'वंदे मातरम' पहले गाने के फैसले पर सियासत: भाजपा के मुनगंटीवार ने किया समर्थन, NCP-कांग्रेस ने उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने 11 जुलाई 2026 को राष्ट्रगान 'जन गण मन' से पहले 'वंदे मातरम' गाने के निर्णय का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह कोई नया प्रावधान नहीं है, बल्कि वर्षों से विभिन्न सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' का गायन होता आया है। इस फैसले पर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताते हुए इसे अल्पसंख्यक समुदाय पर थोपने की कोशिश बताया।
मुनगंटीवार का पक्ष: परंपरा का विस्तार
सुधीर मुनगंटीवार ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुसार 'जन गण मन' भारत का राष्ट्रगान है और वह सर्वोपरि है, जबकि संविधान-निर्माण के दौरान 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया था। उन्होंने कहा कि पहले कई आयोजनों में 'वंदे मातरम' का केवल एक अंश गाया जाता था, लेकिन अब इसे पूर्ण रूप से गाया जाना चाहिए।
मुनगंटीवार ने यह भी कहा कि कुछ विशेष धार्मिक समूहों द्वारा इसका विरोध होता रहा है, जबकि उनके अनुसार देश के लगभग 90 प्रतिशत लोग 'वंदे मातरम' का गायन करते हैं।
NCP (शरद पवार गुट) की आपत्ति
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने सरकार के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सरकार यह फैसला लोगों पर जबरन थोपना चाहती है। सिद्दीकी के अनुसार मुसलमान 'वंदे मातरम' नहीं गा सकते, क्योंकि उनकी धार्मिक मान्यता के अनुसार वे केवल एक ईश्वर की इबादत करते हैं और किसी अन्य के सामने सिर नहीं झुका सकते।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुस्लिम समुदाय 'वंदे मातरम' का सम्मान करता है, लेकिन उसका गायन करने के बजाय मौन रहना उचित समझता है।
कांग्रेस का संतुलित रुख
कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने इस मुद्दे पर अपेक्षाकृत संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि भारत का प्रत्येक नागरिक 'जन गण मन' और 'वंदे मातरम' दोनों का गहरा सम्मान करता है, और दोनों ही देशभक्ति की भावना से अभिन्न रूप से जुड़े हैं।
सिन्हा ने सवाल उठाया कि यदि कोई नई गाइडलाइन जारी की गई है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि राष्ट्रगान 'जन गण मन' को बाद में और 'वंदे मातरम' को पहले गाने का संवैधानिक या प्रशासनिक आधार क्या है। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों भारत की आत्मा हैं और दोनों के प्रति हर भारतीय के मन में समान सम्मान की भावना है।'
विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 'वंदे मातरम' को लेकर देश में समय-समय पर राजनीतिक बहस उठती रही है। यह गीत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित है और स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरणास्रोत रहा है। संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को इसे राष्ट्रगीत का दर्जा दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब देश में राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर राजनीतिक संवाद तेज हो रहा है।
आगे क्या
इस फैसले को लेकर संसद और राज्य विधानसभाओं में भी बहस छिड़ने की संभावना है। विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक विमर्श का केंद्र बना रहेगा।