रेजीनगर उपचुनाव: हुमायूं कबीर का पुलिस पर पक्षपात का आरोप, हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल करेंगे
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा होते ही राजनीतिक सरगर्मी तेज़ हो गई है। आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के अध्यक्ष एवं रेजीनगर से विधायक हुमायूं कबीर ने 15 सितंबर 2026 को पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उपचुनाव की घोषणा के बाद से जानबूझकर उनके और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस मामले में बुधवार को हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल करेंगे।
मुख्य आरोप और घटनाक्रम
कबीर ने आरोप लगाया कि सागरपाड़ा, रेजीनगर और बेलडांगा थाना क्षेत्रों में केवल उनके समर्थकों के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई की जा रही है, जबकि अन्य राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं पर कोई कदम नहीं उठाया जा रहा। उन्होंने कहा, "लोकतंत्र में सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को शांतिपूर्वक चुनाव लड़ने और प्रचार करने का समान अधिकार होना चाहिए।"
एक हालिया गिरफ्तारी पर टिप्पणी से बचते हुए उन्होंने कहा कि अगर कोई कानून के खिलाफ काम करता है तो पुलिस की कार्रवाई उचित है, इसलिए उस गिरफ्तारी पर वे कुछ नहीं कहेंगे। हालाँकि, व्यापक रूप से वे यह मानते हैं कि उपचुनाव की आड़ में उनकी पार्टी को कमज़ोर करने की कोशिश हो रही है।
भाजपा और पुलिस पर निशाना
कबीर ने सीधे तौर पर जिले के पुलिस अधीक्षक पर निष्पक्षता की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इशारे पर काम कर रही है और सरकारी ताकत का उपयोग आम लोगों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। यह आरोप विपक्षी दलों द्वारा बंगाल में पुलिस की कार्यशैली पर उठाए जाने वाले सवालों की एक लंबी शृंखला का हिस्सा है।
उन्होंने बिहार के बांकीपुर उपचुनाव का उदाहरण देते हुए तर्क दिया कि यदि प्रशासनिक मशीनरी से चुनाव जिताए जा सकते तो वहाँ BJP के वरिष्ठ नेता — जो कई बार विधायक रह चुके थे — हार नहीं जाते। उनका यह तर्क इस दावे को चुनौती देने के लिए था कि सत्ता पक्ष के प्रशासनिक दबाव से चुनाव परिणाम बदले जा सकते हैं।
हाईकोर्ट का रुख और संवैधानिक दलील
कबीर ने कहा कि चुनाव लड़ना, प्रचार करना और मतदान प्रक्रिया में भाग लेना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। इस आधार पर वे बुधवार को हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल करेंगे और प्रशासन पर अंकुश लगाने की माँग करेंगे। उनका कहना है कि इस संदेश को वे चुनाव आयोग और देश की सभी राजनीतिक पार्टियों तक पहुँचाना चाहते हैं।
आम जनता पर असर और आगे की राह
गौरतलब है कि रेजीनगर विधानसभा सीट मुर्शिदाबाद जिले में राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील मानी जाती है और यहाँ का उपचुनाव कई दलों के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। यदि हाईकोर्ट याचिका स्वीकार करता है तो चुनाव प्रक्रिया के दौरान पुलिस कार्रवाई पर न्यायिक निगरानी संभव है, जो क्षेत्र के मतदाताओं और उम्मीदवारों दोनों को प्रभावित कर सकती है। यह मामला इस बात का भी संकेत है कि उपचुनाव से पहले ज़मीनी तनाव किस हद तक बढ़ चुका है।