खरीफ सीजन 2026: केंद्र सरकार ने कहा — उर्वरक स्टॉक पर्याप्त, यूरिया सब्सिडी की होगी समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच केंद्र सरकार ने 11 जून 2026 को स्पष्ट किया कि भारत की उर्वरक सुरक्षा पूरी तरह मजबूत है और चालू खरीफ बुआई सीजन की माँग को पूरा करने के लिए देशभर में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। साथ ही, वैश्विक यूरिया कीमतों में भारी गिरावट के मद्देनजर चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उर्वरक सब्सिडी अनुमानों की पुनः समीक्षा का संकेत भी दिया गया है।
सरकार की आधिकारिक स्थिति
पश्चिम एशिया की ताज़ा स्थिति पर आयोजित मंत्रालयीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में रसायन और उर्वरक मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने कहा, "देश में उर्वरक का स्टॉक संतोषजनक स्थिति में है। भारत की उर्वरक सुरक्षा पहले की तरह ही मजबूत बनी हुई है।" उन्होंने किसानों और राज्य सरकारों को आश्वस्त किया कि बुआई के मौसम में आपूर्ति बाधित नहीं होगी।
यूरिया सब्सिडी की होगी समीक्षा
शर्मा ने बताया कि 2026-27 के लिए सरकार का शुरुआती उर्वरक सब्सिडी अनुमान उस समय के बाज़ार रुझानों पर आधारित था। हालाँकि, वैश्विक बाज़ार में हाल की घटनाओं — विशेष रूप से यूरिया आयात के नए टेंडर में अपेक्षाकृत कम दरें सामने आने — के बाद इन अनुमानों पर पुनर्विचार आवश्यक हो सकता है। उन्होंने कहा कि आपूर्तिकर्ताओं द्वारा दी गई मात्रा की पुष्टि और कुल आयात आवश्यकता का आकलन करने के बाद सरकार सब्सिडी के आँकड़ों को अंतिम रूप देगी।
टेंडर में रिकॉर्ड बोलियाँ
यह समीक्षा ऐसे समय में हो रही है जब सरकारी कंपनी नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) को मात्र 17 लाख टन यूरिया आयात के टेंडर के मुकाबले 60 लाख टन से अधिक यूरिया के लिए बोलियाँ प्राप्त हुई हैं। यह अतिरिक्त आपूर्ति रुचि वैश्विक बाज़ार में यूरिया की कीमतों में आई गिरावट का प्रत्यक्ष परिणाम है। गौरतलब है कि यूरिया की कम कीमतें सब्सिडी बोझ को सीमित रखने में सहायक होंगी और आगामी रबी सीजन के लिए भी पोषक तत्वों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करेंगी।
आपूर्ति श्रृंखला: विविध स्रोत
शर्मा ने उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति का श्रेय दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों, विदेशों में संयुक्त उद्यमों और विदेश स्थित भारतीय मिशनों के समन्वित प्रयासों को दिया। उन्होंने बताया कि यूरिया की आपूर्ति ओमान, मलेशिया, वियतनाम, जॉर्जिया, नाइजीरिया, रूस, फिनलैंड, मिस्र, अल्जीरिया, तुर्की और नीदरलैंड जैसे देशों से सुनिश्चित की गई है। इसी तरह, डीएपी और एनपीके उर्वरक रूस, मोरक्को, मिस्र, अमेरिका, जॉर्डन, दक्षिण कोरिया, ट्यूनीशिया और सऊदी अरब से मँगाए जा रहे हैं।
किसानों पर असर और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब देश के बड़े हिस्से में खरीफ बुआई का मौसम शुरू हो रहा है और किसानों को खाद की उपलब्धता को लेकर चिंता रहती है। वैश्विक यूरिया कीमतों में गिरावट से जहाँ सरकारी खजाने पर सब्सिडी का दबाव कम होने की उम्मीद है, वहीं किसानों को रियायती दरों पर खाद मिलती रहेगी। सब्सिडी की अंतिम राशि आयात मात्रा की पुष्टि के बाद तय की जाएगी।