11 जुलाई 2026
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'वंदे मातरम' पहले गाने के फैसले पर सियासत: भाजपा के मुनगंटीवार ने किया समर्थन, NCP-कांग्रेस ने उठाए सवाल

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'वंदे मातरम' पहले गाने के फैसले पर सियासत: भाजपा के मुनगंटीवार ने किया समर्थन, NCP-कांग्रेस ने उठाए सवाल

सारांश

'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान से पहले गाने के फैसले ने एक बार फिर राजनीतिक बहस छेड़ दी है। BJP के मुनगंटीवार इसे पुरानी परंपरा का विस्तार बताते हैं, जबकि NCP और कांग्रेस ने संवैधानिक आधार और धार्मिक स्वतंत्रता के सवाल उठाए हैं।

मुख्य बातें

BJP विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने राष्ट्रगान से पहले 'वंदे मातरम' गाने के फैसले का समर्थन किया।
मुनगंटीवार के अनुसार देश के लगभग 90 प्रतिशत लोग 'वंदे मातरम' गाते हैं और यह कोई नया निर्णय नहीं है।
NCP (शरद पवार गुट) के प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने इसे अल्पसंख्यकों पर जबरन थोपने की कोशिश बताया।
कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने संतुलित रुख अपनाते हुए नई गाइडलाइन का संवैधानिक आधार स्पष्ट करने की माँग की।
'वंदे मातरम' को 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने राष्ट्रगीत का दर्जा दिया था।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने 11 जुलाई 2026 को राष्ट्रगान 'जन गण मन' से पहले 'वंदे मातरम' गाने के निर्णय का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह कोई नया प्रावधान नहीं है, बल्कि वर्षों से विभिन्न सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' का गायन होता आया है। इस फैसले पर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताते हुए इसे अल्पसंख्यक समुदाय पर थोपने की कोशिश बताया।

मुनगंटीवार का पक्ष: परंपरा का विस्तार

सुधीर मुनगंटीवार ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुसार 'जन गण मन' भारत का राष्ट्रगान है और वह सर्वोपरि है, जबकि संविधान-निर्माण के दौरान 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया था। उन्होंने कहा कि पहले कई आयोजनों में 'वंदे मातरम' का केवल एक अंश गाया जाता था, लेकिन अब इसे पूर्ण रूप से गाया जाना चाहिए।

मुनगंटीवार ने यह भी कहा कि कुछ विशेष धार्मिक समूहों द्वारा इसका विरोध होता रहा है, जबकि उनके अनुसार देश के लगभग 90 प्रतिशत लोग 'वंदे मातरम' का गायन करते हैं।

NCP (शरद पवार गुट) की आपत्ति

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने सरकार के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सरकार यह फैसला लोगों पर जबरन थोपना चाहती है। सिद्दीकी के अनुसार मुसलमान 'वंदे मातरम' नहीं गा सकते, क्योंकि उनकी धार्मिक मान्यता के अनुसार वे केवल एक ईश्वर की इबादत करते हैं और किसी अन्य के सामने सिर नहीं झुका सकते।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय 'वंदे मातरम' का सम्मान करता है, लेकिन उसका गायन करने के बजाय मौन रहना उचित समझता है।

कांग्रेस का संतुलित रुख

कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने इस मुद्दे पर अपेक्षाकृत संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि भारत का प्रत्येक नागरिक 'जन गण मन' और 'वंदे मातरम' दोनों का गहरा सम्मान करता है, और दोनों ही देशभक्ति की भावना से अभिन्न रूप से जुड़े हैं।

सिन्हा ने सवाल उठाया कि यदि कोई नई गाइडलाइन जारी की गई है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि राष्ट्रगान 'जन गण मन' को बाद में और 'वंदे मातरम' को पहले गाने का संवैधानिक या प्रशासनिक आधार क्या है। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों भारत की आत्मा हैं और दोनों के प्रति हर भारतीय के मन में समान सम्मान की भावना है।'

विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 'वंदे मातरम' को लेकर देश में समय-समय पर राजनीतिक बहस उठती रही है। यह गीत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित है और स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरणास्रोत रहा है। संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को इसे राष्ट्रगीत का दर्जा दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब देश में राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर राजनीतिक संवाद तेज हो रहा है।

आगे क्या

इस फैसले को लेकर संसद और राज्य विधानसभाओं में भी बहस छिड़ने की संभावना है। विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक विमर्श का केंद्र बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह बहस राजनीतिक ध्रुवीकरण का औज़ार बनती रहेगी।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान से पहले गाने का फैसला क्या है?
यह एक निर्देश या गाइडलाइन है जिसके तहत सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगान 'जन गण मन' से पहले राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' गाया जाए। BJP ने इसका समर्थन किया है जबकि विपक्षी दलों ने इसके संवैधानिक आधार पर सवाल उठाए हैं।
'वंदे मातरम' और 'जन गण मन' में संवैधानिक अंतर क्या है?
संविधान के अनुसार 'जन गण मन' भारत का राष्ट्रगान है, जबकि 'वंदे मातरम' को 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने राष्ट्रगीत का दर्जा दिया था। दोनों को समान सम्मान दिया जाता है, लेकिन राष्ट्रगान का स्थान संवैधानिक रूप से सर्वोपरि है।
मुस्लिम समुदाय 'वंदे मातरम' गाने पर आपत्ति क्यों जताता है?
NCP प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी के अनुसार, इस्लामिक धार्मिक मान्यता के तहत मुसलमान केवल एक ईश्वर की इबादत करते हैं और किसी अन्य के सामने सिर नहीं झुका सकते। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय 'वंदे मातरम' का सम्मान करता है और गायन न करने की बजाय मौन रहना उचित समझता है।
कांग्रेस ने इस फैसले पर क्या रुख अपनाया?
कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि दोनों गीत भारत की आत्मा हैं और हर नागरिक इनका सम्मान करता है। साथ ही उन्होंने माँग की कि यदि नई गाइडलाइन जारी की गई है तो उसका संवैधानिक और प्रशासनिक आधार स्पष्ट किया जाए।
क्या 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य है?
अभी तक कोई केंद्रीय कानून 'वंदे मातरम' गाना अनिवार्य नहीं बनाता। यह विवाद एक नई गाइडलाइन के संदर्भ में उठा है, जिसका विस्तृत कानूनी ढाँचा सरकार की ओर से अभी स्पष्ट नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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