कर्नाटक में 3 साल में 2.12 लाख छात्रों ने छोड़े सरकारी स्कूल, प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस सरकार पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 10 जुलाई 2026 को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए कि प्रशासनिक विफलता के चलते राज्य के हजारों सरकारी स्कूल बंद होने की कगार पर पहुँच गए हैं। उन्होंने 'यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस' (UDISE+) रिपोर्ट के आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों में राज्य के सरकारी स्कूलों से लगभग 2.12 लाख छात्र बाहर हो चुके हैं।
दाखिले के आँकड़े क्या कहते हैं
जोशी ने UDISE+ रिपोर्ट के आधार पर वर्षवार आँकड़े पेश किए। 2023-24 शैक्षणिक वर्ष में कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में दाखिला 1,19,26,303 था। 2024-25 में यह घटकर 1,17,80,251 रह गया — यानी एक वर्ष में 1,46,052 छात्रों की कमी। 2025-26 में दाखिले और घटे और संख्या 1,17,14,214 हो गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 66,037 छात्र कम है।
जोशी ने इसे राज्य सरकार की सार्वजनिक शिक्षा को सुदृढ़ करने में विफलता का प्रमाण बताया।
जोशी के मुख्य आरोप
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री जोशी ने एक बयान में कहा, "कांग्रेस सरकार ने प्रशासनिक नाकामी दिखाई है और हजारों सरकारी स्कूलों को बंद होने की कगार पर पहुँचा दिया है, जो लंबे समय से गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के लिए जीवन रेखा रहे हैं।"
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार कामकाज के बजाय अंदरूनी सत्ता संघर्ष में उलझी है, जिसका सीधा खामियाजा शिक्षा क्षेत्र को भुगतना पड़ रहा है।
कर्नाटक और ड्रग नेटवर्क का मुद्दा
जोशी ने शिक्षा की गिरावट को एक व्यापक सामाजिक संकट से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि कर्नाटक एक 'ड्रग हब' के रूप में उभर रहा है। उनके अनुसार, "युवा पीढ़ी ड्रग नेटवर्क और असामाजिक गतिविधियों का शिकार हो रही है, जबकि सरकार राजनीतिक पद पाने की होड़ में लगी हुई है।" हालाँकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार नेतृत्व को लेकर आंतरिक खींचतान की खबरों से घिरी है। गौरतलब है कि सरकारी स्कूलों में नामांकन की गिरावट केवल कर्नाटक की नहीं, बल्कि कई राज्यों की साझा चुनौती रही है — जिसे विशेषज्ञ निजी स्कूलों की बढ़ती पहुँच और सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी से जोड़ते हैं।
आगे क्या
कर्नाटक सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। UDISE+ आँकड़े केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किए जाते हैं और इन्हें आधिकारिक स्रोत माना जाता है, हालाँकि गिरावट के कारणों की व्याख्या पर राजनीतिक मतभेद स्पष्ट हैं।