'वंदे मातरम' विवाद: भाजपा विधायक उपाध्याय और कांग्रेस के बीच तीखी जुबानी जंग
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 21 अगस्त — 'वंदे मातरम' को लेकर देशभर में सियासी तापमान एक बार फिर चढ़ गया है। मुंबई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक संजय उपाध्याय ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर राष्ट्रगीत के अपमान और तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया। वहीं हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने पलटवार करते हुए भाजपा पर सदन में राष्ट्रगान के दौरान नारेबाजी करने का आरोप लगाया। पुणे में कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे ने भाजपा नेता किरीट सोमैया के आरोपों का जवाब देते हुए भाजपा और हिंदू महासभा के ऐतिहासिक राजनीतिक रुख पर सवाल खड़े किए।
भाजपा का आरोप: कांग्रेस ने राष्ट्रगीत से बनाई दूरी
भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने कांग्रेस कार्यसमिति के उस फैसले पर सवाल उठाए, जिसमें पार्टी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के केवल दो पद गाने का प्रस्ताव पारित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक कांग्रेस कार्यक्रम में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की ओर से राष्ट्रगीत को बीच में रोकने की कोशिश की गई।
उपाध्याय ने तर्क दिया कि जब संसद ने 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगीत के रूप में स्वीकार किया है और उसके पूर्ण गायन की अनुमति दी गई है, तो कांग्रेस को आपत्ति क्यों है। उन्होंने 1937 के राजनीतिक घटनाक्रम का हवाला देते हुए दावा किया कि उस समय मुस्लिम लीग की आपत्तियों के बाद कांग्रेस ने 'वंदे मातरम' से दूरी बनाई थी।
भाजपा विधायक ने इस ऐतिहासिक संदर्भ को भारत के विभाजन और पाकिस्तान के गठन से जोड़ते हुए सवाल किया कि क्या कांग्रेस अब मुस्लिम लीग का विकल्प बन गई है। उन्होंने कांग्रेस से राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने की माँग की।
हिमाचल स्पीकर का पलटवार: राष्ट्रगान के दौरान भाजपा ने की नारेबाजी
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने भाजपा पर ही सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही की शुरुआत राष्ट्रगान से होती है, जबकि 'वंदे मातरम' सदन में अंत में गाया जाता है। पठानिया ने दावा किया कि जिस दिन यह विवाद हुआ, उस दिन सदन की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई थी, लेकिन राष्ट्रगान शुरू होते ही भाजपा सदस्यों ने अपनी सीटों पर बैठने के बजाय नारेबाजी शुरू कर दी।
पठानिया ने कहा कि ऐसे में यह सवाल भाजपा से पूछा जाना चाहिए कि राष्ट्रगान के सम्मान का उल्लंघन किसकी ओर से हुआ। उन्होंने कहा, 'पूरे घटनाक्रम को देखकर जनता खुद तय कर सकती है कि अपमान किसका हुआ।'
कांग्रेस का जवाब: ऐतिहासिक संदर्भ और एकता की राजनीति
पुणे में कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे ने भाजपा नेता किरीट सोमैया के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने हिंदू महासभा, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और विनायक दामोदर सावरकर से जुड़े ऐतिहासिक राजनीतिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि बंगाल, पंजाब और सिंध में उस दौर में मुस्लिम लीग के साथ राजनीतिक सहयोग किया गया था।
लोंढे ने सावरकर के 1937 में दिए गए कथित 'द्विराष्ट्र सिद्धांत' के संदर्भ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भाजपा को इतिहास में विभाजन की राजनीति के आरोप कांग्रेस पर लगाने से पहले अपने वैचारिक इतिहास पर भी बात करनी चाहिए।
लोंढे ने रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और आचार्य कृपलानी जैसे नेताओं का हवाला देते हुए कहा कि इन नेताओं ने देश की एकता को प्राथमिकता दी और 'वंदे मातरम' के उन्हीं हिस्सों को प्राथमिकता दी जिन्हें व्यापक रूप से स्वीकार किया जा सके। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह हिंदू-मुस्लिम मुद्दे को बार-बार उठाकर समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश करती है।
विवाद का व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि 'वंदे मातरम' का विवाद नया नहीं है। यह बहस दशकों पुरानी है और स्वतंत्रता आंदोलन के दौर से ही इसके विभिन्न पहलुओं पर मतभेद रहे हैं। यह ऐसे समय में उभरा है जब देश में राजनीतिक दल एक-दूसरे पर राष्ट्रवाद और देशभक्ति के मुद्दों पर हमलावर हैं। आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रगीत जैसे संवेदनशील विषयों को राजनीतिक हथियार बनाना लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए उचित नहीं है।
आगे क्या
फिलहाल दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह के मुद्दे चुनावी माहौल में जनमत को प्रभावित करने के लिए उठाए जाते हैं।