वंदे मातरम विवाद: शिवसेना का कांग्रेस पर निशाना, कृष्णा हेगड़े बोले — राष्ट्रीय गीत पर विवाद अस्वीकार्य
सारांश
मुख्य बातें
केरल में वंदे मातरम के गायन को लेकर उपजे विवाद पर शिवसेना ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। शिवसेना के प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने 30 मई को कहा कि वंदे मातरम देश का राष्ट्रीय गीत है और इसे लेकर किसी भी प्रकार का विवाद खड़ा करना न केवल अनुचित है, बल्कि राष्ट्रीय भावनाओं के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
मुख्य घटनाक्रम
हेगड़े के अनुसार, केरल में नई यूडीएफ-कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण के बाद कांग्रेस पार्टी द्वारा वंदे मातरम के गायन और बैंड प्रदर्शन को रोकने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा, 'राज्यपाल ने इस पर नाराज़गी जताई और स्पष्ट किया कि वंदे मातरम एक राष्ट्रीय गीत है और इसे इस तरह रोका नहीं जा सकता।'
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर राजनीतिक संवेदनशीलता पहले से बढ़ी हुई है। गौरतलब है कि वंदे मातरम को भारत के संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया था।
कांग्रेस की आंतरिक खींचतान
इसी बीच, आंध्र प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष वाईएस शर्मिला द्वारा राज्यसभा नामांकन को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएँ तेज़ हो गई हैं। हेगड़े ने कहा कि कर्नाटक में राज्यसभा की तीन या चार सीटें हैं जिन पर कांग्रेस चुनाव लड़ रही है, और डीके शिवकुमार व कार्यवाहक मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के खेमों के बीच खींचतान जारी है।
उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष राज्यसभा के लिए अपने-अपने उम्मीदवारों को सुनिश्चित करने की कोशिश में हैं। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी की बेटी वाईएस शर्मिला भी इस दौड़ में शामिल बताई जा रही हैं।
शिवसेना की प्रतिक्रिया
हेगड़े ने कहा कि वाईएस शर्मिला कांग्रेस का युवा चेहरा हैं और यदि कांग्रेस उनके नाम पर सहमत होती है तो यह पार्टी के लिए सकारात्मक कदम होगा। हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कांग्रेस का अंदरूनी मामला है और शिवसेना इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहती।
क्या होगा आगे
केरल में वंदे मातरम विवाद और कर्नाटक की राज्यसभा सीटों पर कांग्रेस की आंतरिक रस्साकशी — दोनों मुद्दे आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति में और गर्मी ला सकते हैं। विपक्षी दलों द्वारा इन मुद्दों को चुनावी नज़रिए से भुनाने की कोशिश जारी रहने की संभावना है।