सोनारपुर में फर्जी ऑन्कोलॉजिस्ट गिरफ्तार: नकली MBBS-FRCS डिग्री से ₹800 प्रति मरीज वसूल रहा था विश्वरूप आचार्य
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर इलाके में पुलिस ने सोमवार रात एक फर्जी डॉक्टर को गिरफ्तार किया, जो नकली MBBS और FRCS डिग्री के बल पर खुद को ऑन्कोलॉजिस्ट बताकर मरीजों का इलाज कर रहा था और प्रति विजिट ₹800 वसूल रहा था। आरोपी की पहचान विश्वरूप आचार्य के रूप में हुई है, जिन्हें 15 सितंबर 2026 को बारुईपुर सब-डिविजनल कोर्ट में पेश किया गया।
कैसे हुआ खुलासा
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, मामले की शुरुआत तब हुई जब सोनारपुर के घसियारा इलाके में विश्वरूप आचार्य ने एक घर में नया क्लिनिक खोला। घर के मालिक को उनकी गतिविधियों पर संदेह हुआ और उन्होंने स्थानीय पुलिस को सूचना दी।
इसके बाद पुलिस ने एक नकली मरीज — यानी वर्दी से बाहर एक अधिकारी — को क्लिनिक में भेजा। अधिकारी ने बताया, 'एक-दो बातचीत में ही साफ हो गया कि वह नकली डॉक्टर हैं। उनकी सभी डिग्रियां नकली थीं। उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया।' शुरुआती जांच में आरोपी की पहचान और उनकी डिग्रियों में कई गड़बड़ियां पाई गईं।
आरोपी का तरीकाकार
पुलिस के मुताबिक, विश्वरूप आचार्य कथित तौर पर आठ अलग-अलग जगहों पर प्रैक्टिस कर रहे थे। वह खुद को ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) बताते थे और प्रत्येक मरीज से प्रति विजिट ₹800 की फीस लेते थे। यह ऐसे समय में आया है जब फर्जी डॉक्टरों की समस्या पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।
गौरतलब है कि एक ऑन्कोलॉजिस्ट की फर्जी पहचान अपनाना साधारण चिकित्सकीय धोखाधड़ी से कहीं अधिक गंभीर है — कैंसर के इलाज में गलत निदान और उपचार का सीधा असर मरीज की जान पर पड़ सकता है।
पुलिस की जांच का दायरा
वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच अब इस बात का पता लगाने पर केंद्रित है कि आचार्य को नकली डिग्रियां कहां से मिलीं और 'क्या इसमें कोई बड़ा आपराधिक गिरोह शामिल है।' अधिकारियों के अनुसार, यह भी जांचा जा रहा है कि आचार्य इतने लंबे समय तक इतनी जगहों पर बिना किसी जांच के कैसे प्रैक्टिस करते रहे।
पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि आचार्य के इलाज से कितने मरीज प्रभावित हुए और क्या किसी को गलत दवाएं या उपचार दिया गया।
कानूनी कार्रवाई
आरोपी विश्वरूप आचार्य को सोमवार रात गिरफ्तार कर मंगलवार 15 सितंबर 2026 को बारुईपुर सब-डिविजनल कोर्ट में पेश किया गया। उन पर चिकित्सा धोखाधड़ी और नकली दस्तावेजों के उपयोग से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
आम जनता पर असर
यह मामला रोगियों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। आठ क्लिनिकों में दीर्घकाल से प्रैक्टिस करने वाले इस कथित फर्जी ऑन्कोलॉजिस्ट ने कितने मरीजों का इलाज किया, यह स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों को किसी भी डॉक्टर की डिग्री और पंजीकरण राज्य चिकित्सा परिषद से सत्यापित करने का अधिकार है।
जांच के नतीजे आने वाले दिनों में इस मामले की व्यापकता को और स्पष्ट करेंगे।