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8 जून 2026 पंचांग: कालाष्टमी पर अभिजीत व विजय मुहूर्त, जानें राहुकाल और शुभ-अशुभ समय

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8 जून 2026 पंचांग: कालाष्टमी पर अभिजीत व विजय मुहूर्त, जानें राहुकाल और शुभ-अशुभ समय

सारांश

8 जून 2026 को ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी — कालाष्टमी — पर अभिजीत और विजय मुहूर्त का दुर्लभ संयोग बन रहा है। काल भैरव और श्री कृष्ण को समर्पित इस तिथि पर राहुकाल सुबह 7:07 से 8:52 बजे तक रहेगा। शुभ कार्यों के लिए यह दिन विशेष अनुकूल है।

मुख्य बातें

8 जून 2026, सोमवार को ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी (कालाष्टमी) है — काल भैरव व श्री कृष्ण को समर्पित।
अभिजीत मुहूर्त — 11:52 से 12:48 बजे; विजय मुहूर्त — 2:39 से 3:35 बजे।
राहुकाल — 7:07 से 8:52 बजे; इस समय नए कार्य न करें।
अष्टमी तिथि 9 जून की रात 3:23 बजे तक; नक्षत्र शतभिषा , योग विष्कम्भ ।
गोधूलि मुहूर्त — सायं 7:16 से 7:37 बजे — पूजा-अर्चना के लिए विशेष अनुकूल।
दुर्मुहूर्त — दोपहर 12:48 से 1:44 बजे; यमगण्ड — 10:36 से 12:20 बजे।

ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि — जिसे कालाष्टमी और मासिक कृष्ण अष्टमी भी कहा जाता है — 8 जून 2026, सोमवार को पड़ रही है। यह पावन तिथि काल भैरव और भगवान श्री कृष्ण दोनों को समर्पित है। इस दिन अभिजीत मुहूर्त और विजय मुहूर्त का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो शुभ कार्यों के लिए विशेष अनुकूल माना जाता है।

तिथि, नक्षत्र और योग

अष्टमी तिथि सोमवार 8 जून को पूरे दिन रहेगी और 9 जून की देर रात 3 बजकर 23 मिनट तक चलेगी। इस दिन नक्षत्र शतभिषा और योग विष्कम्भ रहेगा। सूर्योदय प्रातः 5 बजकर 23 मिनट पर और सूर्यास्त सायं 7 बजकर 18 मिनट पर होगा।

शुभ मुहूर्त का विवरण

पंचांग के अनुसार 8 जून को निम्नलिखित शुभ समय उपलब्ध रहेंगे:

ब्रह्म मुहूर्त — प्रातः 4:02 से 4:42 बजे तक। प्रातः सन्ध्या4:22 से 5:23 बजे तक। अभिजीत मुहूर्त11:52 से 12:48 बजे तक। विजय मुहूर्त — दोपहर 2:39 से 3:35 बजे तक। गोधूलि मुहूर्त — सायं 7:16 से 7:37 बजे तक।

अभिजीत और विजय मुहूर्त का यह संयोग यात्रा, नया व्यापार आरंभ करने, महत्वपूर्ण निर्णय लेने और शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है। व्रतधारियों को सूर्योदय के पश्चात व्रत का संकल्प लेना चाहिए और गोधूलि मुहूर्त में पूजा-अर्चना करना विशेष फलदायी रहेगा।

अशुभ समय — राहुकाल और अन्य

इस दिन राहुकाल प्रातः 7:07 से 8:52 बजे तक रहेगा — इस अवधि में कोई नया या महत्वपूर्ण कार्य आरंभ न करें। यमगण्ड10:36 से 12:20 बजे तक। गुलिक काल — दोपहर 2:05 से 3:49 बजे तक। दुर्मुहूर्त — दोपहर 12:48 से 1:44 बजे तक। आडल योग9:09 से 1:39 बजे तक।

कालाष्टमी का धार्मिक महत्व

हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह तिथि काल भैरव — भगवान शिव के उग्र स्वरूप — की उपासना के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। भगवान श्री कृष्ण के भक्त भी इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि इस तिथि पर भैरव पूजन से भय, शत्रु-बाधा और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।

व्रत और पूजा की विधि

व्रतधारियों को सूर्योदय के पश्चात स्नान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। काल भैरव की प्रतिमा या चित्र पर काले तिल, सरसों का तेल, और काले पुष्प अर्पित करने का विधान है। सायंकाल गोधूलि मुहूर्त7:16 से 7:37 बजे — में दीपदान और आरती विशेष फलदायी मानी जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इस दिन के पंचांग को सामान्य सोमवार से अधिक महत्वपूर्ण बनाता है। राहुकाल और दुर्मुहूर्त की सटीक जानकारी देना पाठकों के लिए व्यावहारिक मूल्य रखता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो व्यापारिक या यात्रा-संबंधी निर्णय लेने से पहले शुभ समय देखते हैं।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

8 जून 2026 को कालाष्टमी क्यों है?
ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 8 जून 2026, सोमवार को पड़ रही है, इसीलिए इसे कालाष्टमी कहा जाता है। यह तिथि काल भैरव और भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है।
8 जून 2026 को अभिजीत मुहूर्त कब है?
8 जून 2026 को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक रहेगा। यह शुभ कार्यों, यात्रा और महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए सर्वाधिक अनुकूल समय माना जाता है।
8 जून 2026 का राहुकाल कितने बजे है?
8 जून 2026, सोमवार को राहुकाल सुबह 7:07 बजे से 8:52 बजे तक रहेगा। इस अवधि में कोई नया या शुभ कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए।
कालाष्टमी पर व्रत कैसे रखें?
सूर्योदय (8 जून को 5:23 बजे) के पश्चात स्नान कर व्रत का संकल्प लें। काल भैरव की पूजा में काले तिल, सरसों का तेल और काले पुष्प अर्पित करें। गोधूलि मुहूर्त (7:16–7:37 बजे) में दीपदान और आरती करें।
8 जून 2026 को अष्टमी तिथि कब तक रहेगी?
अष्टमी तिथि 8 जून 2026 को पूरे दिन रहेगी और 9 जून की रात 3:23 बजे तक चलेगी। इस दिन नक्षत्र शतभिषा और योग विष्कम्भ रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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