11 जुलाई 2026
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'इग्नाइटिंग आइडियाज फोरम 2026': नई दिल्ली में शिक्षा, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण पर राष्ट्रीय विमर्श

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'इग्नाइटिंग आइडियाज फोरम 2026': नई दिल्ली में शिक्षा, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण पर राष्ट्रीय विमर्श

सारांश

नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में 'इग्नाइटिंग आइडियाज फोरम 2026' ने शिक्षा और नेतृत्व पर राष्ट्रीय बहस को नई धार दी। अशोक के. पांडे की पुस्तक 'इग्नाइटिंग ए बिलियन लैंप्स' के इर्द-गिर्द हुए इस विमर्श में विकसित भारत 2047 के लिए मूल्य-आधारित शिक्षा और स्कूलों में नेतृत्व विकास को केंद्रीय एजेंडा बनाने की पुरजोर वकालत की गई।

मुख्य बातें

11 जुलाई 2026 को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में 'इग्नाइटिंग आइडियाज फोरम 2026' का आयोजन किया गया।
पीतांबर पब्लिशिंग कंपनी ने शिक्षाविद् अशोक के.
पांडे की पुस्तक 'इग्नाइटिंग ए बिलियन लैंप्स' के प्रकाशन पर यह राष्ट्रीय संवाद आयोजित किया।
फोरम में 30 से 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें शिक्षाविद, नीति-निर्माता, शासन विशेषज्ञ और नागरिक समाज के सदस्य शामिल थे।
अमिताभ रंजन (पैन आईआईटी एलुमनाई इंडिया) ने कहा कि 2055 तक 65 लाख की कार्यशील आबादी को राष्ट्र-निर्माण के लिए तैयार करना अनिवार्य है।
मूल्य-आधारित शिक्षा, चरित्र निर्माण और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को केंद्रीय विमर्श का आधार बनाया गया।

नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में 11 जुलाई 2026 को आयोजित 'इग्नाइटिंग आइडियाज फोरम 2026' ने भारत में शिक्षा, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण पर एक गहन राष्ट्रीय संवाद को नई दिशा दी। यह आयोजन पीतांबर पब्लिशिंग कंपनी द्वारा शिक्षाविद् एवं लेखक अशोक के. पांडे की पुस्तक 'इग्नाइटिंग ए बिलियन लैंप्स' के प्रकाशन के अवसर पर किया गया। परंपरागत पुस्तक विमोचन की जगह इसे एक बौद्धिक विमर्श के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसमें देश के प्रमुख शिक्षाविद, नीति-निर्माता, शासन विशेषज्ञ और नागरिक समाज के प्रतिनिधि एकत्र हुए।

पुस्तक और उसका केंद्रीय संदेश

लेखक अशोक के. पांडे ने स्पष्ट किया कि 'इग्नाइटिंग ए बिलियन लैंप्स' कोई जीवनी नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक सार्वजनिक जीवन से प्राप्त शैक्षिक, संस्थागत और नेतृत्व संबंधी पाठों का विश्लेषण करने वाली एक चिंतनशील कृति है, जो भारत के युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने पर सार्थक चर्चाओं को प्रोत्साहित करती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस मंच की मूल जिज्ञासा यही थी कि नेतृत्व को पाठ्यक्रम का हिस्सा कैसे बनाया जाए और शिक्षण संस्थानों में छात्रों, अभिभावकों तथा शिक्षकों के बीच इस गुण को कैसे पोषित किया जाए।

मुख्य विमर्श: स्कूलों में नेतृत्व का विकास

फोरम का केंद्रीय प्रश्न था — 'भारत को भविष्य के लिए तैयार करने हेतु स्कूलों में किस प्रकार के नेतृत्व को बढ़ावा दिया जाए?' वक्ताओं ने मूल्य-आधारित शिक्षा, कक्षाओं में नवाचार, चरित्र निर्माण, आलोचनात्मक सोच और जिम्मेदार नागरिकता के विकास पर बल दिया। प्रतिभागियों का मत था कि शिक्षा को केवल अकादमिक उत्कृष्टता तक सीमित न रखकर, सत्यनिष्ठा, दृढ़ता और राष्ट्रीय जिम्मेदारी की भावना से युक्त नागरिकों के निर्माण का माध्यम बनाया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों की राय

पैन आईआईटी एलुमनाई इंडिया के उपाध्यक्ष डॉ. अमिताभ रंजन ने कहा कि इस पुस्तक में निष्काम कर्म, कर्मयोगी भाव और सामुदायिक विकास जैसे नेतृत्व के गुणों की विवेचना की गई है। उन्होंने जोर दिया कि स्कूली पाठ्यक्रम में ऐसे तत्व शामिल किए जाने चाहिए जो छात्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी कहा कि 2055 तक भारत की कार्यशील आबादी 65 लाख होगी, इसलिए युवाओं को राष्ट्र-निर्माण के लिए अभी से तैयार करना अनिवार्य है।

सेवानिवृत्त मेजर जनरल पी.के. सहगल ने इस आयोजन को 'उच्च कोटि का सेमिनार' बताते हुए कहा कि इसमें 30 से 50 ऐसे प्रतिभागी शामिल हुए जिनका राष्ट्र निर्माण और शिक्षा में असाधारण योगदान रहा है। उन्होंने पुस्तक को आम जनता, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।

यहूदा हयाम सिनेगॉग के सचिव डॉ. रब्बी ईजेकील इसहाक मालेकर ने मूल्य-आधारित शिक्षा की वकालत करते हुए कहा कि छात्रों का शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और भावनात्मक विकास शिक्षा का अनिवार्य अंग होना चाहिए। उनके अनुसार, शिक्षा एक ऐसा सशक्त माध्यम है जिससे समाज और विश्व को बदला जा सकता है।

आम जनता और शिक्षा तंत्र पर असर

फोरम ने शिक्षकों, नीति-निर्माताओं और संस्थानों के बीच सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया, ताकि तेजी से बदलते भारत की आकांक्षाओं के अनुरूप एक सशक्त शिक्षा प्रणाली खड़ी की जा सके। कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने भारत के शिक्षा तंत्र को मजबूत करने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

आगे की राह

इस फोरम ने यह स्थापित किया कि शिक्षा और नेतृत्व विकास की राष्ट्रीय बहस को नीतिगत ढाँचे से जोड़ना आज की प्राथमिकता है। 'इग्नाइटिंग ए बिलियन लैंप्स' के प्रकाशन को इस दिशा में एक सामयिक और विचारोत्तेजक योगदान के रूप में व्यापक रूप से सराहा गया। आने वाले समय में ऐसे विमर्शों की निरंतरता ही नीति-निर्माण को ज़मीनी यथार्थ से जोड़ सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या इस विमर्श की अनुशंसाएँ राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में परिलक्षित होंगी। भारत में स्कूली शिक्षा में नेतृत्व-विकास को पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात वर्षों से होती रही है, पर संस्थागत ढाँचे का अभाव इसे कागज़ी संकल्प बनाए रखता है। विकसित भारत 2047 का सपना तब पूरा होगा जब ऐसे विमर्श कक्षाओं तक पहुँचें।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'इग्नाइटिंग आइडियाज फोरम 2026' क्या था?
यह 11 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक राष्ट्रीय बौद्धिक संवाद था, जिसे पीतांबर पब्लिशिंग कंपनी ने अशोक के. पांडे की पुस्तक 'इग्नाइटिंग ए बिलियन लैंप्स' के प्रकाशन के उपलक्ष्य में आयोजित किया। इसमें शिक्षा, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण पर गहन चर्चा हुई।
'इग्नाइटिंग ए बिलियन लैंप्स' पुस्तक किस बारे में है?
यह पुस्तक लेखक अशोक के. पांडे द्वारा लिखी गई एक चिंतनशील कृति है, जो सार्वजनिक जीवन से प्राप्त शैक्षिक, संस्थागत और नेतृत्व संबंधी पाठों का विश्लेषण करती है। लेखक के अनुसार यह जीवनी नहीं, बल्कि भारत के युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने पर सार्थक चर्चा को प्रोत्साहित करने वाली कृति है।
फोरम में किन विषयों पर चर्चा हुई?
फोरम का केंद्रीय प्रश्न था कि भारत के स्कूलों में किस प्रकार के नेतृत्व को बढ़ावा दिया जाए। चर्चा में मूल्य-आधारित शिक्षा, चरित्र निर्माण, आलोचनात्मक सोच, नवाचार और जिम्मेदार नागरिकता के विकास पर बल दिया गया।
इस फोरम में कौन-कौन से विशेषज्ञ शामिल हुए?
फोरम में पैन आईआईटी एलुमनाई इंडिया के उपाध्यक्ष डॉ. अमिताभ रंजन, सेवानिवृत्त मेजर जनरल पी.के. सहगल, और यहूदा हयाम सिनेगॉग के सचिव डॉ. रब्बी ईजेकील इसहाक मालेकर सहित 30 से 50 प्रतिभागी शामिल हुए।
विकसित भारत 2047 से इस फोरम का क्या संबंध है?
फोरम में प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में शिक्षा की निर्णायक भूमिका है। डॉ. अमिताभ रंजन ने कहा कि 2055 तक 65 लाख की कार्यशील आबादी को राष्ट्र-निर्माण के लिए अभी से तैयार करना आवश्यक है।
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