उमर अब्दुल्ला पर BJP का पलटवार: सुधांशु त्रिवेदी बोले — सबूत दें या माफी माँगें
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने 11 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) पर तीखा हमला बोला। त्रिवेदी ने अब्दुल्ला के उस बयान को 'गैरज़िम्मेदाराना और निंदनीय' करार दिया, जिसमें मुख्यमंत्री ने BJP पर अपने विधायकों को तोड़ने की साजिश का आरोप लगाया था।
BJP का पलटवार: क्या कहा त्रिवेदी ने
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, 'बिना कोई सबूत पेश किए उन्होंने बेबुनियाद आरोप लगाने की कोशिश की है कि BJP विधायकों को उनकी पार्टी से अलग करने की कोशिश कर रही है।' उन्होंने इन आरोपों को 'प्रशासनिक अक्षमता, अयोग्यता और कुशासन जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास' बताया।
त्रिवेदी ने माँग की कि मुख्यमंत्री या तो अपने दावों के समर्थन में ठोस सबूत पेश करें, या फिर सार्वजनिक रूप से माफी माँगें। उन्होंने कहा, 'संवैधानिक पद पर बैठकर आप अपने कर्तव्य का निर्वहन करिए और जनता की सेवा करिए, बजाय इसके कि अपनी अक्षमता पर पर्दा डालने के लिए इस प्रकार के आरोप लगाएं।'
उमर अब्दुल्ला के मूल आरोप
इससे पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को दावा किया था कि उनकी सरकार को अस्थिर करने के उद्देश्य से जम्मू से पार्टी के एक विधायक को ₹20-30 करोड़, मंत्री पद और राज्य का दर्जा देने का वादा किया गया। अब्दुल्ला ने कहा था, 'जब पैसों और मंत्री पदों की पेशकश नाकाम रही, तो अब हमारे विधायकों को लुभाने के लिए बंद दरवाजों के पीछे से कोशिशें की जा रही हैं।'
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि BJP परोक्ष रूप से जम्मू-कश्मीर की राजनीति में प्रवेश न कर सके। गौरतलब है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अक्टूबर 2024 के विधानसभा चुनाव में सरकार बनाई थी।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है। आलोचकों का कहना है कि दलबदल के आरोप और पलटवार दोनों पक्षों की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हैं। BJP ने जहाँ इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है, वहीं NC का कहना है कि उसके पास पर्याप्त आंतरिक जानकारी है।
आगे क्या
फिलहाल BJP ने किसी औपचारिक जाँच की माँग नहीं की है, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने संकेत दिया है कि वह अपने विधायकों की सुरक्षा के लिए आंतरिक कदम उठाएगी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, दोनों दलों के बीच यह तनाव आने वाले हफ्तों में और गहरा हो सकता है।