शिवाजी परशुराम ने ओर्डोस में 10,000 मीटर में रजत जीता, एशियन अंडर-23 में दो पदक किए नाम
सारांश
मुख्य बातें
भारत के लंबी दूरी के धावक शिवाजी परशुराम ने 12 जुलाई 2025 को चीन के ओर्डोस में आयोजित एशियन अंडर-23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप के पहले संस्करण के अंतिम दिन पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में रजत पदक जीता। उन्होंने 29:33.54 का समय निकाला, जो उनका निजी श्रेष्ठ प्रदर्शन है। इसी चैंपियनशिप में वे पहले दिन 5,000 मीटर में भी रजत पदक जीत चुके थे, जिससे यह उनका इस टूर्नामेंट में दूसरा पदक बन गया।
10,000 मीटर रेस का घटनाक्रम
जापान के योशीहिरो कुसुओका ने 29:29.34 के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि चीन के जिन्झी जियांग 29:42.54 के समय के साथ कांस्य पदक पर रहे। 25 लैप की इस कठिन रेस में दूसरे भारतीय प्रतिभागी शैलेश कुशवाहा 30:46.78 के समय के साथ चौथे स्थान पर रहे और पदक से चूक गए।
प्रिया और श्रावणी ने दिलाए कांस्य पदक
डिस्कस थ्रोअर प्रिया ने महिलाओं की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में अपनी तीसरी कोशिश में 50.44 मीटर का थ्रो कर कांस्य पदक हासिल किया। इस स्पर्धा में चीन ने शीर्ष दो स्थान अपने नाम किए — झिचाओ जियांग ने 58.63 मीटर के साथ स्वर्ण और जिंगरू हुआंग ने 55.33 मीटर के साथ रजत जीता।
महिलाओं की 400 मीटर हर्डल्स में श्रावणी सचिन सांगले ने 58.09 सेकंड का समय निकालकर कांस्य पदक जीता। ताइपे की सिन जू चुंग ने 57.41 सेकंड के साथ स्वर्ण और उज्बेकिस्तान की नूरखोन ओचिलोवा ने 57.99 सेकंड के साथ रजत पदक जीता।
अन्य भारतीय एथलीटों का प्रदर्शन
महिलाओं की 100 मीटर हर्डल्स में श्रेया राजेश 13.49 सेकंड के साथ चौथे और सबिता टोप्पो 13.73 सेकंड के साथ छठे स्थान पर रहीं। लंबी कूद में मोहम्मद अत्ता साजिद 7.72 मीटर की छलांग के साथ पाँचवें स्थान पर रहे।
महिलाओं की शॉट पुट में अनुप्रिया वीएस 14.97 मीटर के प्रयास के साथ चौथे स्थान पर रहीं और पदक से चूक गईं। पुरुषों की 400 मीटर में आस्तिक प्रधान 46.33 सेकंड के साथ पाँचवें और सेतु मिश्रा 47.26 सेकंड के साथ सातवें स्थान पर रहे।
एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की प्रतिक्रिया
एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) ने पुष्टि की कि परशुराम का यह 10,000 मीटर रजत पदक इस चैंपियनशिप में उनका दूसरा पदक है। गौरतलब है कि यह एशियन अंडर-23 एथलेटिक्स चैंपियनशिप का पहला ही संस्करण था, जो भारतीय युवा एथलीटों के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच साबित हुआ। आगे की राष्ट्रीय और एशियाई स्तर की प्रतियोगिताओं में परशुराम के प्रदर्शन पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।