11 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पीएमएफएमई योजना के 2 लाख लाभार्थी पूरे, ₹20,300 करोड़ से ज़्यादा का निवेश जुटा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पीएमएफएमई योजना के 2 लाख लाभार्थी पूरे, ₹20,300 करोड़ से ज़्यादा का निवेश जुटा

सारांश

पीएमएफएमई योजना ने 2 लाख ऋण स्वीकृतियों का आँकड़ा पार किया, ₹20,300 करोड़ से अधिक का निवेश जुटाया और 11 लाख रोज़गार सृजित किए — जिनमें 44% महिला उद्यमी और 90% पहली पीढ़ी के कारोबारी हैं।

मुख्य बातें

पीएमएफएमई योजना के तहत 2 लाख से अधिक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को ऋण स्वीकृत किए गए।
योजना ने ₹20,300 करोड़ से अधिक का परियोजना निवेश आकर्षित किया और लगभग 11 लाख प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित किए।
लाभार्थियों में 90% पहली पीढ़ी के उद्यमी और 44% महिला उद्यमी हैं।
75,000 से अधिक उद्यम जीएसटी, एफएसएसएआई और उद्यम पंजीकरण के ज़रिए औपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल हुए।
27 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 80 कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर स्वीकृत, जिनमें से 32 चालू हो चुके हैं।
1.76 लाख लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें 77% महिलाएँ हैं।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (पीएमएफएमई) के तहत 2 लाख से अधिक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं — यह जानकारी केंद्र सरकार ने 11 जुलाई 2026 को दी। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने इस अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बताया कि इस उपलब्धि के साथ योजना ने ₹20,300 करोड़ से अधिक का परियोजना निवेश भी आकर्षित किया है।

योजना की प्रमुख उपलब्धियाँ

मंत्री पासवान ने बताया कि लाभार्थियों में लगभग 90 प्रतिशत पहली पीढ़ी के उद्यमी हैं, जबकि 44 प्रतिशत महिला उद्यमी हैं। उन्होंने महिला भागीदारी को 'महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की सच्ची भावना और विकसित भारत की आधारशिला' बताया। इसके अलावा, पीएमएफएमई से लाभान्वित 75,000 से अधिक उद्यम उद्यम आधार, उद्यम असिस्ट, एफएसएसएआई और जीएसटी जैसे पंजीकरण माध्यमों से औपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल हो चुके हैं।

रोज़गार और प्रशिक्षण का असर

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, इस योजना ने लगभग 11 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर सृजित किए हैं। अब तक 1.76 लाख से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें से 77 प्रतिशत महिलाएँ हैं। 'सीड कैपिटल' सहायता के अंतर्गत 4.18 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सदस्यों को मदद मिली है।

इन्क्यूबेशन और जागरूकता का विस्तार

मंत्रालय के अंतर्गत 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 80 कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 32 पहले से संचालित हो रहे हैं। एमओएफपीआई के संयुक्त सचिव देवेश देवल ने एक देशव्यापी मल्टीमीडिया जागरूकता अभियान शुरू करने की घोषणा की। देवल ने कहा, 'पीएमएफएमई सिर्फ उद्यमों की मदद नहीं कर रही है, बल्कि यह लोगों की आजीविका बदल रही है, स्थानीय वैल्यू चेन को मजबूत कर रही है और पूरे देश में टिकाऊ रोज़गार के अवसर पैदा कर रही है।'

ओडीओपी और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा

योजना की 'एक जिला एक उत्पाद' (ओडीओपी) रणनीति के तहत लगभग 200 उत्पादों वाले 40 कॉमन ब्रांड को समर्थन दिया जा रहा है। पीएमएफएमई मखाना, मोटे अनाज (मिलेट्स), मसाले और जीआई-टैग प्राप्त उत्पादों के इर्द-गिर्द स्थानीय वैल्यू चेन विकसित कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार असंगठित खाद्य क्षेत्र को औपचारिक अर्थव्यवस्था में लाने पर ज़ोर दे रही है।

आगे की राह

गौरतलब है कि पीएमएफएमई योजना वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, हैंडहोल्डिंग, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और बाज़ार से जोड़ने तक का एकीकृत समर्थन सूक्ष्म उद्यमियों को प्रदान करती है। देशव्यापी जागरूकता अभियान के साथ आने वाले महीनों में योजना की पहुँच और विस्तृत होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि इनमें से कितने उद्यम तीन-पाँच साल बाद भी टिके रहते हैं — सरकारी योजनाओं में एनपीए और बंद इकाइयों का इतिहास इस सवाल को अनदेखा नहीं करने देता। 44% महिला भागीदारी उत्साहजनक है, लेकिन 'सीड कैपिटल' से आगे बाज़ार तक पहुँच और मूल्य श्रृंखला में उनकी स्थायी हिस्सेदारी का कोई स्वतंत्र आकलन सार्वजनिक नहीं है। 75,000 उद्यमों का औपचारिकीकरण असंगठित क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है, पर यह कुल 2 लाख का मात्र 37.5% है — शेष की स्थिति स्पष्ट नहीं। देशव्यापी जागरूकता अभियान की घोषणा तभी सार्थक होगी जब ज़मीनी क्रियान्वयन की निगरानी के लिए पारदर्शी तंत्र भी साथ हो।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएमएफएमई योजना क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
पीएमएफएमई यानी 'प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना' केंद्र सरकार की एक योजना है, जो सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों को ऋण, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग और बाज़ार से जोड़ने की एकीकृत सहायता देती है। इसका मुख्य उद्देश्य असंगठित खाद्य क्षेत्र को औपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल करना है।
पीएमएफएमई योजना के तहत अब तक कितने लाभार्थियों को ऋण मिला है?
11 जुलाई 2026 तक पीएमएफएमई योजना के तहत 2 लाख से अधिक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। इस उपलब्धि के साथ योजना ने ₹20,300 करोड़ से अधिक का परियोजना निवेश भी आकर्षित किया है।
पीएमएफएमई योजना से महिला उद्यमियों को कितना फायदा हुआ है?
योजना के कुल लाभार्थियों में 44 प्रतिशत महिला उद्यमी हैं। इसके अलावा, प्रशिक्षण पाने वाले 1.76 लाख से अधिक लाभार्थियों में 77 प्रतिशत महिलाएँ हैं, और 4.18 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह सदस्यों को सीड कैपिटल सहायता दी गई है।
पीएमएफएमई के तहत कितने रोज़गार सृजित हुए हैं?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, पीएमएफएमई योजना ने लगभग 11 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर पैदा किए हैं। योजना के ज़रिए 75,000 से अधिक उद्यम औपचारिक अर्थव्यवस्था में भी शामिल हुए हैं।
पीएमएफएमई का 'एक जिला एक उत्पाद' दृष्टिकोण क्या है?
ओडीओपी यानी 'एक जिला एक उत्पाद' के तहत पीएमएफएमई लगभग 200 उत्पादों वाले 40 कॉमन ब्रांड को समर्थन दे रही है। इसके ज़रिए मखाना, मिलेट्स, मसाले और जीआई-टैग प्राप्त उत्पादों के इर्द-गिर्द स्थानीय वैल्यू चेन विकसित की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 2 दिन पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले