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पश्चिम एशिया तनाव के बीच खाद स्टॉक मजबूत: यूरिया ₹266.5 में, किसानों को राहत जारी

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पश्चिम एशिया तनाव के बीच खाद स्टॉक मजबूत: यूरिया ₹266.5 में, किसानों को राहत जारी

सारांश

पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत सरकार ने खाद आपूर्ति और कीमतें दोनों थाम रखी हैं। खरीफ 2026 के लिए 190 एलएमटी स्टॉक — जरूरत का 49% — पहले से मौजूद है, जबकि किसानों को यूरिया वैश्विक दाम के एक अंश पर मिल रही है।

मुख्य बातें

उर्वरक मंत्रालय ने 27 अप्रैल 2026 को पुष्टि की कि खाद स्टॉक और सप्लाई दोनों मजबूत हैं।
खरीफ 2026 की जरूरत 390.54 एलएमटी के मुकाबले अभी 190 एलएमटी स्टॉक उपलब्ध — कुल जरूरत का 49% ।
वैश्विक बाजार में यूरिया ₹4,000 प्रति बैग से ऊपर, लेकिन किसानों को ₹266.5 प्रति 45 किलो बैग पर मिल रही है।
यूरिया की उपलब्धता 71.40 एलएमटी , जबकि जरूरत केवल 20.54 एलएमटी ।
उर्वरक संयंत्रों को 97% एलएनजी/आरएलएनजी आपूर्ति जारी, अधिकांश यूरिया प्लांट पूर्ण क्षमता पर।
फरवरी 2026 में वैश्विक टेंडर से 13.07 एलएमटी यूरिया हासिल; कुल 25 एलएमटी यूरिया सुरक्षित।

उर्वरक मंत्रालय ने 27 अप्रैल 2026 को आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत में खाद (फर्टिलाइजर) की उपलब्धता और सप्लाई पूरी तरह मजबूत बनी हुई है। केंद्र सरकार के अनुसार, देश में खाद की आपूर्ति वास्तविक जरूरत से कहीं अधिक है और किसानों को किसी भी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के बावजूद घरेलू खुदरा कीमतें स्थिर रखी गई हैं।

मुख्य घटनाक्रम

मंत्रालय के अनुसार, खरीफ 2026 सीजन के लिए कुल खाद की अनुमानित आवश्यकता 390.54 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) है। इसके मुकाबले अभी देश में लगभग 190 एलएमटी खाद का स्टॉक मौजूद है, जो कुल जरूरत का लगभग 49 प्रतिशत है। आमतौर पर यह आंकड़ा 33 प्रतिशत के आसपास रहता है, लेकिन इस बार बेहतर योजना और लॉजिस्टिक्स प्रबंधन के कारण स्टॉक अधिक है।

अलग-अलग खादों की उपलब्धता भी जरूरत से काफी अधिक है। यूरिया की उपलब्धता 71.40 एलएमटी है, जबकि खरीफ सीजन की जरूरत केवल 20.54 एलएमटी है। इसी तरह डाई-अमोनियम फास्फेट (डीएपी), एनपीके, म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) और सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

किसानों के लिए कीमतें स्थिर

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमत ₹4,000 प्रति बैग से ऊपर पहुँच गई है, लेकिन भारत में किसानों को यह केवल ₹266.5 प्रति 45 किलो बैग पर मिल रही है। डीएपी और टीएसपी जैसे अन्य प्रमुख उर्वरकों की खुदरा कीमतों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य किसानों को वैश्विक महंगाई के प्रभाव से बचाना और उन्हें सस्ती दरों पर खाद सुनिश्चित करना है।

घरेलू उत्पादन और आयात की तैयारी

सरकार ने घरेलू उत्पादन और आयात दोनों मोर्चों पर तैयारी मजबूत रखी है। आंकड़ों के अनुसार, देश में 59.01 एलएमटी खाद का घरेलू उत्पादन हुआ है और 13.96 एलएमटी खाद का आयात किया गया है। इसके अतिरिक्त, भारत ने फरवरी 2026 में वैश्विक टेंडर के माध्यम से 13.07 एलएमटी यूरिया हासिल किया था और अब कुल 25 एलएमटी यूरिया सुरक्षित कर लिया गया है।

डीएपी, टीएसपी और अमोनियम सल्फेट की अतिरिक्त खरीद के लिए नए ग्लोबल टेंडर भी जारी किए गए हैं, ताकि पीक सीजन में किसी प्रकार की कमी न हो।

प्राकृतिक गैस आपूर्ति सामान्य

मंत्रालय ने बताया कि उर्वरक उत्पादन के लिए आवश्यक प्राकृतिक गैस की उपलब्धता भी सामान्य बनी हुई है। वर्तमान में उर्वरक संयंत्रों को लगभग 97 प्रतिशत एलएनजी/आरएलएनजी की आपूर्ति हो रही है और अधिकांश यूरिया संयंत्र पूरी क्षमता पर काम कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

आगे की स्थिति

गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव बना हुआ है, फिर भी भारत ने समय पर टेंडर और विविध आयात स्रोतों के जरिए आपूर्ति सुरक्षित रखी है। खरीफ सीजन की शुरुआत मजबूत स्टॉक स्थिति के साथ हो रही है और सरकार का कहना है कि किसानों को निर्बाध आपूर्ति जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब खरीफ सीजन अपने चरम पर होगा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव और बढ़े। 49% स्टॉक आंकड़ा प्रभावशाली दिखता है, परंतु यह ध्यान देने योग्य है कि आयात पर निर्भरता — विशेषकर डीएपी और पोटाश के लिए — अभी भी बनी हुई है और पश्चिम एशिया तनाव उन मार्गों को प्रभावित कर सकता है। सब्सिडी का बोझ भी बढ़ रहा है, क्योंकि वैश्विक और घरेलू कीमतों का अंतर पहले से कहीं अधिक है — यह दीर्घकालिक राजकोषीय दबाव का संकेत है जिस पर सरकार अभी चुप है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में खरीफ 2026 के लिए खाद का कितना स्टॉक उपलब्ध है?
उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, खरीफ 2026 सीजन के लिए कुल 390.54 एलएमटी की जरूरत के मुकाबले अभी देश में लगभग 190 एलएमटी खाद का स्टॉक मौजूद है, जो कुल जरूरत का करीब 49 प्रतिशत है। सामान्यतः यह आंकड़ा 33 प्रतिशत के आसपास रहता है।
भारत में किसानों को यूरिया कितने दाम पर मिल रही है?
भारत में किसानों को यूरिया केवल ₹266.5 प्रति 45 किलो बैग पर उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि वैश्विक बाजार में इसकी कीमत ₹4,000 प्रति बैग से ऊपर पहुँच गई है। सरकार ने सब्सिडी के जरिए यह अंतर वहन किया है।
पश्चिम एशिया तनाव का भारत की खाद आपूर्ति पर क्या असर पड़ा है?
उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद भारत की खाद आपूर्ति और उत्पादन पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा है। सरकार ने समय पर वैश्विक टेंडर और विविध आयात स्रोतों के जरिए आपूर्ति सुरक्षित रखी है।
खाद उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस की स्थिति क्या है?
मंत्रालय के अनुसार, उर्वरक संयंत्रों को लगभग 97 प्रतिशत एलएनजी/आरएलएनजी की आपूर्ति हो रही है और अधिकांश यूरिया संयंत्र पूरी क्षमता पर काम कर रहे हैं। इससे उत्पादन में कोई रुकावट नहीं आ रही है।
डीएपी और अन्य खादों की कीमतें बढ़ी हैं?
नहीं, मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि डीएपी, टीएसपी और अन्य प्रमुख उर्वरकों की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वैश्विक कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद भारत में किसानों के लिए दाम स्थिर रखे गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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