क्या राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारत के शिक्षण परिदृश्य को बदल रही है?
सारांश
Key Takeaways
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य शिक्षा को बहुविषयक बनाना है।
- शिक्षा समाज को अज्ञानता से मुक्त करती है।
- युवाओं को नवाचार और उद्यमिता के लिए प्रेरित किया गया है।
- शैक्षणिक संस्थान राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- उद्यमिता और रोजगार सृजन पर जोर दिया गया है।
नई दिल्ली, 30 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने मंगलवार को तिरुवनंतपुरम स्थित मार इवानियोस कॉलेज के प्लेटिनम जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया, जिसका शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में संस्थान के 75 वर्षों का योगदान रहा है।
उपराष्ट्रपति ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मार इवानियोस कॉलेज जैसे संस्थान शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति का उदाहरण हैं, जो न केवल ज्ञान प्रदान करती है बल्कि समाज को अज्ञानता और असमानता से भी मुक्त करती है।
उन्होंने कहा कि जब शैक्षणिक और आध्यात्मिक संस्थान संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप होते हैं, तो वे राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत इतिहास के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहां विश्व नेतृत्व और नवाचार के लिए भारत की ओर देख रहा है। उन्होंने युवाओं से न केवल अपने संवैधानिक अधिकारों बल्कि विविधता के प्रति सम्मान, वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय एकता के प्रति प्रतिबद्धता सहित अपने मौलिक कर्तव्यों का पालन करने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित 'विकसित भारत-2047' के राष्ट्रीय दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि युवा भविष्य की प्रतीक्षा नहीं कर रहे हैं, बल्कि सक्रिय रूप से उसे आकार दे रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक विकसित भारत का निर्माण केवल सत्ता के गलियारों में ही नहीं, बल्कि कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, खेतों, कारखानों, स्टार्टअप्स और गांवों में युवा भारतीयों की ऊर्जा और आकांक्षाओं से होगा।
आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को प्राप्त करने में शिक्षा की भूमिका पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 रटने की पद्धति से दूर हटकर बहुविषयक शिक्षा, आलोचनात्मक सोच, नवाचार और रचनात्मकता की ओर एक परिवर्तनकारी बदलाव का प्रतीक है।
भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि शैक्षणिक परिसरों को नवाचार और उद्यमिता के केंद्र के रूप में विकसित होना चाहिए। उन्होंने छात्रों से न केवल रोजगार प्राप्त करने बल्कि रोजगार सृजित करने और सामाजिक चुनौतियों के स्वदेशी समाधान विकसित करने का भी आग्रह किया।
उपराष्ट्रपति ने युवाओं से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन और प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने का आह्वान करते हुए, नैतिकता, संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक भलाई के प्रति चिंता से निर्देशित होकर प्रौद्योगिकी का जिम्मेदारी से उपयोग करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि राज्य की उपलब्धियां शिक्षा के माध्यम से युवाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध यहां के लोगों और संस्थानों के सामूहिक प्रयासों को दर्शाती हैं।
केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, केरल के मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन, केरल के मंत्री एमबी राजेश, सांसद डॉ. शशि थरूर, तिरुवनंतपुरम नगर निगम के महापौर वीवी राजेश, त्रिवेंद्रम के मेजर आर्कबिशप-कैथोलिकोस और मार इवानियोस कॉलेज के संरक्षक, परम पूज्य बेसेलियोस कार्डिनल क्लेमिस और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।