वंदे मातरम विवाद पर वीएचपी का कांग्रेस पर हमला: 'आरएसएस को निशाना बनाने से पहले आत्ममंथन करे पार्टी'
सारांश
मुख्य बातें
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के प्रवक्ता विनोद बंसल ने 17 अगस्त को कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को निशाना बनाने से पहले अपने नेताओं के बयानों और आचरण पर आत्ममंथन करे। यह बयान कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद की आरएसएस-विरोधी टिप्पणी के बाद आया है। बंसल ने 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम के कथित अपमान को 'बेहद निंदनीय' बताया।
वंदे मातरम विवाद: क्या हुआ
बंसल के अनुसार, जब देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा था और वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ से जुड़े कार्यक्रम हो रहे थे, उसी दौरान कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में कथित तौर पर वंदे मातरम का अपमान हुआ। उन्होंने दावा किया कि इस घटना का वीडियो कथित तौर पर संबंधित नेताओं के सोशल मीडिया हैंडल पर भी उपलब्ध है। बंसल ने कहा कि इस तरह के आचरण पर पार्टी को खेद व्यक्त करना चाहिए, न कि विषयांतर करना चाहिए।
आरएसएस पर कांग्रेस के हमलों पर वीएचपी का जवाब
बंसल ने कहा कि संघ के साथ कांग्रेस का वैचारिक टकराव दशकों पुराना है, लेकिन लगातार आरएसएस-विरोधी बयान देने से कांग्रेस को कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने इसे 'विनाश काले विपरीत बुद्धि' से जोड़ते हुए कहा कि ऐसे बयान पार्टी के लिए 'अपनी कब्र खुद खोदने' जैसे हैं। गौरतलब है कि यह वीएचपी की ओर से कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर की गई सीधी और तीखी प्रतिक्रिया है।
बटला हाउस और पाकिस्तान प्रसंग
बंसल ने बटला हाउस एनकाउंटर का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं ने अतीत में आतंकवाद से जुड़े मामलों में ऐसे बयान दिए जिन पर सवाल उठे। उन्होंने कहा कि जब भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ टिप्पणी होती है और कांग्रेस नेताओं के बयानों को पाकिस्तान में समर्थन मिलता है, तो इससे पार्टी की राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
बच्चों के प्रदर्शनों में भागीदारी पर चिंता
योग गुरु बाबा रामदेव के हालिया बयान का समर्थन करते हुए बंसल ने छात्र प्रदर्शनों में कम उम्र के बच्चों की कथित भागीदारी पर चिंता जताई। उनका कहना था कि छोटे बच्चों की उम्र पढ़ने-लिखने और समझने की होती है, और राजनीतिक प्रदर्शनों में उनकी भागीदारी उनके मानसिक विकास व पढ़ाई पर प्रतिकूल असर डाल सकती है।
लोकतंत्र और नागरिक कर्तव्य
बंसल ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन हिंसा, अतिवाद, जातिगत भेदभाव या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे केवल अधिकारों की बात न करें, बल्कि अपने कर्तव्यों का भी पालन करें। वीएचपी प्रवक्ता ने यह भी कहा कि देश को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी किसी एक दल या सरकार की नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों की है।