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सोनारपुर में फर्जी ऑन्कोलॉजिस्ट गिरफ्तार: नकली MBBS-FRCS डिग्री से ₹800 प्रति मरीज वसूल रहा था विश्वरूप आचार्य

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सोनारपुर में फर्जी ऑन्कोलॉजिस्ट गिरफ्तार: नकली MBBS-FRCS डिग्री से ₹800 प्रति मरीज वसूल रहा था विश्वरूप आचार्य

सारांश

सोनारपुर में एक शख्स कैंसर विशेषज्ञ बनकर आठ क्लिनिकों में मरीजों से ₹800 प्रति विजिट वसूल रहा था — जब घर मालिक को शक हुआ और पुलिस ने नकली मरीज भेजा, तो सारी डिग्रियां फर्जी निकलीं। अब जांच का केंद्र यह है: नकली दस्तावेज़ कहां से आए और कोई बड़ा गिरोह तो नहीं है इसके पीछे।

मुख्य बातें

विश्वरूप आचार्य को सोमवार रात पश्चिम बंगाल के सोनारपुर (दक्षिण 24 परगना) में गिरफ्तार किया गया।
आरोपी नकली MBBS और FRCS डिग्री के जरिए खुद को ऑन्कोलॉजिस्ट बताकर ₹800 प्रति विजिट वसूल रहा था।
कथित तौर पर आचार्य आठ जगहों पर प्रैक्टिस कर रहे थे; घसियारा में नया क्लिनिक खोला था।
घर मालिक की सूचना पर पुलिस ने नकली मरीज भेजकर क्लिनिक पर छापा मारा।
आरोपी को 15 सितंबर 2026 को बारुईपुर सब-डिविजनल कोर्ट में पेश किया गया।
पुलिस जांच कर रही है कि नकली डिग्रियां कहां से आईं और क्या कोई आपराधिक गिरोह इसमें शामिल है।

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर इलाके में पुलिस ने सोमवार रात एक फर्जी डॉक्टर को गिरफ्तार किया, जो नकली MBBS और FRCS डिग्री के बल पर खुद को ऑन्कोलॉजिस्ट बताकर मरीजों का इलाज कर रहा था और प्रति विजिट ₹800 वसूल रहा था। आरोपी की पहचान विश्वरूप आचार्य के रूप में हुई है, जिन्हें 15 सितंबर 2026 को बारुईपुर सब-डिविजनल कोर्ट में पेश किया गया।

कैसे हुआ खुलासा

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, मामले की शुरुआत तब हुई जब सोनारपुर के घसियारा इलाके में विश्वरूप आचार्य ने एक घर में नया क्लिनिक खोला। घर के मालिक को उनकी गतिविधियों पर संदेह हुआ और उन्होंने स्थानीय पुलिस को सूचना दी।

इसके बाद पुलिस ने एक नकली मरीज — यानी वर्दी से बाहर एक अधिकारी — को क्लिनिक में भेजा। अधिकारी ने बताया, 'एक-दो बातचीत में ही साफ हो गया कि वह नकली डॉक्टर हैं। उनकी सभी डिग्रियां नकली थीं। उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया।' शुरुआती जांच में आरोपी की पहचान और उनकी डिग्रियों में कई गड़बड़ियां पाई गईं।

आरोपी का तरीकाकार

पुलिस के मुताबिक, विश्वरूप आचार्य कथित तौर पर आठ अलग-अलग जगहों पर प्रैक्टिस कर रहे थे। वह खुद को ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) बताते थे और प्रत्येक मरीज से प्रति विजिट ₹800 की फीस लेते थे। यह ऐसे समय में आया है जब फर्जी डॉक्टरों की समस्या पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।

गौरतलब है कि एक ऑन्कोलॉजिस्ट की फर्जी पहचान अपनाना साधारण चिकित्सकीय धोखाधड़ी से कहीं अधिक गंभीर है — कैंसर के इलाज में गलत निदान और उपचार का सीधा असर मरीज की जान पर पड़ सकता है।

पुलिस की जांच का दायरा

वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच अब इस बात का पता लगाने पर केंद्रित है कि आचार्य को नकली डिग्रियां कहां से मिलीं और 'क्या इसमें कोई बड़ा आपराधिक गिरोह शामिल है।' अधिकारियों के अनुसार, यह भी जांचा जा रहा है कि आचार्य इतने लंबे समय तक इतनी जगहों पर बिना किसी जांच के कैसे प्रैक्टिस करते रहे।

पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि आचार्य के इलाज से कितने मरीज प्रभावित हुए और क्या किसी को गलत दवाएं या उपचार दिया गया।

कानूनी कार्रवाई

आरोपी विश्वरूप आचार्य को सोमवार रात गिरफ्तार कर मंगलवार 15 सितंबर 2026 को बारुईपुर सब-डिविजनल कोर्ट में पेश किया गया। उन पर चिकित्सा धोखाधड़ी और नकली दस्तावेजों के उपयोग से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

आम जनता पर असर

यह मामला रोगियों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। आठ क्लिनिकों में दीर्घकाल से प्रैक्टिस करने वाले इस कथित फर्जी ऑन्कोलॉजिस्ट ने कितने मरीजों का इलाज किया, यह स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि मरीजों को किसी भी डॉक्टर की डिग्री और पंजीकरण राज्य चिकित्सा परिषद से सत्यापित करने का अधिकार है।

जांच के नतीजे आने वाले दिनों में इस मामले की व्यापकता को और स्पष्ट करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह है कि राज्य चिकित्सा परिषद और स्वास्थ्य विभाग की जांच इतने समय तक क्यों नहीं हुई। पश्चिम बंगाल में फर्जी डॉक्टरों की यह पहली घटना नहीं है; बार-बार उजागर होने वाले ऐसे मामले बताते हैं कि डिग्री सत्यापन की व्यवस्था कागज़ों तक सीमित है। जब तक डॉक्टर पंजीकरण का रियल-टाइम सार्वजनिक डेटाबेस नहीं बनता, मरीज असुरक्षित रहेंगे।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोनारपुर में फर्जी डॉक्टर कौन है और उसे कब गिरफ्तार किया गया?
आरोपी का नाम विश्वरूप आचार्य है, जिसे सोमवार रात (14-15 सितंबर 2026) पश्चिम बंगाल के सोनारपुर इलाके में गिरफ्तार किया गया। वह नकली MBBS और FRCS डिग्री से खुद को ऑन्कोलॉजिस्ट बताकर मरीजों का इलाज कर रहा था।
विश्वरूप आचार्य किस तरह की नकली डिग्रियां इस्तेमाल कर रहा था?
पुलिस के अनुसार, आचार्य नकली MBBS (बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी) और FRCS (फेलो ऑफ रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स) डिग्रियों का उपयोग कर रहा था। शुरुआती जांच में इन दस्तावेजों में कई गड़बड़ियां पाई गईं।
पुलिस को फर्जी डॉक्टर की जानकारी कैसे मिली?
सोनारपुर के घसियारा इलाके में जिस घर में आचार्य ने क्लिनिक खोला था, उस घर के मालिक को उनकी गतिविधियों पर संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया। इसके बाद पुलिस ने एक अधिकारी को नकली मरीज बनाकर क्लिनिक में भेजा और छापा मारकर गिरफ्तारी की।
क्या आचार्य के पीछे कोई बड़ा गिरोह हो सकता है?
पुलिस इसकी जांच कर रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नकली डिग्रियां कहां से आईं और 'क्या इसमें कोई बड़ा आपराधिक गिरोह शामिल है।' फिलहाल इस संबंध में कोई पुष्टि नहीं हुई है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
आरोपी विश्वरूप आचार्य को 15 सितंबर 2026 को बारुईपुर सब-डिविजनल कोर्ट में पेश किया गया और न्यायिक प्रक्रिया जारी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वह आठ क्लिनिकों में इतने लंबे समय तक कैसे प्रैक्टिस करते रहे और कितने मरीज प्रभावित हुए।
राष्ट्र प्रेस
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