11 जुलाई 2026
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कोलकाता में मेडिकल वीजा की आड़ में चोरी के फोन-लैपटॉप तस्करी: बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार

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कोलकाता में मेडिकल वीजा की आड़ में चोरी के फोन-लैपटॉप तस्करी: बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार

सारांश

मेडिकल वीजा महज इलाज के लिए नहीं — जांचकर्ताओं के अनुसार यह एक तस्करी नेटवर्क की आड़ थी। कोलकाता से ढाका तक चोरी के आईफोन और लैपटॉप पहुँचाने वाले बांग्लादेशी नागरिक 'डॉलर' की गिरफ्तारी ने सीमा पार इलेक्ट्रॉनिक्स तस्करी के एक संगठित सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है।

मुख्य बातें

कोलकाता पुलिस ने 11 जुलाई को बांग्लादेशी नागरिक सैयद मोहम्मद सलाउद्दीन उर्फ डॉलर को गिरफ्तार किया।
आरोपी पर मेडिकल वीजा की आड़ में भारत में प्रवेश कर चोरी के मोबाइल फोन और लैपटॉप बांग्लादेश तस्करी करने का आरोप है।
जांचकर्ताओं के अनुसार उसने फर्जी मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन के ज़रिए कई बार भारत में प्रवेश किया।
गिरफ्तारी कोलकाता के न्यू मार्केट इलाके में जाल बिछाकर की गई; हरिदेवपुर स्थित किराए के घर से कई मोबाइल फोन बरामद।
मामला सेंट्रल एवेन्यू पर हुई एक स्नैचिंग और स्थानीय चोर मोहम्मद अरबाज उर्फ विक्की की गिरफ्तारी के बाद सामने आया।
पुलिस सीमा पार नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान के लिए पूछताछ जारी रखे हुए है।

कोलकाता पुलिस ने शनिवार, 11 जुलाई को बांग्लादेश के एक नागरिक को गिरफ्तार किया, जिस पर आरोप है कि वह मेडिकल वीजा की आड़ में भारत में प्रवेश कर कोलकाता से ढाका तक चोरी के मोबाइल फोन और लैपटॉप की तस्करी करने वाले एक क्रॉस-बॉर्डर सिंडिकेट का संचालन करता था। यह मामला उस समय सामने आया जब एक साधारण स्नैचिंग की जांच ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया।

आरोपी की पहचान और पृष्ठभूमि

गिरफ्तार आरोपी की पहचान सैयद मोहम्मद सलाउद्दीन उर्फ डॉलर के रूप में हुई है, जो ढाका के मामूदपुर का निवासी है। बांग्लादेश में वह खुद को इंपोर्ट-एक्सपोर्ट का व्यवसायी बताता था। पुलिस के अनुसार उसके पासपोर्ट और मेडिकल वीजा दस्तावेज़ वैध थे और यात्रा कागजात में किसी प्रकार की कोई अनियमितता नहीं पाई गई।

हालांकि, जांचकर्ताओं का आरोप है कि दिल या किडनी की कोई बीमारी न होने के बावजूद, डॉलर ने एक बांग्लादेशी डॉक्टर के फर्जी मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन का इस्तेमाल करके कई बार भारत में प्रवेश किया। भारत आने पर वह एक दलाल के माध्यम से कोलकाता के दक्षिणी बाहरी इलाके हरिदेवपुर में किराए का घर लेता था और कथित तौर पर शहर भर के मोबाइल चोरों तथा चोरी का सामान रखने वालों से संपर्क बनाता था।

तस्करी का तरीका

जांचकर्ताओं के मुताबिक, डॉलर मुख्य रूप से चोरी के आईफोन और अन्य महंगे स्मार्टफोन बेहद कम कीमत पर खरीदकर स्टॉक जमा करता था। इसके अलावा उसने चोरी के लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी खरीदे। पुलिस का आरोप है कि इन डिवाइसों को बाद में बांग्लादेश तस्करी कर भेजा जाता था, जहाँ ढाका में सक्रिय चोरी के इलेक्ट्रॉनिक्स नेटवर्क के ज़रिए उन्हें ऊँची कीमतों पर बेचा जाता था।

जांच की शुरुआत कैसे हुई

मामला तब सामने आया जब कोलकाता के सेंट्रल एवेन्यू पर एक युवक की जेब से आईफोन समेत दो मोबाइल फोन कथित तौर पर चुरा लिए गए। पीड़ित की शिकायत पर बोबाजार पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। जांचकर्ताओं ने सीसीटीवी फुटेज की जांच की और संदिग्ध की पहचान मोहम्मद अरबाज उर्फ विक्की के रूप में करते हुए उसे गिरफ्तार किया।

पूछताछ के दौरान विक्की ने पुलिस को बताया कि उसने चोरी के फोन 'डॉलर' नामक एक खरीदार को बेचे थे। इस सुराग पर कार्रवाई करते हुए डिटेक्टिव्स ने संदिग्ध का पता लगाना शुरू किया।

गिरफ्तारी और बरामदगी

जांच में मिली जानकारी के आधार पर डिटेक्टिव्स ने कोलकाता के न्यू मार्केट इलाके में जाल बिछाया। डॉलर को उस समय गिरफ्तार किया गया जब वह कथित तौर पर चोरी के मोबाइल फोन की एक नई खेप लेने पहुँचा था। इसके बाद हरिदेवपुर में उसके किराए के घर की तलाशी में कई मोबाइल फोन बरामद किए गए।

आगे की जांच

पुलिस ने बताया कि वे सीमा पार तस्करी नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान के लिए आरोपी से पूछताछ कर रही है। यह मामला इस बात का संकेत है कि मेडिकल वीजा व्यवस्था का दुरुपयोग सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक गंभीर चुनौती बन रहा है। आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और नामों के सामने आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसका संगठित अपराध नेटवर्क व्यवस्थित रूप से दोहन कर रहे हैं। फर्जी प्रिस्क्रिप्शन के ज़रिए बार-बार प्रवेश और हरिदेवपुर में स्थायी ठिकाना यह दर्शाता है कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ऑपरेशन था। सवाल यह है कि सीमा पर वीजा सत्यापन तंत्र इतने लंबे समय तक इसे क्यों नहीं पकड़ पाया — और क्या ढाका में सक्रिय इस नेटवर्क के तार और भी गहरे हैं, जिनकी जांच अभी बाकी है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता में गिरफ्तार बांग्लादेशी 'डॉलर' पर क्या आरोप हैं?
सैयद मोहम्मद सलाउद्दीन उर्फ डॉलर पर आरोप है कि वह मेडिकल वीजा की आड़ में भारत में प्रवेश कर कोलकाता से चोरी के मोबाइल फोन और लैपटॉप बांग्लादेश तस्करी करता था। पुलिस के अनुसार वह ढाका में सक्रिय एक इलेक्ट्रॉनिक्स तस्करी नेटवर्क का हिस्सा था।
कोलकाता पुलिस को इस तस्करी नेटवर्क का पता कैसे चला?
जांच की शुरुआत कोलकाता के सेंट्रल एवेन्यू पर हुई एक स्नैचिंग की घटना से हुई। सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद स्थानीय चोर मोहम्मद अरबाज उर्फ विक्की को गिरफ्तार किया गया, जिसने पूछताछ में 'डॉलर' का नाम लिया और इस तरह बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ।
क्या आरोपी का मेडिकल वीजा असली था?
पुलिस के अनुसार आरोपी के पासपोर्ट और मेडिकल वीजा दस्तावेज़ वैध थे। हालांकि, जांचकर्ताओं का आरोप है कि उसने दिल या किडनी की कोई वास्तविक बीमारी न होने के बावजूद एक बांग्लादेशी डॉक्टर के फर्जी प्रिस्क्रिप्शन का उपयोग कर कई बार भारत में प्रवेश किया।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने क्या बरामद किया?
आरोपी को कोलकाता के न्यू मार्केट इलाके में जाल बिछाकर गिरफ्तार किया गया। इसके बाद हरिदेवपुर में उसके किराए के घर की तलाशी में कई मोबाइल फोन बरामद किए गए।
इस मामले में आगे क्या होगा?
पुलिस सीमा पार तस्करी नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान के लिए आरोपी से पूछताछ जारी रखे हुए है। मामले से जुड़ी आगे की जांच चल रही है और नेटवर्क के और सदस्यों के सामने आने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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