16 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

केरल 'वंदे मातरम' विवाद: एनडीए नेताओं का कांग्रेस पर हमला — 'राष्ट्रीय हितों से समझौता बंद करो'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
केरल 'वंदे मातरम' विवाद: एनडीए नेताओं का कांग्रेस पर हमला — 'राष्ट्रीय हितों से समझौता बंद करो'

सारांश

केरल विधानसभा में 'वंदे मातरम' के संक्षिप्त गायन पर भड़के एनडीए नेता — BJP के सीआर केसवन ने कांग्रेस को 'सांप्रदायिक एजेंडा' फैलाने का दोषी ठहराया, शिवसेना की शाइना एनसी ने 'दोगलापन' पर चेताया, और ओमप्रकाश राजभर ने कहा — देश में रहना है तो 'वंदे मातरम' कहना होगा।

मुख्य बातें

केरल विधानसभा में 'वंदे मातरम' के गायन को संक्षिप्त किए जाने पर एनडीए नेताओं ने 30 मई 2026 को तीखी प्रतिक्रिया दी।
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केसवन ने कांग्रेस पर 'सांप्रदायिक एजेंडा' और 'राष्ट्रीय हितों से विश्वासघात' का आरोप लगाया।
शिवसेना की राष्ट्रीय प्रवक्ता शाइना एनसी ने केरल के मुख्यमंत्री पर 'दोगलापन' का आरोप लगाया।
BJP प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा — केंद्र सरकार के नियम के तहत हर सरकारी कार्यक्रम से पहले 'वंदे मातरम' अनिवार्य है।
SBSP अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने कहा — देश में रहना है तो 'वंदे मातरम' कहना होगा।

केरल विधानसभा में 'वंदे मातरम' के गायन को लेकर उठे विवाद पर एनडीए के नेताओं ने 30 मई 2026 को तीखी प्रतिक्रिया दी। नेताओं ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक लाभ के लिए राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय हितों से बार-बार समझौता करती आई है। यह विवाद केरल विधानसभा में राष्ट्रगीत के गायन को संक्षिप्त किए जाने के बाद सामने आया।

भाजपा का पलटवार

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केसवन ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी अपनी साख खो चुकी है और केरल विधानसभा में 'वंदे मातरम' के गायन को छोटा करके धार्मिक ध्रुवीकरण का अपना जहरीला सांप्रदायिक एजेंडा फैला रही है। उसने उन देशभक्तों की पीढ़ियों के निस्वार्थ बलिदान का घोर अपमान और अनादर किया है, जिन्होंने हमारे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 'वंदे मातरम' कहते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। इतिहास ने बार-बार यह देखा है कि कैसे कांग्रेस पार्टी ने अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय हितों के साथ विश्वासघात करने में कभी संकोच नहीं किया।'

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब 'वंदे मातरम' राजनीतिक विवाद का केंद्र बना है। देश में इस राष्ट्रगीत को लेकर अतीत में भी सांप्रदायिक रंग दिए जाने के आरोप लगते रहे हैं।

शिवसेना की प्रतिक्रिया

शिवसेना की राष्ट्रीय प्रवक्ता शाइना एनसी ने केरल के मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, ''वंदे मातरम' राष्ट्रगीत है। जब आप बहुवादी समाज की बात करते हैं तो इस गीत से इसकी शुरुआत होती है। मगर आप धार्मिक आरोपण लगाते हैं व सांप्रदायिक विभाजन को फैलाते हैं और फिर सांप्रदायिक सौहार्द्र की बात करते हैं। इस तरह का दोगलापन नहीं चलेगा।'

कानूनी पहलू और कांग्रेस पर आरोप

BJP प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा, 'केंद्र सरकार की ओर से 'वंदे मातरम' को लेकर कानून के बाद नियम बन चुका है। हर सरकारी कार्यक्रम से पहले 'वंदे मातरम' अनिवार्य है। कांग्रेस ने अपनी तुष्टिकरण की नीतियों के कारण मूल 'वंदे मातरम' से कुछ पंक्तियों को हटा दिया था, लेकिन इन पंक्तियों को फिर से जोड़ा गया है।'

उन्होंने आगे कहा कि 'वंदे मातरम' देश की आज़ादी से जुड़ा हुआ गीत है — वीरता और संन्यासियों के त्याग का प्रतीक। उनके अनुसार, जो भी इसका पालन नहीं करता, वह राष्ट्रगीत का अपमान करता है।

एसबीएसपी का स्पष्ट संदेश

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'अगर किसी को इस देश में रहना है, तो उसे 'वंदे मातरम' कहना ही होगा। प्रधानमंत्री ने यह बयान संविधान के दायरे में रहते हुए दिया है, और देश में हर किसी को इसका पालन करना होगा।'

आगे क्या

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब केरल में विधानसभा सत्र चल रहा है और राष्ट्रगीत के गायन की परंपरा पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सार्वजनिक हो गए हैं। एनडीए नेताओं की इस सामूहिक प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक गर्मी पैदा कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि केरल में भाजपा की राजनीतिक पैठ बनाने की रणनीति का हिस्सा भी दिखती है। दूसरी तरफ, कांग्रेस और केरल सरकार की ओर से इस विवाद पर कोई स्पष्ट सफाई न आना, उन्हें रक्षात्मक स्थिति में डालता है। असली सवाल यह है कि क्या यह बहस संवैधानिक दायरे में राष्ट्रगीत के सम्मान की है, या फिर इसे धार्मिक ध्रुवीकरण के औज़ार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है — दोनों पक्षों को इस पर जवाब देना होगा।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल 'वंदे मातरम' विवाद क्या है?
केरल विधानसभा में 'वंदे मातरम' के गायन को संक्षिप्त किए जाने पर एनडीए नेताओं ने आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि कांग्रेस राजनीतिक कारणों से राष्ट्रगीत का अपमान कर रही है।
BJP ने इस विवाद पर क्या कहा?
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केसवन ने कांग्रेस पर 'सांप्रदायिक एजेंडा' फैलाने और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का अपमान करने का आरोप लगाया। BJP प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार के नियम के अनुसार हर सरकारी कार्यक्रम से पहले 'वंदे मातरम' अनिवार्य है।
शिवसेना ने केरल के मुख्यमंत्री पर क्या आरोप लगाए?
शिवसेना की राष्ट्रीय प्रवक्ता शाइना एनसी ने कहा कि एक तरफ बहुवादी समाज की बात करना और दूसरी तरफ सांप्रदायिक विभाजन फैलाना 'दोगलापन' है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'वंदे मातरम' राष्ट्रगीत है और इसका सम्मान अनिवार्य है।
ओमप्रकाश राजभर ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
SBSP अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि देश में रहने वाले हर व्यक्ति को 'वंदे मातरम' कहना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री का यह बयान संविधान के दायरे में है।
क्या 'वंदे मातरम' गाना कानूनी रूप से अनिवार्य है?
BJP प्रवक्ता प्रतुल शाह देव के अनुसार, केंद्र सरकार के नियम के तहत हर सरकारी कार्यक्रम से पहले 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य है। हालांकि, इस नियम की व्याख्या और लागू करने को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले