महबूबा मुफ्ती के 'बैकडोर अपॉइंटमेंट' के आरोप खारिज, जम्मू-कश्मीर सरकार ने दी सफाई
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर सरकार ने 28 जून 2026 को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती द्वारा लगाए गए 'बैकडोर अपॉइंटमेंट' के आरोपों को सिरे से नकार दिया। सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के वरिष्ठ नेताओं ने श्रीनगर में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पष्ट किया कि सरकारी विभागों में सभी नियुक्तियाँ मेरिट और निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर की जा रही हैं।
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसने क्या कहा
स्वास्थ्य एवं शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू, कृषि मंत्री जावेद अहमद डार और मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी ने संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित किया। मंत्री सकीना इत्तू ने महबूबा मुफ्ती की इस टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया दी कि नौकरियाँ लोक सेवा आयोग (PSC) के बजाय आउटसोर्सिंग के ज़रिए भरी जा रही हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे उनकी समझ पर तरस आता है — यह दुखद है कि इतने ऊँचे पद पर रहने के बावजूद महबूबा मुफ्ती भर्ती प्रक्रिया के बारे में नहीं जानती हैं।'
आउटसोर्सिंग और सरकारी भर्ती में अंतर
मंत्री इत्तू ने स्पष्ट किया कि आउटसोर्सिंग एक अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है, जिसे केवल तत्काल कामकाजी ज़रूरतों के लिए अपनाया जाता है और इसे सरकारी सेवा में नियमित नियुक्ति नहीं माना जा सकता। उन्होंने बताया कि आउटसोर्सिंग के ज़रिए कार्यरत युवाओं को समग्र शिक्षा और मिशन वात्सल्य (ICPS) जैसी केंद्र-प्रायोजित योजनाओं के तहत नियुक्त किया गया है। उनके अनुसार, 'आउटसोर्सिंग को पक्की नौकरी नहीं माना जा सकता — यह बात महबूबा मुफ्ती को समझनी चाहिए।'
सरकार की पारदर्शिता पर सफाई
मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी ने कहा कि सरकार ने भर्ती के लिए पारदर्शी और मेरिट-आधारित नीति अपनाई है। उन्होंने कहा, 'हर भर्ती तय कानूनी और संस्थागत प्रक्रियाओं के ज़रिए की जाती है, जिससे योग्य उम्मीदवारों के लिए निष्पक्षता और समान अवसर सुनिश्चित होते हैं।' वानी ने यह भी जोड़ा कि आउटसोर्सिंग की यह व्यवस्था पिछली सरकार के समय से चली आ रही है और इसे लेकर जनता के बीच 'बेवजह भ्रम' फैलाया जा रहा है।
विपक्ष का आरोप और राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि महबूबा मुफ्ती ने आरोप लगाया था कि जम्मू-कश्मीर में सरकारी नियुक्तियाँ PSC की नियमित प्रक्रिया को दरकिनार कर 'पिछले दरवाज़े' से की जा रही हैं। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरियों को लेकर युवाओं में पहले से ही असंतोष व्याप्त है। PDP और NC के बीच यह राजनीतिक तनाव राज्य में विधानसभा चुनावों के बाद से लगातार बना हुआ है।
सरकार की प्रतिबद्धता
जम्मू-कश्मीर सरकार ने पारदर्शिता, जवाबदेही और योग्यता-आधारित भर्ती के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। अधिकारियों ने उम्मीदवारों को भरोसा दिलाया कि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के बाहर कोई नियुक्ति नहीं की जा रही है और प्रशासन सभी विभागों में निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किए हुए है। आने वाले दिनों में सरकार से भर्ती प्रक्रिया को लेकर और अधिक स्पष्टीकरण अपेक्षित है।