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वंदे मातरम विवाद: 'दो छंद गाना नाटकबाजी' — BJP ने कांग्रेस पर साधा निशाना, गहलोत ने दिया पलटवार

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वंदे मातरम विवाद: 'दो छंद गाना नाटकबाजी' — BJP ने कांग्रेस पर साधा निशाना, गहलोत ने दिया पलटवार

सारांश

वंदे मातरम के केवल दो छंद गाने के कांग्रेस के फैसले ने नई राजनीतिक जंग छेड़ दी है। BJP ने इसे 'नाटकबाजी' बताया तो गहलोत ने RSS पर तिरंगे का सवाल उठाया। 150वें स्वतंत्रता वर्ष की पूर्व संध्या पर यह विवाद राष्ट्रीय प्रतीकों की राजनीति को फिर केंद्र में ले आया है।

मुख्य बातें

कांग्रेस ने वंदे मातरम के केवल दो छंद गाने का फैसला किया, जिसे BJP ने 'आपत्तिजनक' और 'नाटकबाजी' करार दिया।
बिहार मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा यह गीत करोड़ों भावनाओं से जुड़ा है और आधा गाना स्वीकार्य नहीं।
शिवसेना नेता सचिन अहीर ने कहा देश में 80% से अधिक लोग केवल दो ही राष्ट्रीय गान जानते हैं।
पूर्व CM अशोक गहलोत ने कहा कांग्रेस 90 साल से वंदे मातरम गा रही है; RSS मुख्यालय पर 50 साल तक तिरंगा न फहराने पर BJP से सवाल किया।
कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने कहा यह वही गीत है जिसके लिए गांधी, नेहरू, बोस, पटेल और मौलाना आजाद ने संघर्ष किया।

नई दिल्ली, 21 अगस्त 2026वंदे मातरम को पूरा न गाने के कांग्रेस के फैसले पर राजनीतिक तापमान चढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई वरिष्ठ नेताओं ने इस निर्णय को 'नाटकबाजी' और 'आपत्तिजनक' करार दिया, जबकि कांग्रेस नेताओं ने पलटवार करते हुए पार्टी की दशकों पुरानी राष्ट्रगीत-परंपरा का हवाला दिया।

BJP नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया

बिहार सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि कांग्रेस को कम से कम इतनी सदबुद्धि तो आई कि दो छंद गाएंगे। उन्होंने कहा, 'अब उनको यह महसूस हो रहा है कि हमने वंदे मातरम का विरोध करके गलत किया। आधा गाने और आधा न गाने वाला नाटक देश पसंद नहीं करेगा।'

बिहार सरकार में मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा, 'वंदे मातरम हम सभी और देश के हर नागरिक के लिए एक गीत है। यह हमारी आजादी की लड़ाई का प्रतीक है और करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा है। कांग्रेस पार्टी का केवल दो लाइनें गाने का फैसला आपत्तिजनक है।'

बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि वंदे मातरम को कांग्रेस ही लेकर आई थी और इसे बनाने वाले सभी लोग कांग्रेस से ही थे। उन्होंने तर्क दिया, 'अगर आपको महादेव का कोई श्लोक पढ़ना हो, तो आप आधा श्लोक नहीं पढ़ सकते — आपको पूरा पढ़ना होगा।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बंटवारे के बाद इस गीत को लेकर समाज में दो तरह की राय रही है।

शिवसेना का रुख

शिवसेना नेता और विधान परिषद के उपसभापति सचिन अहीर ने कहा कि कानून सबके लिए एक जैसा है। उन्होंने कहा, 'जब कानून का पालन किया जा रहा हो और खासकर जब 150 साल पूरे होने का अवसर हो, तो इसमें क्या दिक्कत है?' अहीर ने यह भी कहा कि देश में 80 प्रतिशत से ज्यादा लोगों के लिए राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत — ये दो ही गान जाने-पहचाने हैं।

कांग्रेस का पलटवार

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने BJP पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'वंदे मातरम से उनका क्या लेना-देना है? उन्होंने 50 साल तक आरएसएस मुख्यालय पर तिरंगा क्यों नहीं फहराया? कांग्रेस इसे 90 साल से गा रही है और मैं इसे 50 साल से गा रहा हूं।' गहलोत ने आरोप लगाया कि BJP केवल लोगों को गुमराह कर रही है।

कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने कहा कि यह वही वंदे मातरम है जिसके लिए सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और मौलाना आजाद जैसे महान नेताओं ने आजादी की लड़ाई के दौरान संघर्ष किया था। उन्होंने कहा, 'यह वही वंदे मातरम है जिसे उन्होंने गाया था।'

विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश स्वतंत्रता के 150 वर्ष पूरे होने के उत्सव की तैयारियों में है। गौरतलब है कि वंदे मातरम को लेकर ऐतिहासिक रूप से भी राजनीतिक दलों में मतभेद रहे हैं — विशेषकर 1947 के बाद, जब इसके कुछ छंदों को लेकर धार्मिक भावनाओं के आधार पर आपत्तियाँ उठाई गई थीं। संविधान सभा ने तब यह तय किया था कि राष्ट्रगीत के रूप में इसके पहले दो छंद ही आधिकारिक रूप से मान्य होंगे।

आगे क्या

यह विवाद संसद के आगामी सत्र में भी गूंज सकता है। दोनों पक्षों की ओर से बयानबाजी जारी है और आलोचकों का कहना है कि यह मुद्दा चुनावी दृष्टि से संवेदनशील राज्यों में राजनीतिक ध्रुवीकरण को और गहरा कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और संविधान सभा ने भी पहले दो छंदों को ही आधिकारिक मान्यता दी थी। लेकिन इस पुराने विवाद को 150वें स्वतंत्रता वर्ष की पूर्व संध्या पर फिर हवा देना दोनों दलों की चुनावी रणनीति का हिस्सा दिखता है। असली सवाल यह है कि राष्ट्रीय प्रतीकों पर बहस क्या वास्तव में संवैधानिक स्पष्टता की माँग से उठती है, या यह केवल ध्रुवीकरण का औज़ार है — और मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस फर्क को नज़रअंदाज़ कर देती है।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वंदे मातरम विवाद 2026 क्या है?
कांग्रेस पार्टी ने वंदे मातरम के केवल दो छंद गाने का फैसला किया, जिस पर BJP नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे 'नाटकबाजी' और 'आपत्तिजनक' करार दिया। यह विवाद 21 अगस्त 2026 को उस समय सुर्खियों में आया जब कई BJP और शिवसेना नेताओं ने सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी।
कांग्रेस केवल दो छंद क्यों गाती है?
ऐतिहासिक रूप से संविधान सभा ने 1950 में यह निर्धारित किया था कि वंदे मातरम के पहले दो छंद ही राष्ट्रगीत के रूप में मान्य होंगे, क्योंकि बाद के छंदों को लेकर धार्मिक आधार पर आपत्तियाँ थीं। कांग्रेस नेता अशोक गहलोत के अनुसार पार्टी 90 साल से इसे इसी रूप में गाती आई है।
BJP ने इस पर क्या कहा?
BJP नेताओं — दिलीप जायसवाल, राम कृपाल यादव और अशोक चौधरी — ने कहा कि राष्ट्रगीत को आधा गाना स्वीकार्य नहीं और यह देश की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने इसे कांग्रेस की 'नाटकबाजी' बताया।
अशोक गहलोत ने BJP पर क्या आरोप लगाए?
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि RSS मुख्यालय पर 50 साल तक तिरंगा नहीं फहराया गया, और BJP को वंदे मातरम की चिंता अचानक क्यों हुई, इसका जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस 90 साल से और वे स्वयं 50 साल से वंदे मातरम गा रहे हैं।
यह विवाद अभी क्यों उठा?
यह विवाद भारत की स्वतंत्रता के 150 वर्ष पूरे होने के उत्सव की तैयारियों के बीच उभरा है। शिवसेना नेता सचिन अहीर ने इसी संदर्भ में कहा कि जब 150 साल के सम्मान का अवसर हो, तो राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति आदर और भी ज़रूरी हो जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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