अवंतीपोरा AIIMS निरीक्षण के बाद महबूबा मुफ्ती बोलीं — मुफ्ती मोहम्मद सईद का सपना हो रहा साकार
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने 5 जून 2026 को अवंतीपोरा में निर्माणाधीन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) का स्थलीय निरीक्षण किया और पत्रकारों से बातचीत में इसे अपने दिवंगत पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद के अधूरे सपने की पूर्ति बताया। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य में विलंब जरूर हुआ, लेकिन अब गति संतोषजनक है।
मुफ्ती मोहम्मद सईद की विरासत से जुड़ा संस्थान
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अवंतीपोरा AIIMS उनके पिता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की उन प्राथमिकताओं में शामिल था जो वे अपने जीवनकाल में पूरी नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि यह परियोजना उनके लिए व्यक्तिगत संतोष और गर्व का विषय है। उनके अनुसार, कई कारणों से काम प्रभावित रहा, परंतु अब स्थिति बेहतर है।
स्वास्थ्य सेवाओं की ज़रूरत और कैंसर का बढ़ता बोझ
महबूबा ने जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के बढ़ते मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्थान न केवल उपचार की सुविधा देगा, बल्कि शोध कार्य भी संचालित करेगा। उनके अनुसार, इससे भविष्य में बेहतर स्वास्थ्य नीतियाँ तैयार करने में मदद मिलेगी।
रोजगार और स्थानीय भर्ती की माँग
महबूबा मुफ्ती ने बताया कि इस संस्थान में डॉक्टरों और नर्सों की बड़ी संख्या में भर्ती की जाएगी, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने विशेष आग्रह किया कि गैर-तकनीकी और सहायक पदों पर भर्ती में आसपास के क्षेत्रों के लोगों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि स्थानीय समुदाय को सीधा लाभ मिले।
निर्माण से जुड़ी स्थानीय समस्याएँ
उन्होंने माना कि नदी के किनारे और सीमित भूमि के कारण निर्माण कार्य से आसपास के निवासियों को असुविधा हो रही है। महबूबा ने आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे पर विभागीय आयुक्त से बातचीत करेंगी ताकि समाधान निकाला जा सके।
अगले एक-दो वर्षों में पूर्ण होने की उम्मीद
महबूबा मुफ्ती ने उम्मीद जताई कि अवंतीपोरा AIIMS अगले एक से दो वर्षों में पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अवंतीपोरा का प्राकृतिक वातावरण मरीजों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य सुधार में भी सहायक होगा। यह संस्थान जम्मू-कश्मीर के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार — तीनों मोर्चों पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होने की संभावना है।