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एम्स अवंतीपोरा समीक्षा विवाद: सकीना इट्टू और सज्जाद लोन ने महबूबा मुफ्ती पर उठाए सवाल

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एम्स अवंतीपोरा समीक्षा विवाद: सकीना इट्टू और सज्जाद लोन ने महबूबा मुफ्ती पर उठाए सवाल

सारांश

एम्स अवंतीपोरा की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करने पर महबूबा मुफ्ती विवादों में घिरीं। स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू ने 'राजनीतिक भूलने की बीमारी' का आरोप लगाया, तो विधायक सज्जाद लोन ने इसे असंवैधानिक दखलंदाजी बताया — यह विवाद चुनी हुई सरकार और विपक्ष के बीच प्रशासनिक अधिकारों की बड़ी लड़ाई का हिस्सा है।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू और विधायक सज्जाद लोन ने 6 जून 2026 को महबूबा मुफ्ती की आलोचना की।
महबूबा मुफ्ती ने अवंतीपोरा स्थित एम्स के विकास कार्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की थी।
इट्टू ने एक्स पर पूछा कि पूर्व मुख्यमंत्री किस हैसियत से एम्स परियोजना की समीक्षा कर रही थीं, जबकि सत्ता में उमर अब्दुल्ला की चुनी हुई सरकार है।
लोन ने इसे 'असंवैधानिक दखलंदाजी' बताया और मुख्यमंत्री से स्पष्टीकरण माँगा।
महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से एम्स कार्य में तेजी लाने का अनुरोध किया और नड्डा ने समय पर पूरा होने का आश्वासन दिया।

जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू और विधायक सज्जाद लोन ने 6 जून 2026 को पूर्व मुख्यमंत्री एवं पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की तीखी आलोचना की, जब मुफ्ती ने अनंतनाग जिले के अवंतीपोरा में निर्माणाधीन एम्स के विकास कार्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। दोनों नेताओं ने सवाल उठाया कि एक गैर-निर्वाचित विपक्षी नेता को किस संवैधानिक अधिकार के तहत केंद्रीय संस्थान की आधिकारिक समीक्षा करने का अधिकार मिला।

स्वास्थ्य मंत्री की प्रतिक्रिया

सकीना इट्टू ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में कहा कि कुछ लोग 'राजनीतिक भूलने की बीमारी' से पीड़ित हैं और वे ऐसा व्यवहार कर रहे हैं जैसे वे अभी भी सत्ता में हों, जबकि 2018 में सत्ता गंवाने के बाद जनता उन्हें बार-बार नकार चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर में आज चुनी हुई सरकार का नेतृत्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला कर रहे हैं।

इट्टू ने यह भी पूछा कि दिल्ली में कौन सा सत्ता केंद्र ऐसे कामों के लिए निर्देश दे रहा है। उन्होंने इसे विडंबनापूर्ण बताया कि जो लोग एम्स प्रोजेक्ट की धीमी गति के लिए जिम्मेदार थे, वे अब इसकी प्रगति का श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं।

सज्जाद लोन की आपत्ति

विधायक सज्जाद लोन ने भी एक्स पर महबूबा मुफ्ती के इस कदम को 'असंवैधानिक दखलंदाजी' करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि अगर एक गैर-विधायक विपक्षी नेता केंद्रीय संस्थान की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर सकती हैं, तो भाजपा या संघ के गैर-विधायक पदाधिकारी भी इसी तरह के अधिकारों का दावा कर सकते हैं।

लोन ने यह भी पूछा कि फारूक अब्दुल्ला, गुलाम नबी आजाद या निर्मल सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं को ऐसी बैठकों की अध्यक्षता करने से क्या रोकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से इस मामले पर स्पष्टीकरण देने का आग्रह किया।

महबूबा मुफ्ती का पक्ष

पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने एक्स पर बताया था कि उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से बात की और एम्स अवंतीपोरा में चल रहे कार्यों में तेजी लाने का अनुरोध किया ताकि परियोजना में और देरी न हो। उन्होंने कहा कि नड्डा ने उन्हें आश्वस्त किया कि काम समय पर पूरा हो जाएगा।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की स्थिति

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नई निर्वाचित सरकार और विपक्षी दलों के बीच प्रशासनिक अधिकारों को लेकर तनाव बना हुआ है। एम्स अवंतीपोरा परियोजना वर्षों से निर्माण में देरी का सामना कर रही है और इसे क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य अवसंरचना परियोजनाओं में गिना जाता है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकार और विपक्ष के बीच प्रशासनिक वैधता की गहरी लड़ाई है। महबूबा मुफ्ती का केंद्रीय मंत्री से सीधे संपर्क कर परियोजना की निगरानी करना उस राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है जिसमें विपक्षी नेता जनहित के मुद्दों पर सक्रियता दिखाकर प्रासंगिकता बनाए रखते हैं। लेकिन सकीना इट्टू का यह सवाल — कि दिल्ली में कौन सा सत्ता केंद्र निर्देश दे रहा है — इस बात का संकेत है कि सत्तारूढ़ गठबंधन इसे केवल प्रोटोकॉल उल्लंघन नहीं, बल्कि राजनीतिक चुनौती मान रहा है। एम्स अवंतीपोरा जैसी देरी से चल रही परियोजना पर श्रेय की यह होड़ आने वाले समय में और तेज होगी।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एम्स अवंतीपोरा समीक्षा बैठक विवाद क्या है?
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने अनंतनाग जिले के अवंतीपोरा में निर्माणाधीन एम्स के विकास कार्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिस पर जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू और विधायक सज्जाद लोन ने आपत्ति जताई। दोनों का कहना है कि एक गैर-निर्वाचित विपक्षी नेता को केंद्रीय संस्थान की आधिकारिक समीक्षा का अधिकार नहीं है।
सकीना इट्टू ने महबूबा मुफ्ती पर क्या आरोप लगाए?
सकीना इट्टू ने एक्स पर कहा कि महबूबा मुफ्ती 'राजनीतिक भूलने की बीमारी' से पीड़ित हैं और 2018 में सत्ता गंवाने के बाद जनता द्वारा बार-बार नकारे जाने के बावजूद वे सत्ता में होने का भ्रम पाल रही हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि दिल्ली में कौन सा सत्ता केंद्र ऐसे कामों के निर्देश दे रहा है।
सज्जाद लोन ने इस मामले को असंवैधानिक क्यों बताया?
सज्जाद लोन का तर्क है कि अगर एक गैर-विधायक विपक्षी नेता केंद्रीय संस्थान की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर सकती हैं, तो किसी भी दल के गैर-निर्वाचित नेता यही दावा कर सकते हैं। उन्होंने इसे संवैधानिक रूप से अनुचित और असंवैधानिक दखलंदाजी करार दिया।
महबूबा मुफ्ती ने एम्स अवंतीपोरा पर क्या कहा था?
महबूबा मुफ्ती ने एक्स पर बताया था कि उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से बात कर एम्स अवंतीपोरा के कार्यों में तेजी लाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि नड्डा ने उन्हें आश्वस्त किया कि परियोजना समय पर पूरी हो जाएगी।
एम्स अवंतीपोरा परियोजना का वर्तमान क्या है?
एम्स अवंतीपोरा अनंतनाग जिले में निर्माणाधीन एक केंद्रीय स्वास्थ्य संस्थान है, जो वर्षों से निर्माण में देरी का सामना कर रहा है। स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू के अनुसार, उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार की केंद्रित कोशिशों से यह परियोजना अब पूरा होने की दिशा में बढ़ रही है।
राष्ट्र प्रेस
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