रेजीनगर उपचुनाव 2026: हुमायूं कबीर का आरोप — पश्चिम बंगाल पुलिस भाजपा के इशारे पर कार्यकर्ताओं को धमका रही है
सारांश
मुख्य बातें
आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के अध्यक्ष और नाओदा विधानसभा सीट के विधायक हुमायूं कबीर ने 24 सितंबर 2026 को मुर्शिदाबाद जिले के रेजीनगर थाने के सामने अचानक धरने पर बैठकर पश्चिम बंगाल पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि 6 अक्टूबर 2026 को होने वाले रेजीनगर उपचुनाव से पहले पुलिस जानबूझकर उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को झूठे मामलों में फँसा रही है और मतदाताओं को डरा-धमकाकर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।
मुख्य आरोप और धरने की पृष्ठभूमि
कबीर ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि रेजीनगर, शक्तिपुर और बेलडांगा थानों की पुलिस भाजपा के निर्देश पर काम कर रही है। उनके अनुसार, पुलिसकर्मी मुस्लिम परिवारों के घरों में जाकर उन्हें धमका रहे हैं और मतदान समाप्त होने तक घर छोड़ने का दबाव बना रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल उनकी पार्टी के करीब 15 नेताओं और कार्यकर्ताओं को कथित रूप से झूठे मामलों में हिरासत में लिया गया है।
सैफुल इस्लाम की गिरफ्तारी
कबीर के अनुसार, बुधवार रात को रेजीनगर थाना पुलिस ने रामपाड़ा-1 ग्राम पंचायत के सदस्य और उनके करीबी माने जाने वाले सैफुल इस्लाम को गिरफ्तार किया। उनका आरोप है कि यह गिरफ्तारी उपचुनाव से पहले पार्टी संगठन को कमज़ोर करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
चुनाव आयोग पर निशाना
कबीर ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त होने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई की संभावना कम है। उनके अनुसार, उपचुनाव की तारीख की घोषणा के बाद से ही पुलिस की कार्रवाइयाँ तेज़ हो गई हैं, और चुनाव आयोग का रवैया इस स्थिति को नज़रअंदाज़ कर रहा है।
आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का दावा
कबीर ने स्पष्ट रूप से कहा कि पुलिस आदर्श आचार संहिता के नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रही है। उनका आरोप है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के बजाय पुलिस और सरकार मिलकर भाजपा को लाभ पहुँचाने की कोशिश में हैं। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में उपचुनावों के दौरान सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप का इतिहास रहा है। यह मामला ऐसे समय में आया है जब राज्य में राजनीतिक तनाव पहले से ही उच्च स्तर पर है।
आगे क्या
कबीर ने संकेत दिया कि यदि पुलिस की कार्रवाइयाँ नहीं रुकीं, तो वे अपना विरोध-प्रदर्शन तेज़ करेंगे। 6 अक्टूबर 2026 को होने वाले रेजीनगर उपचुनाव से पहले यह मामला निर्वाचन आयोग और न्यायिक मंचों तक पहुँच सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस विवाद का असर मुर्शिदाबाद की सियासी तस्वीर पर पड़ सकता है।