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4 जुलाई 2026 पंचांग: संकष्टी चतुर्थी पर गणपति पूजा, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:04–12:58 बजे

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4 जुलाई 2026 पंचांग: संकष्टी चतुर्थी पर गणपति पूजा, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:04–12:58 बजे

सारांश

4 जुलाई 2026 को संकष्टी चतुर्थी के समापन के साथ गणपति पूजा का विशेष अवसर है। दिन का सबसे शुभ समय — अभिजित मुहूर्त — दोपहर 12:04 से 12:58 बजे तक रहेगा। राहुकाल, यमगंड और दिशाशूल से बचते हुए इस दिन को फलदायी बनाया जा सकता है।

मुख्य बातें

संकष्टी चतुर्थी तिथि का समापन 4 जुलाई 2026 को दोपहर 12:40 बजे होगा; इसके बाद पंचमी तिथि लगेगी।
अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:04 से 12:58 बजे तक — दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ काल।
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:13 से 5:01 बजे तक; इस दिन अमृत काल नहीं रहेगा।
राहुकाल सुबह 9:00–10:30 बजे , यमगंड दोपहर 2:10–3:55 बजे — इन समयों में शुभ कार्य वर्जित।
सूर्य आर्द्रा नक्षत्र (स्वामी राहु) में, चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र में; सूर्य मिथुन व चंद्र कुंभ राशि में।
पूर्व दिशा में दिशाशूल — उस दिशा में यात्रा से परहेज की सलाह।

शनिवार, 4 जुलाई 2026 को हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि दोपहर 12:40 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात पंचमी तिथि प्रारंभ होगी। इस दिन संकष्टी चतुर्थी का समापन होगा, जो भगवान गणेश को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने और विधिपूर्वक गणपति पूजा करने से भक्तों के समस्त संकट दूर होते हैं तथा बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र समय

4 जुलाई को सूर्योदय सुबह 5:49 बजे और सूर्यास्त शाम 7:12 बजे होगा। चंद्रोदय रात 10:20 बजे और चंद्रास्त सुबह 10:13 बजे होगा। पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में विराजमान रहेगा, जिसके स्वामी राहु हैं, जबकि चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र में गोचर करेगा।

शुभ मुहूर्त

शनिवार को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:04 बजे से 12:58 बजे तक रहेगा। यह दिन का सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है, जिसमें किसी भी महत्वपूर्ण कार्य, पूजा या व्यापार का शुभारंभ बिना राहुकाल या अन्य अशुभ काल की चिंता किए किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:13 बजे से 5:01 बजे तक रहेगा। उल्लेखनीय है कि इस दिन अमृत काल नहीं रहेगा।

अशुभ काल — राहुकाल, गुलिक और यमगंड

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, निम्नलिखित समयों में नए कार्यों का आरंभ वर्जित माना जाता है। राहुकाल सुबह 9:00 बजे से 10:30 बजे तक, गुलिक काल सुबह 5:49 बजे से 7:30 बजे तक, और यमगंड दोपहर 2:10 बजे से 3:55 बजे तक रहेगा। इन कालों में शुभ कार्यों से परहेज करने की सलाह दी जाती है।

योग और राशि गोचर

4 जुलाई को प्रीति योग शाम 5:02 बजे तक प्रभावी रहेगा। हर्षण योग इस दिन प्रभावी नहीं रहेगा। ग्रह स्थिति की दृष्टि से सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा कुंभ राशि में गोचर करेंगे।

दिशाशूल और यात्रा परामर्श

4 जुलाई 2026 (शनिवार) को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु परंपराओं के अनुसार इस दिन पूर्व दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो ज्योतिषीय उपायों का पालन करने की सलाह दी जाती है। संकष्टी चतुर्थी के इस विशेष दिन गणपति का स्मरण और पूजन दिन को और अधिक फलदायी बना सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि पाठक इसे अपने दैनिक निर्णयों में सीधे लागू करते हैं।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

4 जुलाई 2026 को संकष्टी चतुर्थी का समापन कब होगा?
4 जुलाई 2026 (शनिवार) को आषाढ़ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि दोपहर 12:40 बजे समाप्त होगी और इसके बाद पंचमी तिथि प्रारंभ होगी। इसी के साथ संकष्टी चतुर्थी व्रत का समापन माना जाएगा।
4 जुलाई 2026 को अभिजित मुहूर्त कब है?
4 जुलाई 2026 को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:04 बजे से 12:58 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय होता है, जिसमें पूजा, व्यापार या कोई भी महत्वपूर्ण कार्य निर्भय होकर शुरू किया जा सकता है।
4 जुलाई 2026 को राहुकाल किस समय है?
इस दिन राहुकाल सुबह 9:00 बजे से 10:30 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में कोई भी नया या शुभ कार्य आरंभ नहीं करना चाहिए।
4 जुलाई 2026 को कौन-से नक्षत्र और राशि में ग्रह रहेंगे?
पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य आर्द्रा नक्षत्र (स्वामी राहु) में और चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र में रहेगा। राशि गोचर की दृष्टि से सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा कुंभ राशि में विराजमान रहेंगे।
4 जुलाई 2026 को दिशाशूल किस दिशा में है और क्या सावधानी बरतें?
इस दिन पूर्व दिशा में दिशाशूल है। ज्योतिष परंपरा के अनुसार उस दिशा में यात्रा से बचना उचित है। यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो ज्योतिषीय उपाय अपनाने की सलाह दी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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