वंदे मातरम विवाद: 'दो छंद गाना नाटकबाजी' — BJP ने कांग्रेस पर साधा निशाना, गहलोत ने दिया पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 21 अगस्त 2026 — वंदे मातरम को पूरा न गाने के कांग्रेस के फैसले पर राजनीतिक तापमान चढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई वरिष्ठ नेताओं ने इस निर्णय को 'नाटकबाजी' और 'आपत्तिजनक' करार दिया, जबकि कांग्रेस नेताओं ने पलटवार करते हुए पार्टी की दशकों पुरानी राष्ट्रगीत-परंपरा का हवाला दिया।
BJP नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
बिहार सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि कांग्रेस को कम से कम इतनी सदबुद्धि तो आई कि दो छंद गाएंगे। उन्होंने कहा, 'अब उनको यह महसूस हो रहा है कि हमने वंदे मातरम का विरोध करके गलत किया। आधा गाने और आधा न गाने वाला नाटक देश पसंद नहीं करेगा।'
बिहार सरकार में मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा, 'वंदे मातरम हम सभी और देश के हर नागरिक के लिए एक गीत है। यह हमारी आजादी की लड़ाई का प्रतीक है और करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा है। कांग्रेस पार्टी का केवल दो लाइनें गाने का फैसला आपत्तिजनक है।'
बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि वंदे मातरम को कांग्रेस ही लेकर आई थी और इसे बनाने वाले सभी लोग कांग्रेस से ही थे। उन्होंने तर्क दिया, 'अगर आपको महादेव का कोई श्लोक पढ़ना हो, तो आप आधा श्लोक नहीं पढ़ सकते — आपको पूरा पढ़ना होगा।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बंटवारे के बाद इस गीत को लेकर समाज में दो तरह की राय रही है।
शिवसेना का रुख
शिवसेना नेता और विधान परिषद के उपसभापति सचिन अहीर ने कहा कि कानून सबके लिए एक जैसा है। उन्होंने कहा, 'जब कानून का पालन किया जा रहा हो और खासकर जब 150 साल पूरे होने का अवसर हो, तो इसमें क्या दिक्कत है?' अहीर ने यह भी कहा कि देश में 80 प्रतिशत से ज्यादा लोगों के लिए राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत — ये दो ही गान जाने-पहचाने हैं।
कांग्रेस का पलटवार
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने BJP पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'वंदे मातरम से उनका क्या लेना-देना है? उन्होंने 50 साल तक आरएसएस मुख्यालय पर तिरंगा क्यों नहीं फहराया? कांग्रेस इसे 90 साल से गा रही है और मैं इसे 50 साल से गा रहा हूं।' गहलोत ने आरोप लगाया कि BJP केवल लोगों को गुमराह कर रही है।
कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने कहा कि यह वही वंदे मातरम है जिसके लिए सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और मौलाना आजाद जैसे महान नेताओं ने आजादी की लड़ाई के दौरान संघर्ष किया था। उन्होंने कहा, 'यह वही वंदे मातरम है जिसे उन्होंने गाया था।'
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश स्वतंत्रता के 150 वर्ष पूरे होने के उत्सव की तैयारियों में है। गौरतलब है कि वंदे मातरम को लेकर ऐतिहासिक रूप से भी राजनीतिक दलों में मतभेद रहे हैं — विशेषकर 1947 के बाद, जब इसके कुछ छंदों को लेकर धार्मिक भावनाओं के आधार पर आपत्तियाँ उठाई गई थीं। संविधान सभा ने तब यह तय किया था कि राष्ट्रगीत के रूप में इसके पहले दो छंद ही आधिकारिक रूप से मान्य होंगे।
आगे क्या
यह विवाद संसद के आगामी सत्र में भी गूंज सकता है। दोनों पक्षों की ओर से बयानबाजी जारी है और आलोचकों का कहना है कि यह मुद्दा चुनावी दृष्टि से संवेदनशील राज्यों में राजनीतिक ध्रुवीकरण को और गहरा कर सकता है।