8 अगस्त 2026
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वलसाड में फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार: ₹53,751 की 31 ब्रांड दवाएं जब्त, गुजरात में बढ़ते मामले

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वलसाड में फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार: ₹53,751 की 31 ब्रांड दवाएं जब्त, गुजरात में बढ़ते मामले

सारांश

वलसाड में बिना डिग्री के प्रैक्टिस कर रहे जयकरण प्रजापत को पुलिस ने गिरफ्तार किया और ₹53,751 की 31 ब्रांड दवाएं जब्त कीं। यह गुजरात में फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ बढ़ते अभियान की एक और कड़ी है, जहाँ 2021-2023 के बीच 2,724 शिकायतों में 154 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं।

मुख्य बातें

जयकरण प्रजापत को 8 अगस्त 2026 को वलसाड जिले के कपराडा तालुका में बिना मेडिकल डिग्री के प्रैक्टिस करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
छापे में ₹53,751.20 मूल्य की एलोपैथिक दवाओं के 31 ब्रांड बरामद किए गए।
आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 125 और मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एक्ट की धारा 30 के तहत एफआईआर दर्ज।
गुजरात में 2021 से 2023 के बीच फर्जी डॉक्टरों की 2,724 शिकायतें मिलीं; 169 के पास फर्जी डिग्री, 154 एफआईआर दर्ज।
जून में आनंद और जुलाई में दाहोद में भी फर्जी डॉक्टर पकड़े गए थे।

गुजरात पुलिस ने वलसाड जिले के कपराडा तालुका में 8 अगस्त 2026 को एक व्यक्ति को बिना किसी मेडिकल डिग्री के मरीजों का इलाज करने के आरोप में गिरफ्तार किया। छापे के दौरान पुलिस ने ₹53,751.20 मूल्य की एलोपैथिक दवाओं के 31 अलग-अलग ब्रांड बरामद किए। यह गिरफ्तारी गुजरात में फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ चल रहे अभियान की कड़ी में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

कौन है आरोपी और कहाँ से हुई गिरफ्तारी

आरोपी की पहचान जयकरण प्रजापत के रूप में हुई है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर जिले की घाटमपुर तालुका के भटपुरवा समूही का निवासी है। वह वर्तमान में कपराडा तालुका के वालवेरी फाटक के पास नारनभाई देवरामभाई के किराए के मकान में रह रहा था और वहीं से मरीजों का इलाज कर रहा था।

असिस्टेंट हेड कॉन्स्टेबल आशीषभाई अर्जुनभाई को गुप्त सूचना मिली कि जयकरण बिना डिग्री के डॉक्टर की प्रैक्टिस कर रहा है। इसके बाद इंस्पेक्टर डी.एन. वंजा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने, जिसमें रोहियाल जंगल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के एक मेडिकल ऑफिसर और एक फार्मासिस्ट भी शामिल थे, किराए के मकान पर छापा मारा।

मुख्य घटनाक्रम: छापे से गिरफ्तारी तक

छापे के दौरान जयकरण को मरीजों को एलोपैथिक और अन्य दवाएं देते हुए पाया गया। पुलिस के अनुसार उसके पास कोई भी वैध मेडिकल डिग्री या लाइसेंस नहीं था। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की अवैध प्रैक्टिस से मरीजों की जान और शारीरिक सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

जयकरण को कपराडा पुलिस स्टेशन लाया गया, जहाँ उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 125 और मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एक्ट की धारा 30 के तहत एफआईआर दर्ज की गई।

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर हुई कार्रवाई

यह अभियान सूरत डिवीजन के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस प्रेम वीर सिंह, वलसाड के सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस डॉ. युवराजसिंह जडेजा और धरमपुर डिवीजन के असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस डॉ. संदीप टी. के निर्देशों पर संचालित किया गया। तीनों वरिष्ठ अधिकारियों ने बिना योग्यता के इलाज कर रहे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए थे।

गुजरात में फर्जी डॉक्टरों का व्यापक संकट

यह गिरफ्तारी राज्य में एक बड़े और चिंताजनक रुझान का हिस्सा है। जुलाई में दाहोद में एक फर्जी डॉक्टर को तब पकड़ा गया जब पाया गया कि वह बिना किसी योग्यता या लाइसेंस के मरीजों का उपचार कर रहा था।

जून में आनंद पुलिस ने 58 वर्षीय नितिन दह्या परमार को गिरफ्तार किया था, जिस पर बोरसद में अपने घर से दो दशकों से अधिक समय तक अवैध मेडिकल प्रैक्टिस चलाने का आरोप था।

गौरतलब है कि मार्च में राज्य सरकार ने विधानसभा को बताया था कि 2021 से 2023 के बीच फर्जी डॉक्टरों से संबंधित 2,724 शिकायतों की जाँच की गई। इनमें से 169 लोगों के पास फर्जी डिग्रियाँ पाई गईं और 154 एफआईआर दर्ज की गईं।

आगे क्या होगा

जयकरण प्रजापत फिलहाल पुलिस हिरासत में है और आगे की जाँच जारी है। राज्य भर में फर्जी चिकित्सकों के खिलाफ यह अभियान आने वाले समय में और तेज होने की संभावना है, क्योंकि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इसे प्राथमिकता पर रख रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 2021-2023 के बीच 2,724 शिकायतों में से केवल 154 एफआईआर क्यों दर्ज हुईं — यानी शिकायतों का महज 5.6% ही मुकदमे तक पहुँचा। ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में योग्य डॉक्टरों की भारी कमी इस समस्या की असली जड़ है; जब तक सरकारी स्वास्थ्य ढाँचा इन क्षेत्रों में नहीं पहुँचता, तब तक फर्जी प्रैक्टिशनर्स के लिए खाली जगह बनी रहेगी। गिरफ्तारी ज़रूरी है, लेकिन बिना स्वास्थ्य सेवा विस्तार के यह अभियान केवल लक्षण का उपचार है, बीमारी का नहीं।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वलसाड में गिरफ्तार फर्जी डॉक्टर कौन है?
गिरफ्तार व्यक्ति का नाम जयकरण प्रजापत है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर जिले का रहने वाला है। वह वलसाड जिले के कपराडा तालुका में वालवेरी फाटक के पास किराए के मकान से बिना किसी मेडिकल डिग्री के मरीजों का इलाज कर रहा था।
छापे में क्या बरामद हुआ?
पुलिस ने छापे के दौरान ₹53,751.20 मूल्य की एलोपैथिक दवाओं के 31 अलग-अलग ब्रांड जब्त किए। आरोपी को मरीजों को ये दवाएं देते हुए पकड़ा गया, जबकि उसके पास कोई वैध मेडिकल लाइसेंस नहीं था।
जयकरण प्रजापत पर कौन-सी धाराएं लगाई गई हैं?
उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 125 और मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एक्ट की धारा 30 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। फिलहाल वह पुलिस हिरासत में है और जाँच जारी है।
गुजरात में फर्जी डॉक्टरों की समस्या कितनी बड़ी है?
राज्य सरकार ने मार्च में विधानसभा को बताया था कि 2021 से 2023 के बीच फर्जी डॉक्टरों की 2,724 शिकायतें मिलीं, जिनमें 169 लोगों के पास फर्जी डिग्रियाँ पाई गईं और 154 एफआईआर दर्ज की गईं। जून में आनंद और जुलाई में दाहोद में भी फर्जी डॉक्टर पकड़े जा चुके हैं।
यह कार्रवाई किन अधिकारियों के निर्देश पर हुई?
यह अभियान सूरत डिवीजन के इंस्पेक्टर जनरल प्रेम वीर सिंह, वलसाड के एसपी डॉ. युवराजसिंह जडेजा और धरमपुर डिवीजन के एएसपी डॉ. संदीप टी. के निर्देशों पर चलाया गया। इन वरिष्ठ अधिकारियों ने बिना योग्यता के प्रैक्टिस करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे।
राष्ट्र प्रेस
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