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'जुबली कुमार' राजेंद्र कुमार: 80 से अधिक फिल्मों के सदाबहार रोमांटिक सितारे की विरासत

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'जुबली कुमार' राजेंद्र कुमार: 80 से अधिक फिल्मों के सदाबहार रोमांटिक सितारे की विरासत

सारांश

राजेंद्र कुमार — हिंदी सिनेमा के 'जुबली कुमार' — ने 1960 के दशक में लगातार सुपरहिट फिल्मों से यह उपाधि अर्जित की। 80 से अधिक फिल्मों और 'पद्म श्री' सम्मान के साथ उनकी विरासत आज भी हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम युग की याद दिलाती है।

मुख्य बातें

राजेंद्र कुमार का जन्म 20 जुलाई 1927 को सियालकोट (अब पाकिस्तान) में हुआ था।
1960 के दशक में लगातार सफल फिल्मों के कारण उन्हें 'जुबली कुमार' की उपाधि मिली।
'मदर इंडिया' (1957) , 'संगम' , 'मेरे महबूब' और 'सूरज' उनकी सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल हैं।
चार दशकों से अधिक के करियर में 80 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया।
भारत सरकार ने उन्हें 'पद्म श्री' सम्मान से सम्मानित किया।
12 जुलाई 1999 को मुंबई में उनका निधन हुआ।

हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम युग में राजेंद्र कुमार एक ऐसे अभिनेता थे, जिनकी रोमांटिक पर्दे की उपस्थिति और भावनात्मक अभिनय ने उन्हें दर्शकों का चहेता बना दिया। 12 जुलाई 1999 को मुंबई में उनके निधन के साथ हिंदी सिनेमा ने एक ऐसा सितारा खो दिया, जिसने चार दशकों से अधिक समय तक 80 से अधिक फिल्मों में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनकी फिल्में आज भी क्लासिक हिंदी सिनेमा की पहचान मानी जाती हैं।

प्रारंभिक जीवन और फिल्म जगत में प्रवेश

राजेंद्र कुमार का जन्म 20 जुलाई 1927 को सियालकोट (अब पाकिस्तान) में हुआ था। 1947 के विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया और वे मुंबई पहुँचे। यहाँ उन्होंने फिल्म निर्माण की बारीकियाँ सीखने के लिए निर्देशक एच. एस. रवैल के साथ सहायक के रूप में काम किया। यह कार्यशाला उनके लिए अभिनय की पाठशाला साबित हुई और उन्होंने 1950 के दशक में अपने अभिनय करियर की नींव रखी।

'जुबली कुमार' की उपाधि और स्वर्णिम दशक

राजेंद्र कुमार के करियर का सबसे चमकीला दौर 1960 का दशक रहा। इस अवधि में उनकी एक के बाद एक फिल्में सिनेमाघरों में लंबे समय तक चलती रहीं, जिसके कारण उन्हें 'जुबली कुमार' की उपाधि मिली। उनकी उल्लेखनीय फिल्मों में 'मेरे महबूब', 'संगम', 'दिल एक मंदिर', 'आरजू', 'सूरज', 'आई मिलन की बेला' और 'धूल का फूल' शामिल हैं। इससे पहले 'मदर इंडिया' (1957) में उनकी भूमिका ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई थी और शीर्ष अभिनेताओं की पंक्ति में खड़ा कर दिया था।

अभिनय शैली और दर्शकों से जुड़ाव

राजेंद्र कुमार की विशेषता उनकी भावनात्मक गहराई थी। प्रेम, त्याग, पारिवारिक दायित्व और मानवीय संवेदनाओं से भरे किरदारों को वे जिस सहजता से पर्दे पर जीवंत करते थे, वह आम दर्शकों को सीधे उनसे जोड़ती थी। उनकी स्क्रीन पर उपस्थिति में एक स्वाभाविकता थी, जो उस दौर के कृत्रिम अभिनय से बिल्कुल अलग थी। यह जुड़ाव ही उनकी सबसे बड़ी पूँजी थी।

फिल्म निर्माण और पारिवारिक विरासत

अभिनय के अतिरिक्त राजेंद्र कुमार ने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रखा। उन्होंने अपने पुत्र कुमार गौरव के फिल्मी करियर को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फिल्म उद्योग में वे अपने सौम्य स्वभाव और मज़बूत व्यावसायिक संबंधों के लिए भी सम्मान के पात्र थे। उनके सहयोगी उन्हें एक संजीदा और ज़िम्मेदार व्यक्तित्व के रूप में याद करते हैं।

सम्मान और स्थायी विरासत

भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित 'पद्म श्री' सम्मान से नवाज़ा। चार दशकों से अधिक लंबे करियर में उन्होंने हिंदी सिनेमा को अनेक यादगार किरदार और अविस्मरणीय फिल्में दीं। 12 जुलाई 1999 को मुंबई में उनके निधन के बाद भी उनकी फिल्में और रोमांटिक छवि उन्हें हिंदी सिनेमा के सदाबहार सितारों की श्रेणी में बनाए रखती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब परिवार, प्रेम और त्याग के विषय हिंदी सिनेमा की धुरी थे। उनकी 'जुबली' उपाधि यह भी बताती है कि 1960 के दशक में दर्शकों की पसंद कितनी स्थिर और गहरी थी — एक ऐसा दौर जो आज के OTT-चालित, तेज़-बदलते मनोरंजन परिदृश्य से बिल्कुल अलग था। गौरतलब है कि उस युग के अभिनेता अपनी पर्दे की छवि और वास्तविक जीवन के व्यवहार के बीच एक सामंजस्य बनाए रखते थे, जो आज दुर्लभ है। राजेंद्र कुमार की विरासत इस बात की याद दिलाती है कि सिनेमा में दीर्घकालिक प्रासंगिकता चमक-दमक से नहीं, बल्कि दर्शकों के साथ भावनात्मक ईमानदारी से बनती है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजेंद्र कुमार को 'जुबली कुमार' क्यों कहा जाता था?
1960 के दशक में राजेंद्र कुमार की फिल्में लगातार सिनेमाघरों में लंबे समय तक चलती रहीं और एक के बाद एक सुपरहिट साबित हुईं, इसी कारण उन्हें 'जुबली कुमार' की उपाधि मिली। यह उपाधि उनकी अटूट व्यावसायिक सफलता का प्रतीक बन गई।
राजेंद्र कुमार की सबसे प्रसिद्ध फिल्में कौन-सी हैं?
राजेंद्र कुमार की सबसे चर्चित फिल्मों में 'मदर इंडिया' (1957), 'संगम', 'मेरे महबूब', 'दिल एक मंदिर', 'आरजू', 'सूरज', 'आई मिलन की बेला' और 'धूल का फूल' शामिल हैं। इन फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा के शीर्ष अभिनेताओं में स्थापित किया।
राजेंद्र कुमार का निधन कब और कहाँ हुआ?
राजेंद्र कुमार का निधन 12 जुलाई 1999 को मुंबई में हुआ। उनके जाने से हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम युग का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया।
राजेंद्र कुमार को कौन-सा सरकारी सम्मान मिला था?
भारतीय सिनेमा में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने राजेंद्र कुमार को 'पद्म श्री' सम्मान से सम्मानित किया था। यह भारत के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में से एक है।
राजेंद्र कुमार का जन्म कहाँ हुआ था और वे फिल्म जगत में कैसे आए?
राजेंद्र कुमार का जन्म 20 जुलाई 1927 को सियालकोट (अब पाकिस्तान) में हुआ था। 1947 के विभाजन के बाद परिवार भारत आया और मुंबई में उन्होंने निर्देशक एच. एस. रवैल के साथ सहायक के रूप में काम करते हुए फिल्म निर्माण की बारीकियाँ सीखीं और 1950 के दशक में अभिनय की शुरुआत की।
राष्ट्र प्रेस
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