कर्नाटक में उर्वरक कमी के दावे निराधार, प्रल्हाद जोशी ने कांग्रेस पर लगाया दहशत फैलाने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने शनिवार, 13 जून 2026 को कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार पर किसानों के बीच उर्वरक कमी को लेकर अनावश्यक दहशत फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि खरीफ 2026 सीजन के लिए यूरिया, डीएपी और एनपीके उर्वरकों का राज्य में पर्याप्त से अधिक भंडार उपलब्ध है और कांग्रेस के दावे आधिकारिक आँकड़ों से मेल नहीं खाते।
मुख्य घटनाक्रम
जोशी ने कहा कि कर्नाटक कांग्रेस सरकार के आरोप भ्रामक हैं और केंद्र सरकार के आधिकारिक आँकड़ों के सर्वथा विपरीत हैं। उनके अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव और प्रमुख उत्पादक देशों द्वारा निर्यात प्रतिबंधों के कारण वैश्विक आपूर्ति में बाधाएँ उत्पन्न होने के बावजूद केंद्र ने कर्नाटक को निर्बाध उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए हैं।
आँकड़े क्या कहते हैं
10 जून 2026 तक के सरकारी आँकड़ों के अनुसार, खरीफ सीजन के लिए यूरिया की आनुपातिक आवश्यकता 3.13 लाख मीट्रिक टन थी, जबकि केंद्र ने 5.59 लाख मीट्रिक टन की उपलब्धता सुनिश्चित की। बिक्री के बाद भी राज्य के पास 3.29 लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया का भंडार बचा हुआ है, जिसमें परिवहन में मौजूद मात्रा भी शामिल है।
डीएपी की आनुपातिक आवश्यकता 1.89 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले उपलब्धता 2.57 लाख मीट्रिक टन रही और वर्तमान भंडार 1.16 लाख मीट्रिक टन है। एनपीके उर्वरकों के मामले में, 4.36 लाख मीट्रिक टन की माँग के सामने 9.28 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति हुई और मौजूदा भंडार 5.61 लाख मीट्रिक टन है।
गौरतलब है कि पिछली रबी फसल के दौरान भी यही तस्वीर रही। 7.60 लाख मीट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता के मुकाबले 10.48 लाख मीट्रिक टन की आपूर्ति हुई। डीएपी की जरूरत 1.98 लाख मीट्रिक टन थी, जबकि उपलब्धता 4.19 लाख मीट्रिक टन रही। एनपीके की माँग 7.20 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले आपूर्ति 13.52 लाख मीट्रिक टन तक पहुँची।
वैश्विक चुनौतियाँ और भारत की तैयारी
मंत्री ने बताया कि अमेरिका, इज़राइल और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक संघर्षों तथा चीन जैसे प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं से निर्यात में कमी के कारण वैश्विक उर्वरक बाज़ार पर दबाव बढ़ा है। इन चुनौतियों के बावजूद भारत ने घरेलू उत्पादन बढ़ाकर और समय पर आयात करके पर्याप्त भंडार बनाए रखा है।
बिक्री में असामान्य वृद्धि पर चिंता
जोशी ने यह भी स्वीकार किया कि हाल के महीनों में कर्नाटक में उर्वरकों की बिक्री में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले वर्ष की तुलना में डीएपी और एनपीके की बिक्री में उल्लेखनीय इज़ाफा हुआ है और रबी मौसम के दौरान खपत अनुमानित आवश्यकता से अधिक रही। उन्होंने कहा कि इससे राज्य में उपलब्ध भंडार पर असर पड़ा है, हालाँकि स्थिति नियंत्रण में है। केंद्र सरकार आपूर्ति पर लगातार नज़र बनाए हुए है और किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए प्रतिबद्ध है।