सूरत में 8 फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार: पांडेसरा में क्लीनिकों पर एसओजी का छापा, ₹98,825 की दवाएं जब्त
सारांश
मुख्य बातें
सूरत के पांडेसरा क्षेत्र में 17 सितंबर 2026 को पुलिस ने बिना मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री के क्लीनिक संचालित करने के आरोप में आठ कथित फर्जी डॉक्टरों को गिरफ्तार किया। सूरत पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) और जिला स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने एक साथ आठ क्लीनिकों पर छापेमारी की, जहाँ से ₹98,825 मूल्य की दवाइयाँ, इंजेक्शन और सिरप जब्त किए गए। यह अभियान पुलिस उपायुक्त राजदीपसिंह नकुम की निगरानी में चलाया गया।
अभियान का पूरा घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार यह पूरी कार्रवाई 16 सितंबर 2026 को सूरत के पुलिस आयुक्त के निर्देश पर आरंभ हुई। एसओजी को पहले से सूचना मिली थी कि पांडेसरा इलाके में अनेक व्यक्ति बिना वैध योग्यता के मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
इसकी पुष्टि के लिए पुलिसकर्मियों ने डमी मरीजों के माध्यम से आठ अलग-अलग स्थानों पर जाँच की और सूचना सही पाई जाने पर संयुक्त अभियान चलाने का निर्णय लिया। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल पटेल ने स्वास्थ्य विभाग की तीन टीमें गठित कीं, जबकि एसओजी ने भी अपनी तीन टीमें बनाकर समन्वित छापेमारी की।
गिरफ्तार आरोपी और उनकी पृष्ठभूमि
पार्थ देबनाथ (40), रांचोड़नगर सोसायटी स्थित प्रिंस क्लीनिक संचालित कर रहा था। 12वीं पास यह व्यक्ति पिछले दो वर्षों से क्लीनिक चला रहा था और उसने अपने पिता के बीएचएमएस डॉक्टर होने के आधार पर अनुभव का दावा किया।
सिद्धार्थ देबनाथ (38) ईश्वरनगर में एसके क्लीनिक चला रहा था। वह भी 12वीं पास है और चार वर्षों से क्लीनिक संचालित कर रहा था। विनोदकुमार साहनी (36) बमरोली रोड स्थित एंजेल क्लीनिक में मरीज देख रहा था और पहले विभिन्न अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर सहायक के रूप में काम कर चुका था।
मनोरंजन बिस्वाल (54) प्रगति क्लीनिक चला रहा था। पुलिस के अनुसार उसने बीएससी और बीएएमएस की पढ़ाई की है। सजल बिस्वास (21) साई बाबा क्लीनिक संचालित कर रहा था — वह 12वीं पास है और पहले अस्पताल में कंपाउंडर रह चुका है।
विजय यादव (55) राधेश्याम नगर में एक क्लीनिक चला रहा था। वह 12वीं पास है और 15 वर्षों तक कंपाउंडर के रूप में काम कर चुका था। संदीप सोनावणे (49) कर्मयोगी सोसायटी में 'दवाखाना' नाम से क्लीनिक संचालित कर रहा था — वह 12वीं पास है और महाराष्ट्र के जलगांव जिले के एक अस्पताल में कंपाउंडर रह चुका है। श्यामनारायण गुप्ता (53) श्याम क्लीनिक चला रहा था, उसने बीएससी की पढ़ाई की है और वाराणसी के एक क्लीनिक में काम कर चुका है।
किशोर की मृत्यु से जुड़ा मामला
गौरतलब है कि गिरफ्तार आरोपियों में से पार्थ देबनाथ का नाम एक अन्य गंभीर मामले से भी जुड़ा है। अधिकारियों के अनुसार, उसने पहले स्वास्तिक क्लीनिक नाम से एक डिस्पेंसरी चलाई थी, जहाँ करीब एक महीने पहले पांडेसरा निवासी 14 वर्षीय अभिषेक सिंह का इलाज किया गया था।
बाद में उस किशोर की मृत्यु हो गई, जिसके बाद परिजनों ने देबनाथ पर आरोप लगाए। इस संबंध में पांडेसरा पुलिस थाने में आकस्मिक मृत्यु (एडी) का मामला पहले से दर्ज किया गया था।
कानूनी कार्रवाई और जब्ती
छापेमारी के दौरान टीमों ने विभिन्न दवाइयाँ, इंजेक्शन और सिरप जब्त किए, जिनकी कुल कीमत ₹98,825 बताई गई है। सभी आठ आरोपियों के खिलाफ पांडेसरा पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब गुजरात समेत देशभर में नकली चिकित्सकों की समस्या को लेकर स्वास्थ्य विभागों पर दबाव बढ़ रहा है। आगे की जाँच जारी है और अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस क्षेत्र में इस तरह के और क्लीनिकों की पड़ताल की जा सकती है।