पीएमएफएमई योजना ने पार किया 2 लाख ऋण का आँकड़ा, चिराग पासवान ने बताई ऐतिहासिक उपलब्धि
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने 11 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में एक विशेष समारोह की अध्यक्षता की, जिसमें प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिककरण (PMFME) योजना के अंतर्गत 2 लाख से अधिक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को ऋण स्वीकृति की ऐतिहासिक उपलब्धि का उत्सव मनाया गया। इस योजना ने अब तक ₹20,300 करोड़ से अधिक के परियोजना निवेश को प्रोत्साहित किया है और लगभग 11 लाख प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोज़गार अवसर सृजित किए हैं।
योजना की प्रमुख उपलब्धियाँ
PMFME योजना के आँकड़े कई मायनों में उल्लेखनीय हैं। कुल लाभार्थियों में से लगभग 90 प्रतिशत पहली पीढ़ी के उद्यमी हैं, जो पहले कभी औपचारिक वित्तीय तंत्र से नहीं जुड़े थे। इनमें 44 प्रतिशत महिला उद्यमी हैं, जो ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में महिला नेतृत्व की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
इसके अतिरिक्त, 75,000 से अधिक PMFME-समर्थित उद्यम उद्यम आधार, उद्यम असिस्ट, FSSAI और GST जैसे पंजीकरणों के माध्यम से औपचारिक अर्थव्यवस्था में प्रवेश कर चुके हैं — जो असंगठित क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक ठोस कदम है।
मंत्री चिराग पासवान का संबोधन
समारोह को संबोधित करते हुए चिराग पासवान ने कहा कि '2 लाख लाभार्थियों की यह उपलब्धि यह सिद्ध करती है कि यह परिकल्पना पूरे देश में मापने योग्य परिणामों में तब्दील हो रही है।' उन्होंने 44 प्रतिशत महिला उद्यमियों की भागीदारी को 'महिला नेतृत्व वाले विकास की सच्ची भावना और विकसित भारत की आधारशिला' बताया।
पासवान ने बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश सहित अग्रणी राज्यों के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने राज्य सरकारों, जिला प्रशासनों और ज़मीनी स्तर के अधिकारियों को 'एक राष्ट्रीय नीति को उद्यम विकास के लिए ज़मीनी आंदोलन में बदलने' के लिए धन्यवाद दिया।
कोविड-19 संकट और योजना की पृष्ठभूमि
पासवान ने इस योजना की उत्पत्ति का संदर्भ देते हुए 2020 के उस दौर को याद किया जब पूरी दुनिया कोविड-19 महामारी से जूझ रही थी। उन्होंने कहा कि उस समय उनके पिता, स्वर्गीय राम विलास पासवान, केंद्रीय कैबिनेट का हिस्सा थे और इन योजनाओं पर विचार-विमर्श हो रहा था।
उन्होंने कहा, 'हमें यह सुनिश्चित करना था कि अगर ऐसी चुनौतियाँ फिर से सामने आएँ, तो हमें किसी और पर निर्भर न रहना पड़े।' उन्होंने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का भी उल्लेख किया, जिसके तहत देश भर में लगभग 80 करोड़ लोगों को मुफ़्त अनाज प्रदान किया गया।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
पासवान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं से जॉब सीकर नहीं, बल्कि जॉब क्रिएटर बनने का आह्वान किया था और PMFME योजना उसी संकल्प को धरातल पर उतार रही है। छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को ऋण, तकनीक, प्रशिक्षण और बाज़ार से जोड़कर उन्हें सशक्त उद्यम बनने का अवसर मिल रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब सरकार खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को GDP में बड़ा योगदानकर्ता बनाने की दिशा में काम कर रही है। आने वाले चरण में इस नींव पर खाद्य प्रसंस्करण विकास की अगली कहानी लिखी जाएगी।