केरल 'वंदे मातरम' विवाद: एनडीए नेताओं का कांग्रेस पर हमला — 'राष्ट्रीय हितों से समझौता बंद करो'
सारांश
मुख्य बातें
केरल विधानसभा में 'वंदे मातरम' के गायन को लेकर उठे विवाद पर एनडीए के नेताओं ने 30 मई 2026 को तीखी प्रतिक्रिया दी। नेताओं ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक लाभ के लिए राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय हितों से बार-बार समझौता करती आई है। यह विवाद केरल विधानसभा में राष्ट्रगीत के गायन को संक्षिप्त किए जाने के बाद सामने आया।
भाजपा का पलटवार
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केसवन ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी अपनी साख खो चुकी है और केरल विधानसभा में 'वंदे मातरम' के गायन को छोटा करके धार्मिक ध्रुवीकरण का अपना जहरीला सांप्रदायिक एजेंडा फैला रही है। उसने उन देशभक्तों की पीढ़ियों के निस्वार्थ बलिदान का घोर अपमान और अनादर किया है, जिन्होंने हमारे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 'वंदे मातरम' कहते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। इतिहास ने बार-बार यह देखा है कि कैसे कांग्रेस पार्टी ने अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय हितों के साथ विश्वासघात करने में कभी संकोच नहीं किया।'
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब 'वंदे मातरम' राजनीतिक विवाद का केंद्र बना है। देश में इस राष्ट्रगीत को लेकर अतीत में भी सांप्रदायिक रंग दिए जाने के आरोप लगते रहे हैं।
शिवसेना की प्रतिक्रिया
शिवसेना की राष्ट्रीय प्रवक्ता शाइना एनसी ने केरल के मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, ''वंदे मातरम' राष्ट्रगीत है। जब आप बहुवादी समाज की बात करते हैं तो इस गीत से इसकी शुरुआत होती है। मगर आप धार्मिक आरोपण लगाते हैं व सांप्रदायिक विभाजन को फैलाते हैं और फिर सांप्रदायिक सौहार्द्र की बात करते हैं। इस तरह का दोगलापन नहीं चलेगा।'
कानूनी पहलू और कांग्रेस पर आरोप
BJP प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा, 'केंद्र सरकार की ओर से 'वंदे मातरम' को लेकर कानून के बाद नियम बन चुका है। हर सरकारी कार्यक्रम से पहले 'वंदे मातरम' अनिवार्य है। कांग्रेस ने अपनी तुष्टिकरण की नीतियों के कारण मूल 'वंदे मातरम' से कुछ पंक्तियों को हटा दिया था, लेकिन इन पंक्तियों को फिर से जोड़ा गया है।'
उन्होंने आगे कहा कि 'वंदे मातरम' देश की आज़ादी से जुड़ा हुआ गीत है — वीरता और संन्यासियों के त्याग का प्रतीक। उनके अनुसार, जो भी इसका पालन नहीं करता, वह राष्ट्रगीत का अपमान करता है।
एसबीएसपी का स्पष्ट संदेश
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'अगर किसी को इस देश में रहना है, तो उसे 'वंदे मातरम' कहना ही होगा। प्रधानमंत्री ने यह बयान संविधान के दायरे में रहते हुए दिया है, और देश में हर किसी को इसका पालन करना होगा।'
आगे क्या
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब केरल में विधानसभा सत्र चल रहा है और राष्ट्रगीत के गायन की परंपरा पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सार्वजनिक हो गए हैं। एनडीए नेताओं की इस सामूहिक प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक गर्मी पैदा कर सकता है।