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बैकडोर भर्ती विवाद: उमर अब्दुल्ला ने महबूबा को दी चुनौती — 'एक भी सबूत पेश करें'

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बैकडोर भर्ती विवाद: उमर अब्दुल्ला ने महबूबा को दी चुनौती — 'एक भी सबूत पेश करें'

सारांश

महबूबा मुफ्ती के 25,000 बैकडोर नियुक्तियों के आरोप पर उमर अब्दुल्ला ने पलटवार किया — पीडीपी-भाजपा कार्यकाल की अदालत में रद्द नियुक्तियाँ गिनाईं और सबूत पेश करने की खुली चुनौती दी। दो वरिष्ठ मंत्री जल्द प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 26 जून 2026 को महबूबा मुफ्ती के 25,000 बैकडोर नियुक्तियों के आरोपों को खारिज किया।
अब्दुल्ला ने महबूबा को चुनौती दी — 'एक भी ऐसे उम्मीदवार का नाम बताएँ जिसे हमारी सरकार ने बैकडोर नियुक्ति दी हो।' मुख्यमंत्री ने पीडीपी-भाजपा कार्यकाल की कई बैकडोर नियुक्तियों का हवाला दिया जो अदालतों द्वारा रद्द की जा चुकी हैं।
सरताज मदनी के बेटे की कथित बैकडोर नियुक्ति और जम्मू-कश्मीर बैंक में अनियमितताओं का भी उल्लेख किया।
सरकार के दो वरिष्ठ मंत्री अगले एक-दो दिनों में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी तथ्य सार्वजनिक करेंगे।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार, 26 जून 2026 को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) सरकार पर 25,000 बैकडोर नियुक्तियाँ करने का दावा किया गया था। मुख्यमंत्री ने महबूबा को खुली चुनौती दी कि वे एक भी ऐसे उम्मीदवार का नाम बताएँ जिसे एनसी सरकार के तहत बैकडोर नियुक्ति दी गई हो।

मुख्य घटनाक्रम

श्रीनगर में मुहर्रम के 10वें दिन के जुलूस में शामिल होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे। जिन्होंने सबसे ज़्यादा गैरकानूनी और बैकडोर नियुक्तियाँ कीं, वे ही अब ये आरोप लगा रहे हैं।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पीडीपी के कार्यकाल में की गई कई बैकडोर नियुक्तियाँ अदालतों द्वारा रद्द की जा चुकी हैं।

काउंटर-आरोप: मुफ्ती परिवार पर निशाना

मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि महबूबा मुफ्ती के परिवार से जुड़े लोगों को भी कथित अनियमित भर्ती प्रक्रियाओं का लाभ मिला है। उन्होंने सरताज मदनी के बेटे का उदाहरण देते हुए दावा किया कि उन्हें बैकडोर प्रक्रिया से नियुक्त किया गया था और बाद में अदालत के निर्देशों पर हटाया गया। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर बैंक में नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया, जिनकी जाँच एजेंसियाँ कर रही हैं।

पीडीपी-भाजपा कार्यकाल पर हमला

अब्दुल्ला ने कहा, 'अगर मैं पीडीपी-भाजपा सरकार के दौरान की गई बैकडोर नियुक्तियों को गिनना शुरू करूँ, तो आपके पास पूरी सूची सुनने के लिए पर्याप्त समय नहीं होगा।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में रोज़गार और पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक तनाव चरम पर है।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की योजना

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनका प्रशासन बेबुनियाद आरोपों में नहीं उलझेगा और सरकार ने इस मुद्दे पर सभी संबंधित जानकारी एकत्र कर ली है। उन्होंने घोषणा की, 'भगवान ने चाहा तो अगले एक-दो दिनों में मेरे दो वरिष्ठ मंत्री प्रेस को संबोधित करेंगे और सभी तथ्य लोगों के सामने रखेंगे।'

महबूबा के मूल आरोप

गौरतलब है कि महबूबा मुफ्ती ने गुरुवार को आरोप लगाया था कि एनसी सरकार के 25 महीने के कार्यकाल में जम्मू-कश्मीर में लगभग 25,000 बैकडोर नियुक्तियाँ की गईं। उन्होंने दावा किया कि सरकारी विभागों में रिक्त पद बिना पारदर्शिता के और स्थापित भर्ती प्रक्रिया को दरकिनार कर निजी आउटसोर्सिंग एजेंसियों के ज़रिये भरे गए। महबूबा ने कहा, '25 महीनों में लगभग 25,000 बैकडोर नियुक्तियाँ हुई हैं। मेरे पास आदेश भी हैं, लेकिन मैं उनकी सुरक्षा के लिए नियुक्त लोगों की पहचान उजागर नहीं करना चाहती।' अब गेंद पीडीपी के पाले में है — वरिष्ठ मंत्रियों की प्रेस कॉन्फ्रेंस से यह विवाद और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो विधानसभा में हाशिये पर है, आरोपों के ज़रिये प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश कर रही है — लेकिन 'आदेश हैं, नाम नहीं बताऊँगी' वाला रुख साख के लिए कमज़ोर है। दूसरी तरफ, एनसी सरकार का पलटवार भी तथ्यात्मक जवाब से ज़्यादा राजनीतिक है। असली सवाल यह है कि जम्मू-कश्मीर में सेवा चयन बोर्ड की प्रक्रियाएँ कितनी पारदर्शी हैं — और वह सवाल दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप में दब जाने का खतरा है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर में बैकडोर नियुक्तियों को लेकर क्या आरोप लगाए?
महबूबा मुफ्ती ने दावा किया कि एनसी सरकार के 25 महीने के कार्यकाल में लगभग 25,000 बैकडोर नियुक्तियाँ की गईं। उनके अनुसार सरकारी विभागों के रिक्त पद निजी आउटसोर्सिंग एजेंसियों के ज़रिये बिना पारदर्शिता के भरे गए।
उमर अब्दुल्ला ने महबूबा के आरोपों का जवाब कैसे दिया?
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए महबूबा को एक भी बैकडोर नियुक्ति का सबूत पेश करने की चुनौती दी। उन्होंने पीडीपी-भाजपा कार्यकाल की उन नियुक्तियों का हवाला दिया जो अदालतों द्वारा रद्द की जा चुकी हैं।
सरताज मदनी का इस विवाद से क्या संबंध है?
मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने दावा किया कि सरताज मदनी के बेटे को बैकडोर प्रक्रिया के ज़रिये नियुक्त किया गया था और बाद में अदालत के निर्देशों पर उन्हें हटाया गया। यह उदाहरण उन्होंने पीडीपी के कार्यकाल में हुई कथित अनियमितताओं को रेखांकित करने के लिए दिया।
एनसी सरकार आगे क्या कदम उठाएगी?
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि उनके दो वरिष्ठ मंत्री अगले एक-दो दिनों में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी तथ्य सार्वजनिक करेंगे। सरकार का कहना है कि उसने इस मुद्दे से जुड़ी सभी संबंधित जानकारी पहले ही एकत्र कर ली है।
जम्मू-कश्मीर बैंक इस विवाद में कैसे जुड़ा है?
मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर बैंक में नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया, जिनकी जाँच संबंधित एजेंसियाँ कर रही हैं। यह संदर्भ उन्होंने पिछली सरकारों के दौर की व्यापक भर्ती अनियमितताओं को उजागर करने के लिए दिया।
राष्ट्र प्रेस
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