कुमार गौरव: 'लव स्टोरी' से रातोंरात स्टार, फिर क्यों बुझ गई बॉलीवुड की यह चमक?
सारांश
मुख्य बातें
कुमार गौरव — दिग्गज अभिनेता राजेंद्र कुमार के बेटे और संजय दत्त के जीजा — ने 1981 में फिल्म 'लव स्टोरी' से बॉलीवुड में ऐसी दस्तक दी कि पूरा देश उनका दीवाना हो गया। लेकिन वह चमक जितनी तेज़ी से आई, उतनी ही तेज़ी से धुंधली भी पड़ती गई। फिल्मी खानदान का वारिस होने के बावजूद कुमार गौरव का करियर एक ऐसी कहानी बन गया, जो बॉलीवुड के कई महत्वाकांक्षी सितारों को आज भी सोचने पर मजबूर करती है।
शानदार शुरुआत: 'लव स्टोरी' का जादू
11 जुलाई 1967 को लखनऊ में जन्मे कुमार गौरव बचपन से ही फिल्मी माहौल में पले-बढ़े। उनके पिता राजेंद्र कुमार अपने दौर के सबसे कामयाब अभिनेताओं में शुमार थे। 1981 में निर्देशक राहुल रवैल की फिल्म 'लव स्टोरी' रिलीज़ होते ही सुपरहिट साबित हुई। कुमार गौरव का हेयरस्टाइल, ड्रेसिंग सेंस और मासूम मुस्कान युवाओं के बीच ट्रेंड बन गई। हर निर्माता-निर्देशक उन्हें अपनी फिल्म में लेना चाहता था और वे देशभर के रोमांटिक हीरो बन गए।
करियर में ढलान: एक के बाद एक झटके
बॉलीवुड में पहली हिट के बाद असली परीक्षा उस सफलता को बनाए रखने की होती है — और यही वह मोड़ था जहाँ कुमार गौरव पिछड़ गए। 'लव स्टोरी' के बाद उन्होंने 'तेरी कसम', 'स्टार', 'लवर्स', 'नाम', 'फूल' और 'कांटे' सहित कई फिल्मों में काम किया। इनमें से कुछ को दर्शकों की सराहना ज़रूर मिली, लेकिन पहली फिल्म जैसा स्टारडम दोबारा हासिल नहीं हो सका।
गौरतलब है कि इसी दौर में उनसे जुड़ा एक किस्सा अक्सर चर्चा में रहता है। कहा जाता है कि 'लव स्टोरी' की बड़ी सफलता के बाद उन्होंने नई और उभरती अभिनेत्रियों के साथ काम करने से परहेज़ किया। इसी सिलसिले में उन्होंने मंदाकिनी के साथ फिल्म करने से इनकार कर दिया। बाद में मंदाकिनी ने 'राम तेरी गंगा मैली' से ज़बरदस्त सफलता हासिल की और रातोंरात स्टार बन गईं — जबकि कुमार गौरव का करियर धीरे-धीरे ढलान पर चला गया।
साइड रोल और फिल्मों से विदाई
समय के साथ दर्शकों की पसंद बदलती गई और बॉक्स ऑफिस पर लगातार नाकामियों के बाद एक दौर ऐसा आया जब कुमार गौरव को साइड रोल स्वीकार करने पड़े। 2002 में फिल्म 'कांटे' में नज़र आने के बाद उन्होंने मुख्यधारा की फिल्मों से लगभग दूरी बना ली। 2009 में एक छोटे प्रोजेक्ट 'माय डैडी स्ट्रॉन्गेस्ट' में दिखे, लेकिन उसके बाद बड़े पर्दे पर उनकी वापसी नहीं हो सकी। फिल्मों से दूर होने के बाद उन्होंने बिज़नेस की दुनिया की ओर रुख किया।
निजी जीवन: संजय दत्त परिवार से रिश्ता
कुमार गौरव ने 1984 में अभिनेता संजय दत्त की बहन नम्रता दत्त से विवाह किया। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ने फिल्म 'नाम' में एक साथ काम भी किया था। कुमार गौरव और नम्रता की दो बेटियाँ हैं और दोनों के बीच आज भी अच्छे संबंध बताए जाते हैं।
बॉलीवुड का सबक: एक हिट काफी नहीं
कुमार गौरव की कहानी बॉलीवुड की उस पुरानी सच्चाई को दोहराती है — एक सुपरहिट फिल्म स्टार बना सकती है, लेकिन लंबे करियर के लिए सही फिल्मों का चुनाव और समय के साथ बदलना ज़रूरी है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब नेपोटिज़्म बनाम प्रतिभा की बहस बॉलीवुड में लगातार जारी है। कुमार गौरव का सफर इस बात का प्रमाण है कि फिल्मी पृष्ठभूमि दरवाज़ा खोल सकती है, लेकिन अंदर टिके रहना अपनी काबिलियत पर निर्भर करता है।