बृजभूषण शरण सिंह का कांग्रेस पर हमला: 'वंदे मातरम' विवाद में बोले — पार्टी लोगों की भावनाएं आहत करती है
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने 20 अगस्त को गोंडा में 'वंदे मातरम' को लेकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के रुख पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस बार-बार ऐसे कदम उठाती है जो देश के अधिकांश नागरिकों की भावनाओं के विरुद्ध जाते हैं, और यही दोहरा रवैया पार्टी की वर्तमान राजनीतिक दुर्दशा का मूल कारण है। यह बयान उस समय आया जब कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) ने 'वंदे मातरम' के केवल शुरुआती दो पद गाने पर सहमति जताई।
मुख्य बयान: 'कांग्रेस आईने में देखे'
सिंह ने कहा कि कांग्रेस हर वह काम करती है जिससे देश के ज़्यादातर लोगों की भावनाएं आहत हों। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस को आईने में देखकर खुद का आकलन करने की ज़रूरत है। सबसे बड़ी और सबसे पुरानी पार्टी होने के बावजूद आज वह जिस स्थिति में पहुँच गई है, उसके पीछे उसका यही दोहरा रवैया है।'
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस एक दोराहे पर खड़ी है — कभी हिंदुत्व की बात करती है, तो कभी खुद को सेक्युलर बताती है। पार्टी अपनी दिशा तय नहीं कर पा रही।
'वंदे मातरम' विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की हालिया बैठक में 'वंदे मातरम' के मुद्दे पर चर्चा हुई, जिसमें केवल गीत के प्रारंभिक दो पद गाने पर सहमति बनी। इसी निर्णय को लेकर BJP नेताओं ने कांग्रेस को घेरा है। बृजभूषण शरण सिंह ने इसे पार्टी की 'राष्ट्रीय भावनाओं के प्रति उदासीनता' का प्रमाण बताया।
राम मंदिर और ऐतिहासिक संदर्भ
सिंह ने राम मंदिर के मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में ही अयोध्या में मंदिर का ताला खोला गया था और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में शिलान्यास भी हुआ था। हालाँकि, उनके आरोप के अनुसार, इसके बाद कांग्रेस अपने रुख से पीछे हट गई। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस का रास्ता स्पष्ट नहीं है — यही कारण है कि पार्टी ऐसे काम करती है जिनसे देश के लोगों की भावनाएं आहत होती हैं।'
लखनऊ दौरे पर 'ऐतिहासिक स्वागत'
सिंह ने बताया कि अदालत से बरी होने के बाद लखनऊ का यह उनका पहला दौरा था। उन्होंने कहा कि लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया और शहर में 39 कार्यक्रम आयोजित हुए। उन्होंने इस स्वागत को 'ऐतिहासिक' बताया और कहा कि उन्हें इतने प्यार की उम्मीद नहीं थी।
आगे की राजनीतिक तस्वीर
यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस अपनी वैचारिक पहचान को लेकर आंतरिक बहस के दौर से गुज़र रही है। बृजभूषण शरण सिंह का यह बयान BJP के उस व्यापक राजनीतिक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें कांग्रेस को राष्ट्रीय प्रतीकों और भावनाओं के प्रति उदासीन दिखाने की कोशिश की जाती है। आने वाले दिनों में 'वंदे मातरम' विवाद पर राजनीतिक बयानबाज़ी और तेज़ होने की संभावना है।