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लोक संवर्धन पर्व देहरादून: रिजिजू बोले — मोदी सरकार बिना भेदभाव हर नागरिक की सेवा में समर्पित

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लोक संवर्धन पर्व देहरादून: रिजिजू बोले — मोदी सरकार बिना भेदभाव हर नागरिक की सेवा में समर्पित

सारांश

देहरादून के परेड ग्राउंड में छठे लोक संवर्धन पर्व के उद्घाटन पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 'सबका साथ, सबका विकास' के संदेश को दोहराया और कहा कि यह उत्सव केवल अल्पसंख्यकों का नहीं, बल्कि समस्त भारतीयों की सांस्कृतिक विरासत और आजीविका का उत्सव है।

मुख्य बातें

किरेन रिजिजू ने 11 जुलाई 2026 को देहरादून में छठे लोक संवर्धन पर्व का उद्घाटन किया।
पाँच दिवसीय उत्सव में 150 से अधिक हस्तशिल्प, खाद्य स्टॉल और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ शामिल हैं।
यह पीएम विकास योजना के तहत उत्तराखंड सरकार के सहयोग से आयोजित पहला लोक संवर्धन पर्व है।
रिजिजू ने कहा कि मोदी सरकार धर्म या समुदाय का भेद किए बिना हर नागरिक के साथ समान व्यवहार करती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ परामर्श के बाद रिजिजू मानसून पश्चात उत्तराखंड के आंतरिक क्षेत्रों का दौरा करेंगे।

केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने 11 जुलाई 2026 को देहरादून के परेड ग्राउंड में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' के सिद्धांत पर चलते हुए धर्म या समुदाय का भेद किए बिना प्रत्येक नागरिक के सर्वांगीण विकास के लिए काम कर रही है। रिजिजू छठे लोक संवर्धन पर्व के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे, जो पीएम विकास योजना के तहत उत्तराखंड सरकार के सहयोग से आयोजित पहला ऐसा आयोजन है।

महोत्सव का स्वरूप और महत्त्व

पाँच दिवसीय इस उत्सव में 150 से अधिक हस्तशिल्प और खाद्य स्टॉल, लाइव शिल्प प्रदर्शन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ शामिल हैं। रिजिजू ने कहा, 'यह महोत्सव कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों और उद्यमियों के लिए अपनी प्रतिभा, पारंपरिक शिल्प कौशल और उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच के रूप में उभरा है।' इस आयोजन में देश भर के हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, पारंपरिक शिल्प और क्षेत्रीय व्यंजनों की विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की गई है।

सरकार की समावेशी नीति पर ज़ोर

रिजिजू ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार नागरिकों को धर्म के चश्मे से नहीं देखती और हर व्यक्ति के साथ समान व्यवहार करती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि लोक संवर्धन पर्व केवल अल्पसंख्यक समुदायों का उत्सव नहीं, बल्कि समस्त भारतीयों का साझा जश्न है — जो देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ स्थायी आजीविका के नए अवसर सृजित करने के लिए समर्पित है। इस महोत्सव का आयोजन अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय द्वारा उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम के सहयोग से किया जा रहा है।

'वोकल फॉर लोकल' और स्वदेशी उत्पादों का आह्वान

प्रधानमंत्री मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' विजन का उल्लेख करते हुए रिजिजू ने नागरिकों से स्वदेशी उत्पादों को खरीदने और बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा, 'एक समय था जब आयातित वस्तुओं को प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था। आज लोग गर्व से 'मेड इन इंडिया' उत्पादों को चुनते और बढ़ावा देते हैं। लोक संवर्धन पर्व इसी बदलती सोच का प्रतिबिंब है, जो हमारी समृद्ध विरासत का जश्न मनाते हुए देश भर के कारीगरों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर पैदा करता है।'

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की उपस्थिति और भविष्य की योजनाएँ

उद्घाटन समारोह में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे। रिजिजू ने घोषणा की कि मानसून के बाद वह मुख्यमंत्री धामी से परामर्श कर उत्तराखंड के आंतरिक क्षेत्रों का दौरा करेंगे। मंत्री ने यह भी कहा कि उनका मंत्रालय शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता और बाज़ार तक पहुँच के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। गौरतलब है कि देवभूमि उत्तराखंड में यह पहली बार है जब इस पर्व का आयोजन पीएम विकास योजना के साझेदारी ढाँचे के तहत किया जा रहा है, जो राज्य और केंद्र के बीच सांस्कृतिक-आर्थिक सहयोग की नई मिसाल बनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

नीतिगत दावा कम और राजनीतिक पुनर्स्थापन अधिक लगता है। असली कसौटी यह है कि पीएम विकास योजना के तहत लाभ वास्तव में किन समुदायों तक और किस अनुपात में पहुँच रहा है — जिसके स्वतंत्र आँकड़े अभी तक सार्वजनिक नहीं हुए हैं। 'वोकल फॉर लोकल' का नारा कारीगरों की आय में वास्तविक वृद्धि में कितना तब्दील हुआ, यह सवाल महोत्सव की चमक-दमक से परे जाकर पूछा जाना चाहिए।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोक संवर्धन पर्व क्या है और इसका आयोजन कहाँ हो रहा है?
लोक संवर्धन पर्व अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय द्वारा आयोजित एक राष्ट्रीय सांस्कृतिक-आर्थिक उत्सव है, जिसमें देश भर के कारीगर, बुनकर और शिल्पकार अपने उत्पाद प्रदर्शित करते हैं। इस बार इसका छठा संस्करण देहरादून के परेड ग्राउंड में 11 जुलाई 2026 से पाँच दिनों के लिए आयोजित किया जा रहा है।
किरेन रिजिजू ने मोदी सरकार की किस नीति पर ज़ोर दिया?
रिजिजू ने कहा कि मोदी सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' की भावना से काम करती है और धर्म या समुदाय के आधार पर कोई भेदभाव नहीं करती। उन्होंने यह भी कहा कि लोक संवर्धन पर्व केवल अल्पसंख्यकों का नहीं, बल्कि समस्त भारतीयों का उत्सव है।
पीएम विकास योजना और इस आयोजन का क्या संबंध है?
यह देहरादून में पीएम विकास योजना के तहत उत्तराखंड सरकार के सहयोग से आयोजित पहला लोक संवर्धन पर्व है। यह योजना अल्पसंख्यक समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए शिक्षा, कौशल विकास और बाज़ार तक पहुँच पर केंद्रित है।
इस महोत्सव में क्या-क्या देखने को मिलेगा?
पाँच दिवसीय उत्सव में 150 से अधिक हस्तशिल्प और खाद्य स्टॉल, लाइव शिल्प प्रदर्शन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ शामिल हैं। देश भर के हथकरघा उत्पाद, पारंपरिक शिल्प और क्षेत्रीय व्यंजन भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं।
रिजिजू का उत्तराखंड के आंतरिक क्षेत्रों के दौरे को लेकर क्या कहना है?
रिजिजू ने कहा कि मानसून के बाद वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से परामर्श करके उत्तराखंड के आंतरिक क्षेत्रों का दौरा करेंगे। यह दौरा राज्य के दूरदराज के इलाकों में केंद्रीय योजनाओं की पहुँच की समीक्षा के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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