:49 बजे तक। दुर्मुहूर्त — दोपहर 12:48 से 1:44 बजे तक। आडल योग — 9:09 से 1:39 बजे तक।
कालाष्टमी का धार्मिक महत्व
हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह तिथि काल भैरव — भगवान शिव के उग्र स्वरूप — की उपासना के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। भगवान श्री कृष्ण के भक्त भी इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि इस तिथि पर भैरव पूजन से भय, शत्रु-बाधा और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
व्रत और पूजा की विधि
व्रतधारियों को सूर्योदय के पश्चात स्नान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। काल भैरव की प्रतिमा या चित्र पर काले तिल, सरसों का तेल, और काले पुष्प अर्पित करने का विधान है। सायंकाल गोधूलि मुहूर्त — 7:16 से 7:37 बजे — में दीपदान और आरती विशेष फलदायी मानी जाती है।