उर्वरक आपूर्ति स्थिर: वार्षिक जरूरत का 51% स्टॉक उपलब्ध, खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त भंडार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 25 मई 2026 को स्पष्ट किया कि देश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति सामान्य स्तर से अधिक एवं स्थिर बनी हुई है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने बताया कि इस समय देश में वार्षिक आवश्यकता का करीब 51 प्रतिशत स्टॉक उपलब्ध है, जो आगामी खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।
मौजूदा स्टॉक और आवश्यकता
शर्मा के अनुसार, चालू वर्ष में देश में 390.54 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों की कुल आवश्यकता होगी। इसके सापेक्ष मौजूदा स्टॉक स्तर 200.12 लाख मीट्रिक टन है, जो निर्धारित बेंचमार्क 33 प्रतिशत से काफी अधिक है। यह आँकड़ा किसानों के लिए राहत की बात है, विशेषकर जब मानसून की दस्तक के साथ बुवाई का मौसम नज़दीक आ रहा है।
घरेलू उत्पादन और आयात की स्थिति
शर्मा ने बताया कि कुल घरेलू उत्पादन लगभग 95 लाख मीट्रिक टन रहा है, जबकि लगभग 22.60 लाख मीट्रिक टन के आयात ने आपूर्ति को और मजबूत किया है। इससे उर्वरकों की उपलब्धता में 117.6 लाख मीट्रिक टन की वृद्धि हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि मध्य पूर्व संकट शुरू होने के बाद भी घरेलू उत्पादन और आयात मजबूत बने रहे हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखला पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा।
प्रमुख उर्वरकों का विवरण
विभाग द्वारा साझा किए गए आँकड़ों के अनुसार, यूरिया का घरेलू उत्पादन 57.66 लाख मीट्रिक टन और आयात 13.60 लाख मीट्रिक टन रहा। डायअमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) का उत्पादन 7.93 लाख मीट्रिक टन और आयात 0.88 लाख मीट्रिक टन दर्ज किया गया।
एनपीके (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम) का घरेलू उत्पादन 18.71 लाख मीट्रिक टन और आयात 4.44 लाख मीट्रिक टन रहा। सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) का उत्पादन 10.70 लाख मीट्रिक टन रहा और इसका कोई आयात नहीं हुआ। वहीं, पोटेशियम क्लोराइड (एमओपी) पूरी तरह आयात पर निर्भर है और इसका 3.68 लाख मीट्रिक टन आयात किया गया।
खरीफ सीजन के लिए तैयारी
अतिरिक्त सचिव ने बताया कि देश ने प्रमुख उर्वरकों की पर्याप्त मात्रा पहले से सुरक्षित कर ली है — इसमें 13.5 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 9 लाख मीट्रिक टन एनपीके शामिल हैं। इससे आगामी खरीफ सीजन में किसानों को समय पर उर्वरक मिलने की पूरी उम्मीद है।
उर्वरक उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता भी संतोषजनक बनी हुई है और विभाग इसकी नियमित समीक्षा कर रहा है। आने वाले महीनों में आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखने के लिए सरकार सतर्क नज़र रखे हुए है।